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SIKKI ART

 सिक्की कला सिक्की कला बिहार की प्रसिद्ध लोक एवं हस्तशिल्प कलाओं में से एक है। इसका विकास मुख्य रूप से बिहार के मिथिला क्षेत्र में हुआ है। इस कला में सिक्की नामक सुनहरे रंग की घास का उपयोग करके विभिन्न प्रकार की आकर्षक वस्तुएँ बनाई जाती हैं। सिक्की एक प्रकार की प्राकृतिक घास है, जिसे सुखाकर और रंगकर कलात्मक रूप दिया जाता है। मिथिला की ग्रामीण महिलाओं ने इस कला को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखा है। सिक्की कला से टोकरियाँ, डिब्बे, पर्स, चटाइयाँ, खिलौने, गुड़िया, आभूषण रखने के डिब्बे, कलश, पूजा की वस्तुएँ तथा सजावटी सामान बनाए जाते हैं। इन वस्तुओं पर मोर, मछली, हाथी, पक्षी, पेड़-पौधे और ज्यामितीय आकृतियों जैसी पारंपरिक डिजाइनों का प्रयोग किया जाता है। कई उत्पादों में प्राकृतिक रंगों के साथ लाल, हरा, पीला और नीला रंग भी दिखाई देता है। सिक्की शिल्प बनाने के लिए घास को पहले सुखाया जाता है। इसके बाद उसे आवश्यकतानुसार रंगा जाता है और एक विशेष प्रकार की पतली घास या मूंज के आधार पर बुनाई की जाती है। कुशल कारीगर अपनी कल्पना और बारीक हाथ के काम से साधारण घास को सुंदर कलाकृति में बदल देते हैं। सिक्की...

RIVER MANDAKINI

मंदाकिनी नदी  भारत की एक पवित्र और ऐतिहासिक नदी है। इसकी पहचान मुख्य रूप से दो स्थानों से जुड़ी है। पहली मंदाकिनी उत्तराखंड में बहती है, जिसका उद्गम केदारनाथ के निकट चोराबाड़ी हिमनद (गांधी सरोवर) से माना जाता है। यह नदी रुद्रप्रयाग में  से मिलती है। दूसरी मंदाकिनी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में बहती है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है और जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है। उत्तराखंड की मंदाकिनी नदी लगभग 80 किलोमीटर की यात्रा करते हुए हिमालय की सुंदर घाटियों से गुजरती है। इसके तट पर  स्थित है, जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पवित्र धाम के दर्शन के लिए आते हैं। वर्ष 2013 की विनाशकारी आपदा में मंदाकिनी नदी ने भीषण बाढ़ का रूप धारण किया था, जिससे केदारनाथ क्षेत्र में भारी क्षति हुई थी। चित्रकूट की मंदाकिनी नदी का संबंध भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास काल से माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने चित्रकूट में इसी नदी के तट पर समय व्यतीत किया था। इसलिए यह नदी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। इ...

PANDAV VAN CHITRAKOOT

 चित्रकूट का पांडव वन  चित्रकूट का पांडव वन एक प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल माना जाता है, जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित पवित्र चित्रकूट क्षेत्र में आता है। यह स्थान महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। जनश्रुतियों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय इस वन में निवास किया था, इसलिए इसका नाम पांडव वन पड़ा। पांडव वन प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहाँ घने वृक्ष, शांत वातावरण और हरियाली मन को शांति प्रदान करती है। यह स्थान आध्यात्मिक साधना, ध्यान और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। वन के भीतर कई प्राचीन गुफाएँ और चट्टानी संरचनाएँ भी दिखाई देती हैं, जिन्हें पांडवों के निवास और तपस्थली से जोड़कर देखा जाता है। चित्रकूट स्वयं भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ा हुआ पवित्र क्षेत्र है। इसी कारण पांडव वन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। श्रद्धालु यहाँ आकर पूजा-अर्चना करते हैं तथा महाभारत और रामायण से संबंधित कथाओं का स्मरण करते हैं। स्थानीय संत और पुरोहित इस स्थान की प्राचीनता और धार्मिक परंपराओ...

BRAHM CHELANI

ब्रह्म चेलानी ब्रह्म चेलानी भारत के प्रसिद्ध सामरिक मामलों, विदेश नीति, भू-राजनीति और जल सुरक्षा विशेषज्ञ हैं। वे एक लेखक, स्तंभकार तथा नीति विश्लेषक के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। उनका जन्म भारत में हुआ और उन्होंने लंबे समय से वैश्विक राजनीति, भारत-चीन संबंध, एशियाई सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसे विषयों पर शोध और लेखन किया है। ब्रह्म चेलानी अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख लिखते हैं। उनके विचार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा विवाद, आतंकवाद, जल संसाधनों और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहते हैं। उन्होंने एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और भारत की विदेश नीति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई है। वे लंबे समय तक  से जुड़े रहे हैं और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्याख्यान दे चुके हैं। उनके लेख विश्व की प्रमुख समाचार संस्थाओं में प्रकाशित होते हैं और नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं तथा विद्यार्थियों द्वारा व्यापक रूप से पढ़े जाते हैं। ब्रह्म चेलानी ...

A HISTORY OF HINDU CHEMISTRY

हिंदू रसायन का इतिहास (A History of Hindu Chemistry) हिंदू रसायन का इतिहास भारतीय विज्ञान के विकास की एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक और इतिहासकार  ने अंग्रेज़ी में A History of Hindu Chemistry नाम से लिखा था। यह पुस्तक दो खंडों में प्रकाशित हुई और इसमें प्राचीन भारत में रसायन विज्ञान के विकास, सिद्धांतों तथा उपलब्धियों का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस ग्रंथ में लेखक ने वैदिक काल, आयुर्वेद, बौद्ध काल तथा मध्यकालीन भारत में रसायन विज्ञान के विकास का अध्ययन प्रस्तुत किया है। पुस्तक में बताया गया है कि प्राचीन भारतीय विद्वानों ने धातुओं के शोधन, मिश्रधातु निर्माण, औषधि निर्माण, खनिजों के उपयोग तथा पारे (मरकरी) पर अनेक प्रयोग किए थे। चरक, सुश्रुत और नागार्जुन जैसे विद्वानों के योगदान का भी विस्तार से उल्लेख मिलता है। आचार्य राय ने संस्कृत ग्रंथों, आयुर्वेदिक साहित्य और प्राचीन पांडुलिपियों के आधार पर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि भारत में रसायन विज्ञान की समृद्ध परंपरा थी। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय रसायन का मुख्य उद्देश्य केवल धातुओं को सोने में बदलना नहीं था, बल्...

PRAFFUL CHANDRA ROY

 प्रीफुल चंद्र राय (1861–1944) भारत के महान वैज्ञानिक, रसायनशास्त्री, शिक्षक, उद्योगपति और समाजसेवी थे। उनका जन्म 2 अगस्त 1861 को तत्कालीन बंगाल (अब बांग्लादेश) के खुलना जिले के रारुली-काटीपारा गाँव में हुआ था। उन्हें भारत में आधुनिक रसायन विज्ञान का अग्रदूत तथा भारतीय रासायनिक उद्योग का जनक माना जाता है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में प्राप्त की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए स्कॉटलैंड के University of Edinburgh गए। वहाँ से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद वे भारत लौटे और Presidency College, कोलकाता में रसायन विज्ञान के प्राध्यापक बने। उन्होंने अपने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान के लिए प्रेरित किया। प्रफुल्ल चंद्र राय ने 1901 में Bengal Chemical & Pharmaceutical Works की स्थापना की, जो भारत की पहली स्वदेशी रासायनिक और औषधि निर्माण कंपनियों में से एक थी। उनका उद्देश्य भारत को वैज्ञानिक और औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था। वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उन्होंने पारा (मरकरी) के यौगिकों पर महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी खोजों को अ...

ASHUTOSH RANKA

आशुतोष रांका आशुतोष रांका एक भारतीय सार्वजनिक नीति (Public Policy) विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार से जुड़े युवा नेता हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की तथा बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से उच्च शिक्षा प्राप्त की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी कार्य किया, लेकिन बाद में सार्वजनिक जीवन और सामाजिक मुद्दों पर काम करने का निर्णय लिया। आशुतोष रांका शिक्षा सुधार, युवाओं के अधिकार, सुशासन और नीति निर्माण जैसे विषयों पर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने विभिन्न सामाजिक अभियानों में भाग लिया और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की आवश्यकता पर लगातार अपने विचार रखे हैं। हाल के वर्षों में वे परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर हुए आंदोलनों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। वे लेखन और जनसंचार के माध्यम से भी सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा करते हैं। उनका मानना है कि देश के विकास में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, ईमानदार प्रशासन और युवाओं की सक्रिय भागीद...