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PHEWA LAKE

फेवा झील नेपाल के सुंदर शहर Pokhara में स्थित एक प्रसिद्ध प्राकृतिक झील है। यह झील अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला की गोद में बसी हुई है और अपने शांत, स्वच्छ जल तथा मनमोहक दृश्य के लिए जानी जाती है। यह नेपाल की दूसरी सबसे बड़ी झील मानी जाती है। झील का वातावरण अत्यंत शांत और आकर्षक है, जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। फेवा झील की सबसे खास बात यह है कि इसके बीचों-बीच Tal Barahi Temple स्थित है। यह मंदिर देवी बराही को समर्पित है और श्रद्धालु नाव द्वारा यहाँ पहुँचते हैं। झील में रंग-बिरंगी नावों की सवारी करना यहाँ का मुख्य आकर्षण है। पर्यटक नाव में बैठकर आसपास के सुंदर पहाड़ों और हरियाली का आनंद लेते हैं। साफ मौसम में झील के जल में अन्नपूर्णा और माछापुच्छ्रे पर्वत का प्रतिबिंब दिखाई देता है, जो दृश्य को और भी अद्भुत बना देता है। फेवा झील के आसपास कई होटल, रेस्टोरेंट और बाजार स्थित हैं, जहाँ स्थानीय हस्तशिल्प वस्तुएँ और नेपाली भोजन मिलते हैं। सुबह और शाम के समय झील का वातावरण बहुत ही मनोहारी होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय झील का दृश्य अत्यंत रमणीय दिखाई देता है। पर्यटन की दृष्टि से फेवा झ...

PADMSRI T T JAGANATTAN

 पद्मश्री से सम्मानित टी. टी. जगन्नाथन (T. T. Jagannathan)  🏆 टी. टी. जगन्नाथन — संक्षिप्त परिचय टी. टी. जगन्नाथन भारतीय उद्योग जगत के एक प्रतिष्ठित उद्यमी और टीटीके प्रेस्टीज (TTK Prestige) समूह के प्रमुख चेयरमैन एमेरिटस थे। उन्हें 2026 में मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार उन्हें व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए दिया गया।  👴 जन्म, शिक्षा और प्रारंभिक जीवन जगन्नाथन का जन्म लगभग 1948/1949 के दशक में हुआ माना जाता है (सटीक जन्म तिथि सार्वजनिक स्रोतों में नहीं मिली) और उन्होंने आईआईटी मद्रास से स्वर्ण पदक (Gold Medal) के साथ इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की।  इसके बाद उन्होंने यूएसए की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से PhD (ऑपरेशन्स रिसर्च) भी की।  💼 व्यवसाय और करियर 🎯 TTK Prestige समूह उद्योग जगत में उनका प्रमुख योगदान रहा। जगन्नाथन 1975 में प्रबंध निदेशक (Managing Director) के रूप में TTK Prestige के बोर्ड से जुड़े।  उन्होंने कंपनी को दीवालियेपन के संकट से निकालकर एक...

PADAMSRI SHYAM SUNDAR

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  Padma Shri से सम्मानित डॉ. श्याम सुंदर (Professor Shyam Sundar Agrawal)  🌟 डॉ. श्याम सुंदर (Professor Shyam Sundar Agrawal) – जीवनी (Biography in Hindi) 👤 परिचय डॉ. श्याम सुंदर अग्रवाल एक प्रसिद्ध भारतीय चिकित्सक और शोधकर्ता हैं, जो Banaras Hindu University (BHU) के Institute of Medical Sciences (IMS) में प्रोफेसर रहे हैं। उन्हें 2026 के पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया गया है।  🏆 पद्म श्री सम्मान 2026 भारत सरकार ने पद्म श्री 2026 के लिए डॉ. श्याम सुंदर का नाम घोषित किया है, जो रिपब्लिक डे 2026 के अवसर पर दिया जा रहा है। � 💡 शिक्षा और करियर श्याम सुंदर एक अनुभवी मेडिकल विशेषज्ञ और संक्रमण रोगों (Infectious Diseases) पर शोधकर्ता हैं, विशेषकर ** visceral leishmaniasis (काला-आज़ार)** और इससे जुड़े उपचारों पर काम करते हैं।  📌 प्रमुख योगदान (Contributions) 🧪 काला-आज़ार (Kala-azar) उपचार में क्रांतिकारी शोध डॉ. श्याम सुंदर ने काला-आज़ार (जो भारत के कई गरीब क्षेत्रों में एक घातक बीमारी रही है) के निदान और उपचार में महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाले शोध किए हैं। उनके योगदा...

PADMSRI NARESH CHANDRA DEV VERMA

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  नरेश चंद्र देव वर्मा (Naresh Chandra Dev Varma / Debbarma)  🏆 पद्म श्री सम्मान – 2026 नरेश चंद्र देव वर्मा को भारत सरकार द्वारा 2026 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह पुरस्कार उन्हें साहित्य और शिक्षा (Literature & Education) के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया।  उन्होंने इस सम्मान के बारे में कहा कि यह पुरस्कार उनके व्यक्तिगत कार्य का नहीं बल्कि “कोकबोरोक भाषा और उसके साहित्य” की मान्यता है।  त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक साहा ने भी उन्हें पद्म श्री मिलने पर दिल से बधाई दी है और कहा कि यह सम्मान त्रिपुरा सरकार की ओर से दिया गया त्रिपुरा भूषण पुरस्कार (2024) के बाद उनके उत्कृष्ट कार्य का राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार है।  📜 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा जन्म: 31 अक्टूबर 1944 को त्रिपुरा (तब ब्रिटिश भारत का हिस्सा) में हुआ।  पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता का नाम मदन मोहन देव वर्मा और माता का नाम संभु लक्ष्मी देव वर्मा था।  उन्होंने अपने शुरुआती जीवन में शिक्षा प्राप्त की और क्ला...

ARTICLE 142 OF INDIAN CONSTITUTION

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 (Article 142)  अनुच्छेद 142 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो सुप्रीम कोर्ट (उच्चतम न्यायालय) को विशेष अधिकार प्रदान करता है। इस अनुच्छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति दी गई है कि वह “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या निर्देश जारी कर सकता है। 🔹 अनुच्छेद 142(1) क्या कहता है? अनुच्छेद 142(1) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट किसी भी मामले में, जो उसके समक्ष लंबित हो, ऐसा कोई भी आदेश या डिक्री पारित कर सकता है जो पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक हो। ऐसे आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं। अर्थात, यदि किसी मामले में मौजूदा कानून पर्याप्त समाधान नहीं दे पा रहा हो, तो सुप्रीम कोर्ट अपने विशेष अधिकार का उपयोग करके न्याय सुनिश्चित कर सकता है। 🔹 अनुच्छेद 142(2) इसके तहत सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति है कि वह किसी व्यक्ति को उपस्थित होने, दस्तावेज प्रस्तुत करने या न्यायालय की अवमानना से संबंधित आदेश जारी कर सकता है। ✦ अनुच्छेद 142 की विशेषताएँ यह शक्ति केवल सुप्रीम कोर्ट को प्राप्त है। इसका उद्देश्य तकनीकी बाधाओं से ऊपर उठकर...

PADMSRI SATYANARAYAN NUWAL

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  पद्मश्री प्राप्त सत्यनारायण नुवाल (Satyanarayan Nuwal)  ⭐ सत्यनारायण नुवाल — संक्षेप जीवनी सत्यनारायण नुवाल एक भारतीय उद्योगपति, आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के अग्रणी और Solar Industries India Ltd. के संस्थापक-अध्यक्ष हैं। उन्हें 26 जनवरी 2026 को पद्मश्री पुरस्कार (व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में) से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।  👶 प्रारंभिक जीवन और संघर्ष सत्यनारायण नुवाल का जन्म राजस्थान के भिलवाड़ा जिले में मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने औपचारिक शिक्षा केवल दहावी (10वीं कक्षा) तक ही प्राप्त की, और फिर संघर्षशील जीवन की ओर बढ़े। शुरुआती दिनों में आर्थिक कठिनाइयों के कारण वे रेलवे प्लेटफॉर्म पर रातें बिताते थे।  📈 उद्यमिता और Solar Industries का निर्माण 1995 में नुवाल ने Solar Industries India Ltd. की स्थापना की, जो शुरुआत में केवल औद्योगिक विस्फोटक (explosives) का व्यापार करती थी। समय के साथ, कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार कर डिफेंस और रक्षा निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज Solar Group की उत्पाद श्रृंखला मे...

KOKBOROK

 कोकबोरोक (Kokborok) त्रिपुरा राज्य की प्रमुख जनजातीय भाषा है, जिसे मुख्य रूप से त्रिपुरी या देबबर्मा समुदाय द्वारा बोला जाता है। “कोक” का अर्थ है “भाषा” और “बोरोक” का अर्थ है “लोग”, इसलिए कोकबोरोक का शाब्दिक अर्थ हुआ “लोगों की भाषा”। यह भाषा तिब्बती-बर्मी (Tibeto-Burman) भाषा परिवार से संबंधित है और पूर्वोत्तर भारत की महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है। कोकबोरोक को त्रिपुरा में आधिकारिक मान्यता प्राप्त है और इसे राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। यह भाषा केवल भारत के त्रिपुरा राज्य में ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी बोली जाती है। समय के साथ इसके संरक्षण और विकास के लिए कई प्रयास किए गए हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में कोकबोरोक की पढ़ाई की व्यवस्था की गई है, जिससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़ी रह सके। कोकबोरोक भाषा की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा है। लोकगीत, लोककथाएँ, नृत्य और पारंपरिक त्योहार इस भाषा की पहचान को मजबूत बनाते हैं। आधुनिक समय में कई लेखकों और साहित्यकारों ने कोकबोरोक में कविताएँ, कहानियाँ और नाटक लिखकर इसे सम...