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PARSLEY

पार्सले (Parsley) एक हरी पत्तेदार सुगंधित जड़ी-बूटी है, जिसका वैज्ञानिक नाम पेट्रोसेलिनम क्रिस्पम (Petroselinum crispum) है। यह मुख्य रूप से भूमध्यसागरीय क्षेत्र में उत्पन्न हुई, लेकिन आज पूरे विश्व में इसका उपयोग किया जाता है। पार्सले का प्रयोग भोजन में स्वाद बढ़ाने, सजावट करने और औषधीय गुणों के लिए किया जाता है। पार्सले के दो प्रमुख प्रकार होते हैं – कर्ली पार्सले और फ्लैट-लीफ पार्सले। कर्ली पार्सले की पत्तियाँ घुंघराली होती हैं और इसे अक्सर व्यंजनों की सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। फ्लैट-लीफ पार्सले की पत्तियाँ सीधी होती हैं और इसका स्वाद अधिक तीखा व सुगंधित होता है, इसलिए इसे पकवानों में मिलाया जाता है। पार्सले पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन A, C और K प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में सहायक होता है। पार्सले पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, हड्डियों को स्वस्थ रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इसमें आयरन और फोलेट भी पाया जाता है, जो रक्त के लिए लाभकारी होते हैं। रसोई में पार्सले का उपय...

CHAURAGARH MAHADEV TEMPLE

चौरागढ़ महादेव मंदिर मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में स्थित एक प्रसिद्ध और पवित्र तीर्थस्थल है। यह मंदिर सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला की ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है और समुद्र तल से लगभग 1,300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। चौरागढ़ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1,300 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यह यात्रा थोड़ी कठिन जरूर होती है, लेकिन रास्ते में प्राकृतिक सौंदर्य और हरियाली मन को प्रसन्न कर देती है। ऊपर पहुँचकर चारों ओर फैले पहाड़ों और घाटियों का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। यही कारण है कि यह स्थान धार्मिक होने के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चौरागढ़ महादेव मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में छोटे-बड़े त्रिशूल दिखाई देते हैं, जो भक्तों की आस्था का प्रतीक हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। इस दिन का वातावरण अत्यंत भक्तिमय और उत्सा...

BAMCEF

बामसेफ (BAMCEF – ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटीज कम्युनिटीज एम्प्लॉइज फेडरेशन) भारत का एक प्रमुख सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना 6 दिसंबर 1978 को कांशीराम ने की थी। बामसेफ का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षित कर्मचारियों को संगठित कर सामाजिक न्याय, समानता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करना था। यह संगठन “पे-बैक टू सोसाइटी” की अवधारणा पर आधारित है, जिसके अनुसार समाज से लाभ पाने वाले शिक्षित वर्ग का दायित्व है कि वे अपने समाज के उत्थान के लिए कार्य करें। बामसेफ का मुख्य कार्यक्षेत्र सामाजिक चेतना का निर्माण, वैचारिक प्रशिक्षण, संगठनात्मक मजबूती और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना है। यह संगठन राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक वैचारिक और सामाजिक मंच है, जिसने आगे चलकर डीएस-4 और बहुजन समाज पार्टी जैसे आंदोलनों के लिए वैचारिक आधार तैयार किया। बामसेफ का मानना है कि जब तक वंचित वर्गों में शिक्षा, संगठन और संघर्ष की भावना विकसित नहीं होगी, तब तक सामाजिक बदलाव संभव नहीं है। यह संगठन देशभर में सेमिनार, अध्ययन शिविर, गोष्ठियाँ और ...

VAIBHAV SURYAVANSHI

⭐ वैभव सूर्यवंशी — एक युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी एक भारतीय क्रिकेटर हैं, जो अब लगभग 14 वर्ष के हैं और क्रिकेट में रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन के लिए दुनिया भर में चर्चित हैं।  📌 प्रारंभिक जीवन और परिचय वैभव का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ माना जाता है, और वे बिहार से हैं।  उन्होंने बहुत कम उम्र में ही क्रिकेट में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी।  🏏 करियर की शुरुआत और रिकॉर्ड 🔸 घरेलू करियर उन्होंने 12 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी (फर्स्ट-क्लास) में बिहार के लिए पदार्पण किया, यह भारत में क्रिकेट का सबसे कम उम्र का रिकॉर्ड है।  इसके बाद लिस्ट-ए क्रिकेट में भी 13 साल की उम्र में प्रदर्शन किया।  🔸 IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) नवंबर 2024 में राजस्थान रॉयल्स ने वैभव को ₹1.1 करोड़ में खरीदा, वह IPL में सबसे युवा खिलाड़ी बन गए।  19 अप्रैल 2025 को उन्होंने IPL में डेब्यू किया और अपने पहले ही मैच में छक्का लगाया।  28 अप्रैल 2025 को उन्होंने 35 गेंदों में शतक लगाया, जो IPL में सबसे तेज भारतीय शतक है और वह सबसे युवा शतकवीर भी बने।  🏆 अंतरराष्ट्रीय और यू-19 प्रदर...

KARERI LAKE

करैरी झील हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित एक सुंदर और प्रसिद्ध पर्वतीय झील है। यह झील धौलाधार पर्वत श्रृंखला की गोद में लगभग 2,934 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थान पर्यटकों और ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। करैरी झील का पानी अत्यंत स्वच्छ और पारदर्शी है। इसमें आसपास के पहाड़ों और आकाश का प्रतिबिंब साफ दिखाई देता है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देता है। यह झील मुख्य रूप से बर्फ के पिघलने से बनती है, इसलिए इसका पानी ठंडा और निर्मल रहता है। सर्दियों में यह झील पूरी तरह बर्फ से ढक जाती है, जिससे इसका दृश्य और भी मनमोहक हो जाता है। करैरी झील तक पहुँचने के लिए करैरी गाँव से लगभग 13 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है। यह ट्रेक हरे-भरे जंगलों, छोटे-छोटे झरनों और पत्थरीले रास्तों से होकर गुजरता है। रास्ते में प्रकृति के सुंदर दृश्य देखने को मिलते हैं, जो यात्रा को रोमांचक बना देते हैं। झील के पास एक छोटा सा शिव मंदिर भी स्थित है, जिसे स्थानीय लोग पवित्र मानते हैं। कई श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। करैरी झील प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और साहस...

DR LAXMAN YADAV

📌 डॉ. लक्ष्मण यादव — परिचय डॉ. लक्ष्मण यादव एक भारतीय शिक्षाविद्, लेखक और सार्वजनिक बहसों में सक्रिय विचारक हैं। वे मुख्य रूप से शिक्षा, सामाजिक न्याय, आरक्षण और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर अपने विचारों के लिए जाने जाते हैं।  🎓 शिक्षा और पेशा लक्ष्मण यादव लंबे समय तक दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के जाकिर हुसैन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर (एड-हॉक) के रूप में पढ़ाते रहे।  वे हिंदी भाषा और उच्च शिक्षा के मुद्दों पर शिक्षण और शोध से जुड़े रहे हैं।  📘 ‘प्रोफेसर की डायरी’ (Professor Ki Diary) उन्होंने अपनी किताब “Professor Ki Diary” लिखी है, जिसमें उन्होंने भारतीय उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालय प्रणाली, भेदभाव और प्रशासनिक चुनौतियों का अनुभव साझा किया है।  यह किताब चर्चित रही है और इसे बेस्ट-सेलर माना गया है। ⚖️ नौकरी और विवाद लगभग 14 वर्षों तक पढ़ाने के बाद उन्हें अचानक दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने पद से हटा दिया — इसे लेकर उन्होंने भेदभाव और सिस्टम की कमियों पर सवाल उठाए हैं।  इस निर्णय के बाद वे सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर शिक्षा नीति, ...

CHAMBYALI DHAM

चंब्याली धाम हिमाचल प्रदेश के चंबा क्षेत्र की एक प्रसिद्ध पारंपरिक दावत है। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति और अतिथि सत्कार की पहचान है। चंब्याली धाम विशेष रूप से विवाह, त्योहारों, धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य शुभ अवसरों पर आयोजित की जाती है। इसमें परोसे जाने वाले व्यंजन शुद्ध शाकाहारी होते हैं और इन्हें पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है। चंब्याली धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने का कार्य विशेष रसोइये, जिन्हें “बोटिया” कहा जाता है, करते हैं। वे पीढ़ियों से इस कला को सीखते और आगे बढ़ाते आए हैं। भोजन आमतौर पर पत्तल (पत्तों से बनी थाली) में परोसा जाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश मिलता है। इस धाम में चावल मुख्य भोजन होता है। इसके साथ राजमा मद्रा, कढ़ी, माश दाल, चना मद्रा, मीठा चावल और घी से बने अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इन व्यंजनों में देशी मसालों और दही का विशेष प्रयोग होता है, जिससे स्वाद अनोखा और पौष्टिक बनता है। भोजन परोसने का भी एक निश्चित क्रम होता है, जिसे परंपरा के अनुसार निभाया जाता है। चंब्याली धाम केवल स्वाद के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, ...