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DENMARK STRAIT WATERFALL

डेनमार्क स्ट्रेट जलप्रपात विश्व का सबसे बड़ा और गहरा जलप्रपात माना जाता है, जो समुद्र के नीचे स्थित है। यह जलप्रपात ग्रीनलैंड और आइसलैंड के बीच स्थित डेनमार्क स्ट्रेट नामक जलडमरूमध्य में पाया जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह धरती की सतह पर नहीं, बल्कि महासागर की गहराई में बहता है, इसलिए इसे “अंडरवॉटर वाटरफॉल” कहा जाता है। यह जलप्रपात लगभग 3,500 मीटर (लगभग 11,500 फीट) की गहराई तक गिरता है, जो इसे विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात बनाता है। इसकी चौड़ाई भी लगभग 480 किलोमीटर तक फैली हुई है। इसकी तुलना में प्रसिद्ध एंजेल फॉल्स भी इसकी ऊँचाई के सामने बहुत छोटा है। डेनमार्क स्ट्रेट जलप्रपात का निर्माण ठंडे और गर्म समुद्री जल के तापमान तथा घनत्व के अंतर के कारण होता है। ग्रीनलैंड की ओर से आने वाला अत्यंत ठंडा और घना जल नीचे की ओर तेजी से बहता है, जबकि आइसलैंड की ओर से अपेक्षाकृत गर्म और हल्का जल ऊपर रहता है। इसी घनत्व के अंतर से यह विशाल जलप्रपात बनता है। यह जलप्रपात महासागरीय धाराओं और वैश्विक जलवायु प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह समुद्र के जल के प्रवाह को नियंत्रित करने में सहायक है ...

NAMIB DESERT

नामीब मरुस्थल विश्व के सबसे प्राचीन मरुस्थलों में से एक माना जाता है। यह दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका में अटलांटिक महासागर के तट के साथ फैला हुआ है और मुख्य रूप से नामीबिया देश में स्थित है। “नामीब” शब्द का अर्थ स्थानीय भाषा में “विशाल स्थान” होता है, जो इस रेगिस्तान के विस्तृत और खुले क्षेत्र को दर्शाता है। यह मरुस्थल लगभग 2000 किलोमीटर लंबा है और इसकी चौड़ाई 50 से 160 किलोमीटर तक है। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता ऊँचे-ऊँचे लाल रेत के टीले हैं, जो दुनिया के सबसे ऊँचे रेत के टीलों में गिने जाते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इन टीलों का रंग गहरा लाल और नारंगी दिखाई देता है, जो अत्यंत मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है। सोसुस्व्लेई नामक स्थान यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जहाँ सफेद नमक की झीलें और लाल रेत के टीले एक साथ दिखाई देते हैं। नामीब मरुस्थल का मौसम अत्यंत शुष्क है और वर्षा बहुत कम होती है। फिर भी यहाँ कई प्रकार के जीव-जंतु और पौधे पाए जाते हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लिया है। यहाँ ओरिक्स, रेगिस्तानी हाथी और विभिन्न प्रकार के सरीसृप पाए जाते हैं। विशेष रूप से डेडव्ले...

RUGEN ISLAND

र्यूगेन द्वीप जर्मनी का सबसे बड़ा द्वीप है, जो बाल्टिक सागर में स्थित है। यह जर्मनी के मेक्लेनबर्ग-वोर्पोमेर्न राज्य का भाग है और अपने प्राकृतिक सौंदर्य, समुद्री तटों तथा ऐतिहासिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यह द्वीप मुख्य भूमि से पुल द्वारा जुड़ा हुआ है, जिससे यहाँ पहुँचना आसान है। र्यूगेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सफेद चूना-पत्थर की चट्टानें हैं, जिन्हें “चॉक क्लिफ्स” कहा जाता है। ये चट्टानें विशेष रूप से जास्मुंड राष्ट्रीय उद्यान में स्थित हैं और पर्यटकों को अत्यंत आकर्षित करती हैं। यहाँ का प्राकृतिक दृश्य इतना सुंदर है कि कई चित्रकारों और लेखकों ने इसे अपनी कृतियों में स्थान दिया है। प्रसिद्ध चित्रकार कैस्पर डेविड फ्रेडरिक ने भी इन चट्टानों का चित्रण किया था। द्वीप पर लंबे रेतीले समुद्र तट, घने जंगल और शांत गाँव देखने को मिलते हैं। गर्मियों में यहाँ पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है, क्योंकि लोग समुद्र तट पर विश्राम करने और जल क्रीड़ाओं का आनंद लेने आते हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ ऐतिहासिक इमारतें, लाइटहाउस और पुराने रिसॉर्ट नगर भी हैं, जो इसकी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं। र्यूगेन द्व...

LAVASA

लवासा महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले में स्थित एक सुंदर और नियोजित (प्लांड) पहाड़ी नगर है। यह सह्याद्रि पर्वतमाला की हरियाली से घिरा हुआ है और वारसगाँव झील के किनारे बसा है। लवासा को आधुनिक सुविधाओं और प्राकृतिक सौंदर्य के अनोखे संगम के रूप में विकसित किया गया था। इसकी बनावट इटली के छोटे शहरों की शैली से प्रेरित मानी जाती है, इसलिए यहाँ की इमारतें रंग-बिरंगी और आकर्षक दिखाई देती हैं। लवासा समुद्र तल से लगभग 2000 से 3000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है, जिससे यहाँ का मौसम अधिकतर सुहावना रहता है। वर्षा ऋतु में यहाँ की पहाड़ियाँ और झीलें विशेष रूप से मनमोहक लगती हैं। पर्यटक यहाँ नौकायन, साइक्लिंग, ट्रेकिंग और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने आते हैं। झील के किनारे टहलना और सूर्यास्त देखना यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। यह स्थान पुणे से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए सप्ताहांत में यहाँ काफी पर्यटक आते हैं। लवासा में होटल, रेस्तरां, कैफे और मनोरंजन की अन्य सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जिससे यह परिवारों और युवाओं के लिए एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है। हालाँकि, लवासा परियोजना को लेकर पर्यावरणीय मुद्दों औ...

PADMSRI TECHI GOBIN

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  🌟 पद्मश्री विजेता – Techi Gubin की जीवनी  🏆 1. नाम और पुरस्कार टेची गोबिन (Techi Gubin) को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है — यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, खासकर सामाजिक सेवा क्षेत्र में उनके वर्षों के समर्पित काम के लिए।  👤 जन्म और शुरुआती जीवन Techi Gubin का जन्म अरुणाचल प्रदेश के Kebi गांव (Shi-Yomi जिला) में हुआ था। उनका जन्म वर्ष 1964 (लगभग) के आसपास माना जाता है, जिससे वे 62 वर्ष के हैं।  बचपन से ही वे समाज सेवा और लोगों की मदद में लगे रहे।  🏛️ सरकारी करियर उन्होंने अरुणाचल प्रदेश सरकार में चीफ आर्किटेक्ट और बाद में डायरेक्टर ऑफ हाउसिंग के रूप में काम किया।  2024 में उन्होंने सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति ली।  ❤️‍🩹 सामाजिक और समाजसेवी भूमिका Techi Gubin Arunachal Vikas Parishad के अध्यक्ष हैं — यह एक सामाजिक संगठन है जो शिक्षा, स्वास्थ्य और समुदाय कल्याण से जुड़ी गतिविधियों में काम करता है।  वे Akhil Bharatiya Vanvasi Kalyan Ashram के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं, जो आदिवासी समुदायों के उत्थान ...

MPONENG GOLD MINES. S AFRICA

Mponeng Gold Mine एम्पोनेंग गोल्ड माइन विश्व की सबसे गहरी सोने की खदानों में से एक है। यह खदान दक्षिण अफ्रीका के गौतेंग प्रांत में कार्लेटनविल के पास स्थित है। “Mponeng” शब्द का अर्थ स्थानीय भाषा में “मुझे देखो” होता है। यह खदान अपनी अत्यधिक गहराई और आधुनिक तकनीक के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसकी गहराई लगभग 4 किलोमीटर (करीब 13,000 फीट) तक पहुंचती है, जिससे यह पृथ्वी की सतह के नीचे संचालित सबसे गहरी खदानों में गिनी जाती है। इस खदान का संचालन पहले एंग्लो गोल्ड अशांति कंपनी द्वारा किया जाता था, लेकिन बाद में इसे हार्मनी गोल्ड माइनिंग कंपनी ने अधिग्रहित कर लिया। इतनी अधिक गहराई पर काम करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि वहां का तापमान बहुत अधिक रहता है। जमीन के नीचे तापमान 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, इसलिए खदान में विशेष शीतलन (कूलिंग) प्रणाली लगाई गई है ताकि मजदूर सुरक्षित रूप से काम कर सकें। एम्पोनेंग गोल्ड माइन से हर वर्ष बड़ी मात्रा में सोना निकाला जाता है, जो दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह खदान हजारों लोगों को रोजगार भी प्रदान करती है...

PADMSRI SANGYSANG S PONGENER

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  Sangyusang S Pongener  🎖️ पद्मश्री सम्मान 2026 — संक्षेप नाम: संग्युसांग एस. पोंगेनर सम्मान: पद्मश्री 2026 (भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) क्षेत्र: कला (Folk art / लोक कला) कारण: Ao नागा लोक कला और सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण, प्रचार और शिक्षा में जीवन भर योगदान के लिए मान्यता।  🧑‍🎨 जीवन परिचय 📌 प्रारंभिक जीवन संग्युसांग का जन्म 1945 में नागालैंड के मोकोकचुंग जिले के उंगमा गांव में हुआ था।  वे आओ (Ao) नागा समुदाय से हैं, जो अपने समृद्ध लोक संगीत, नृत्य और कथाओं के लिए प्रसिद्ध है।  👨‍👩‍👧‍👦 पारिवारिक जीवन वे अपने माता-पिता चुटिसांग और केडिमेनला के सबसे बड़े बेटे हैं और परिवार में कुल आठ भाई-बहन हैं। संग्युसांग के पास पाँच संतान और आठ पोते-पोतियाँ हैं।  🎭 कला, संस्कृति और योगदान 🎶 लोक कला में रुझान उन्होंने लगभग 60 वर्ष से अधिक समय तक Ao नागा लोक गीतों, नृत्यों, कथाओं और परंपराओं का अध्ययन, संरक्षण और प्रचार किया है।  युवाओं को पारंपरिक कलाओं की शिक्षा और प्रशिक्षण देने के लिए उन्होंने कई मंचों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया ह...