Posts

RIVER MANDAKINI

मंदाकिनी नदी  भारत की एक पवित्र और ऐतिहासिक नदी है। इसकी पहचान मुख्य रूप से दो स्थानों से जुड़ी है। पहली मंदाकिनी उत्तराखंड में बहती है, जिसका उद्गम केदारनाथ के निकट चोराबाड़ी हिमनद (गांधी सरोवर) से माना जाता है। यह नदी रुद्रप्रयाग में  से मिलती है। दूसरी मंदाकिनी उत्तर प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में बहती है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है और जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है। उत्तराखंड की मंदाकिनी नदी लगभग 80 किलोमीटर की यात्रा करते हुए हिमालय की सुंदर घाटियों से गुजरती है। इसके तट पर  स्थित है, जो भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पवित्र धाम के दर्शन के लिए आते हैं। वर्ष 2013 की विनाशकारी आपदा में मंदाकिनी नदी ने भीषण बाढ़ का रूप धारण किया था, जिससे केदारनाथ क्षेत्र में भारी क्षति हुई थी। चित्रकूट की मंदाकिनी नदी का संबंध भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास काल से माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने चित्रकूट में इसी नदी के तट पर समय व्यतीत किया था। इसलिए यह नदी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। इ...

PANDAV VAN CHITRAKOOT

 चित्रकूट का पांडव वन  चित्रकूट का पांडव वन एक प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल माना जाता है, जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित पवित्र चित्रकूट क्षेत्र में आता है। यह स्थान महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। जनश्रुतियों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय इस वन में निवास किया था, इसलिए इसका नाम पांडव वन पड़ा। पांडव वन प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहाँ घने वृक्ष, शांत वातावरण और हरियाली मन को शांति प्रदान करती है। यह स्थान आध्यात्मिक साधना, ध्यान और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। वन के भीतर कई प्राचीन गुफाएँ और चट्टानी संरचनाएँ भी दिखाई देती हैं, जिन्हें पांडवों के निवास और तपस्थली से जोड़कर देखा जाता है। चित्रकूट स्वयं भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ा हुआ पवित्र क्षेत्र है। इसी कारण पांडव वन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। श्रद्धालु यहाँ आकर पूजा-अर्चना करते हैं तथा महाभारत और रामायण से संबंधित कथाओं का स्मरण करते हैं। स्थानीय संत और पुरोहित इस स्थान की प्राचीनता और धार्मिक परंपराओ...

BRAHM CHELANI

ब्रह्म चेलानी ब्रह्म चेलानी भारत के प्रसिद्ध सामरिक मामलों, विदेश नीति, भू-राजनीति और जल सुरक्षा विशेषज्ञ हैं। वे एक लेखक, स्तंभकार तथा नीति विश्लेषक के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं। उनका जन्म भारत में हुआ और उन्होंने लंबे समय से वैश्विक राजनीति, भारत-चीन संबंध, एशियाई सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसे विषयों पर शोध और लेखन किया है। ब्रह्म चेलानी अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख लिखते हैं। उनके विचार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा विवाद, आतंकवाद, जल संसाधनों और वैश्विक शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहते हैं। उन्होंने एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और भारत की विदेश नीति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना की गई है। वे लंबे समय तक  से जुड़े रहे हैं और विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्याख्यान दे चुके हैं। उनके लेख विश्व की प्रमुख समाचार संस्थाओं में प्रकाशित होते हैं और नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं तथा विद्यार्थियों द्वारा व्यापक रूप से पढ़े जाते हैं। ब्रह्म चेलानी ...

A HISTORY OF HINDU CHEMISTRY

हिंदू रसायन का इतिहास (A History of Hindu Chemistry) हिंदू रसायन का इतिहास भारतीय विज्ञान के विकास की एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक और इतिहासकार  ने अंग्रेज़ी में A History of Hindu Chemistry नाम से लिखा था। यह पुस्तक दो खंडों में प्रकाशित हुई और इसमें प्राचीन भारत में रसायन विज्ञान के विकास, सिद्धांतों तथा उपलब्धियों का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस ग्रंथ में लेखक ने वैदिक काल, आयुर्वेद, बौद्ध काल तथा मध्यकालीन भारत में रसायन विज्ञान के विकास का अध्ययन प्रस्तुत किया है। पुस्तक में बताया गया है कि प्राचीन भारतीय विद्वानों ने धातुओं के शोधन, मिश्रधातु निर्माण, औषधि निर्माण, खनिजों के उपयोग तथा पारे (मरकरी) पर अनेक प्रयोग किए थे। चरक, सुश्रुत और नागार्जुन जैसे विद्वानों के योगदान का भी विस्तार से उल्लेख मिलता है। आचार्य राय ने संस्कृत ग्रंथों, आयुर्वेदिक साहित्य और प्राचीन पांडुलिपियों के आधार पर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि भारत में रसायन विज्ञान की समृद्ध परंपरा थी। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय रसायन का मुख्य उद्देश्य केवल धातुओं को सोने में बदलना नहीं था, बल्...

PRAFFUL CHANDRA ROY

 प्रीफुल चंद्र राय (1861–1944) भारत के महान वैज्ञानिक, रसायनशास्त्री, शिक्षक, उद्योगपति और समाजसेवी थे। उनका जन्म 2 अगस्त 1861 को तत्कालीन बंगाल (अब बांग्लादेश) के खुलना जिले के रारुली-काटीपारा गाँव में हुआ था। उन्हें भारत में आधुनिक रसायन विज्ञान का अग्रदूत तथा भारतीय रासायनिक उद्योग का जनक माना जाता है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता में प्राप्त की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए स्कॉटलैंड के University of Edinburgh गए। वहाँ से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद वे भारत लौटे और Presidency College, कोलकाता में रसायन विज्ञान के प्राध्यापक बने। उन्होंने अपने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान के लिए प्रेरित किया। प्रफुल्ल चंद्र राय ने 1901 में Bengal Chemical & Pharmaceutical Works की स्थापना की, जो भारत की पहली स्वदेशी रासायनिक और औषधि निर्माण कंपनियों में से एक थी। उनका उद्देश्य भारत को वैज्ञानिक और औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था। वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उन्होंने पारा (मरकरी) के यौगिकों पर महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी खोजों को अ...

ASHUTOSH RANKA

आशुतोष रांका आशुतोष रांका एक भारतीय सार्वजनिक नीति (Public Policy) विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार से जुड़े युवा नेता हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की तथा बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से उच्च शिक्षा प्राप्त की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी कार्य किया, लेकिन बाद में सार्वजनिक जीवन और सामाजिक मुद्दों पर काम करने का निर्णय लिया। आशुतोष रांका शिक्षा सुधार, युवाओं के अधिकार, सुशासन और नीति निर्माण जैसे विषयों पर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने विभिन्न सामाजिक अभियानों में भाग लिया और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की आवश्यकता पर लगातार अपने विचार रखे हैं। हाल के वर्षों में वे परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर हुए आंदोलनों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। वे लेखन और जनसंचार के माध्यम से भी सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा करते हैं। उनका मानना है कि देश के विकास में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, ईमानदार प्रशासन और युवाओं की सक्रिय भागीद...

NEHA BORA

नेहा बोरा  नेहा बोरा एक भारतीय छात्र नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की शोधार्थी हैं। हाल के वर्षों में वे शिक्षा, छात्र अधिकारों तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई हैं। वे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रही हैं और विभिन्न छात्र आंदोलनों में महत्वपूर्ण नेतृत्व करती रही हैं। नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड से संबंध रखती हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय भागीदारी शुरू की और शिक्षा से जुड़े विषयों, सामाजिक न्याय तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में लगातार आवाज उठाई। उनके भाषण, संगठन क्षमता और शांतिपूर्ण आंदोलन की शैली ने उन्हें युवाओं के बीच एक पहचान दिलाई है। वर्ष 2026 में परीक्षा संबंधी मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान नेहा बोरा विशेष रूप से सुर्खियों में रहीं। उन्होंने लंबे समय तक चले अनशन और विभिन्न प्रदर्शनों में भाग लिया, जिसके कारण वे राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर च...

SANTIAGO

सैंटियागो (Santiago) सैंटियागो दक्षिण अमेरिकी देश चिली की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। यह देश का राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र माना जाता है। सैंटियागो चिली के मध्य भाग में मापोचो (Mapocho) नदी के किनारे स्थित है तथा इसके पूर्व में एंडीज़ पर्वतमाला और पश्चिम में तटीय पर्वत श्रृंखला है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और आधुनिक शहरी विकास इसे दक्षिण अमेरिका के प्रमुख महानगरों में स्थान दिलाते हैं। सैंटियागो की स्थापना 12 फरवरी 1541 को स्पेनिश विजेता पेद्रो दे वाल्दिविया ने की थी। समय के साथ यह शहर व्यापार, प्रशासन और उद्योग का प्रमुख केंद्र बन गया। आज यहाँ वित्तीय संस्थान, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कार्यालय, विश्वविद्यालय तथा शोध संस्थान बड़ी संख्या में स्थित हैं। यह शहर आधुनिक परिवहन व्यवस्था के लिए भी प्रसिद्ध है। सैंटियागो मेट्रो दक्षिण अमेरिका की सबसे विकसित और व्यस्त मेट्रो प्रणालियों में से एक है। इसके अतिरिक्त बस सेवा, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तथा उत्कृष्ट सड़क नेटवर्क शहर को देश और दुनिया से जोड़ते हैं। सैंटियागो में अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें प्लाज़ा दे आर्मास, ला मोन...

CHILE

चिली (Chile) चिली दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित एक लंबा और संकरा देश है। इसके पश्चिम में प्रशांत महासागर तथा पूर्व में एंडीज़ पर्वतमाला स्थित है। उत्तर से दक्षिण तक इसकी लंबाई लगभग 4,300 किलोमीटर है, जबकि इसकी औसत चौड़ाई केवल 180 किलोमीटर के आसपास है। इसकी राजधानी सैंटियागो (Santiago) है, जो देश का सबसे बड़ा शहर और आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक केंद्र भी है। चिली का कुल क्षेत्रफल लगभग 7,56,000 वर्ग किलोमीटर है और इसकी जनसंख्या लगभग 2 करोड़ के आसपास है। यहाँ की आधिकारिक भाषा स्पेनिश है तथा मुद्रा चिली पेसो (Chilean Peso) है। चिली एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहाँ राष्ट्रपति शासन प्रणाली लागू है। चिली की प्राकृतिक विविधता इसे विश्व के सबसे अनोखे देशों में शामिल करती है। देश के उत्तरी भाग में विश्व का सबसे शुष्क मरुस्थल अटाकामा मरुस्थल स्थित है, जबकि दक्षिणी भाग में हिमनद, झीलें और घने वन पाए जाते हैं। यहाँ की जलवायु भी क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग है। चिली की अर्थव्यवस्था दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है। यह विश्व का सबसे बड़ा तांबा (Copper) उत्पादक देश ह...

KANISHK NARAYAN

 कनिष्क नारायण  कनिष्क नारायण भारतीय मूल के ब्रिटिश राजनेता हैं, जिन्होंने यूनाइटेड किंगडम (यूके) की राजनीति में अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर विशेष पहचान बनाई है। उनका जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था। बचपन में वे अपने परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए, जहाँ उन्होंने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने प्रतिष्ठित ईटन कॉलेज में अध्ययन किया तथा बाद में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र (PPE) की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से एमबीए भी किया।  कनिष्क नारायण ब्रिटेन की लेबर पार्टी से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2024 में वे वेल्स के वेल ऑफ ग्लैमॉर्गन निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए। राजनीति में आने से पहले उन्होंने आर्थिक नीति, सामाजिक सुधार और सार्वजनिक सेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया। वे शिक्षा और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने वाले कई अभियानों से भी जुड़े रहे।  वर्ष 2025 में उन्हें ब्रिटेन सरकार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और ऑनलाइन सुरक्षा से संबंधित मंत्री बनाया गया। वर्...

ICE STUPA

 आइस स्तूप (Ice Stupa) आइस स्तूप (Ice Stupa) एक कृत्रिम बर्फ का शंकु होता है, जिसे पहाड़ी क्षेत्रों में जल संरक्षण के उद्देश्य से बनाया जाता है। इसका विकास लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर और नवप्रवर्तक सोनम वांगचुक ने किया। इसका मुख्य उद्देश्य सर्दियों में उपलब्ध अतिरिक्त पानी को बर्फ के रूप में संचित करना और गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलाकर सिंचाई एवं पेयजल के लिए उपलब्ध कराना है। आइस स्तूप बनाने के लिए सर्दियों में ऊँचाई वाले क्षेत्रों से पाइप के माध्यम से पानी नीचे लाया जाता है। गुरुत्वाकर्षण के कारण पानी फव्वारे की तरह ऊपर निकलता है और अत्यधिक ठंड के कारण तुरंत जमने लगता है। धीरे-धीरे यह बर्फ का विशाल शंकु बन जाता है, जो आकार में बौद्ध स्तूप जैसा दिखाई देता है। इसकी शंक्वाकार संरचना के कारण यह लंबे समय तक नहीं पिघलता और गर्मियों तक सुरक्षित रहता है। गर्मियों के मौसम में जब खेतों में पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब आइस स्तूप धीरे-धीरे पिघलता है और आसपास के क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराता है। इससे किसानों को सिंचाई में सहायता मिलती है तथा जल संकट का समाधान होता है। यह तकनीक विशेष र...

SECMOL

 SECMOL (सेकमोल Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) (स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख) लद्दाख की एक प्रसिद्ध शैक्षिक संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 1988 में छात्रों और शिक्षाविदों के एक समूह ने की थी। इस संस्था के विकास में Sonam Wangchuk की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। SECMOL का मुख्य उद्देश्य लद्दाख के विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा प्रदान करना है जो स्थानीय परिस्थितियों, जीवन कौशल और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। SECMOL का परिसर लेह के निकट स्थित है और अपनी पर्यावरण-अनुकूल संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ अधिकांश भवन मिट्टी, पत्थर और अन्य स्थानीय सामग्रियों से बनाए गए हैं। सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग किया जाता है, जिससे अत्यधिक ठंड के मौसम में भी कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह परिसर सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। SECMOL की शिक्षा प्रणाली पारंपरिक रटने की पद्धति से अलग है। यहाँ विद्यार्थियों को "करते हुए सीखना" (Learning by Doing) की अवधारणा पर प्रशिक्षित किया जाता है। छात्र खेती, सौर ऊर्जा, जल संरक...

SONAM WANGCHUK

 सोनम वांगचुक  Sonam Wangchuk भारत के प्रसिद्ध अभियंता, शिक्षाविद्, नवप्रवर्तक और पर्यावरण संरक्षक हैं। उनका जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के अलची गाँव में हुआ। वे अपने अभिनव विचारों, शिक्षा सुधारों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं। उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले लद्दाख क्षेत्र में शिक्षा और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। सोनम वांगचुक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लद्दाख में प्राप्त की। बाद में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि पारंपरिक शिक्षा प्रणाली लद्दाख जैसे क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने साथियों के सहयोग से स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक, रोजगारोन्मुख और जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान करना है। यहाँ विद्यार्थियों को केवल पुस्तक आधारित ज्ञान ही नहीं, बल्कि विज्ञान, तकनीक, कृषि, ऊर्जा संरक्षण और नेतृत्व कौशल का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। सो...

GOVIND DHOLAKIA

 गोविंद ढोलकिया  Govind Dholakia भारत के प्रसिद्ध हीरा उद्योगपति, समाजसेवी और प्रेरणादायक उद्यमी हैं। उनका जन्म गुजरात के अमरेली जिले के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कठिन परिश्रम, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के बल पर व्यापार जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। गोविंद ढोलकिया ने सूरत में हीरा उद्योग से अपने करियर की शुरुआत की। बाद में उन्होंने हीरा प्रसंस्करण और निर्यात क्षेत्र की अग्रणी कंपनी SRK Diamonds की स्थापना की। उनके नेतृत्व में यह कंपनी विश्व के प्रमुख हीरा निर्यातकों में शामिल हुई। वे अपने कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार, पारदर्शिता और नैतिक व्यावसायिक मूल्यों के लिए भी जाने जाते हैं। व्यापार के साथ-साथ गोविंद ढोलकिया समाजसेवा में भी सक्रिय हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में अनेक सामाजिक कार्यों का समर्थन करते हैं। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की सहायता, विद्यालयों के विकास तथा विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका मानना है कि व्यवसाय ...

JANTAR MANTAR

जंतर मंतर  जंतर मंतर भारत की प्राचीन खगोलीय वेधशालाओं का एक प्रसिद्ध समूह है। इनका निर्माण 18वीं शताब्दी में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने कराया था। उन्होंने खगोल विज्ञान और ज्योतिष के अध्ययन के लिए दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में जंतर मंतर बनवाए। इनमें से जयपुर का जंतर मंतर सबसे बड़ा और सबसे अच्छी तरह संरक्षित है तथा इसे वर्ष 2010 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया। 'जंतर' शब्द संस्कृत के 'यंत्र' से बना है, जिसका अर्थ उपकरण होता है, जबकि 'मंतर' शब्द 'मंत्र' से जुड़ा है। सामान्य रूप से जंतर मंतर का अर्थ खगोलीय गणनाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले यंत्रों का समूह माना जाता है। जंतर मंतर में अनेक विशाल पत्थर और ईंटों से बने वैज्ञानिक उपकरण हैं। इनमें प्रमुख हैं—सम्राट यंत्र, जयप्रकाश यंत्र, राम यंत्र और मिश्र यंत्र। इन उपकरणों की सहायता से समय की सटीक गणना, सूर्य और ग्रहों की स्थिति, नक्षत्रों का अध्ययन तथा खगोलीय घटनाओं का अवलोकन किया जाता था। सम्राट यंत्र विश्व की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्यघड़ी मानी जाती है। जंतर मंत...

BRAHMYUGAM

 ब्रह्मयुगम (Bramayugam) ब्रह्मयुगम (Bramayugam) वर्ष 2024 में रिलीज़ हुई एक मलयालम भाषा की मनोवैज्ञानिक हॉरर और लोककथा पर आधारित फिल्म है। इसका निर्देशन राहुल सदाशिवन ने किया है। फिल्म में ममूटी ने मुख्य भूमिका निभाई है। यह फिल्म अपनी रहस्यमय कहानी, प्रभावशाली अभिनय और श्वेत-श्याम (ब्लैक एंड व्हाइट) छायांकन के कारण दर्शकों और समीक्षकों से खूब सराही गई। फिल्म की कहानी प्राचीन केरल की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें एक लोकगायक जंगल में भटकते हुए एक रहस्यमय हवेली तक पहुँच जाता है। हवेली का मालिक बाहर से एक विद्वान और सम्मानित व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व का भयावह और रहस्यमय पक्ष सामने आने लगता है। इसके बाद कहानी रहस्य, भय और अलौकिक घटनाओं से भर जाती है। फिल्म केवल डराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता, लालच, स्वतंत्रता और मानव स्वभाव जैसे गहरे विषयों को भी प्रस्तुत करती है। लोककथाओं और पौराणिक मान्यताओं का सुंदर मिश्रण इसे एक अलग पहचान देता है। फिल्म का वातावरण, ध्वनि प्रभाव और कैमरा कार्य दर्शकों को लगातार रोमांच का अनुभव कराते हैं। ममूटी ने अपने सशक्त अभिनय...

TRAFFIC SYMBOLS OF ROADWAYS

 भारत में सड़क यातायात (Roadways) के प्रमुख ट्रैफिक संकेत (Traffic Symbols) भारत में सड़क यातायात संकेतों का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित यातायात की जानकारी देना है। भारतीय सड़क संकेत मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: 1. अनिवार्य (Mandatory/Regulatory Signs) इन संकेतों का पालन करना कानूनन आवश्यक है। रुकें (STOP) प्रवेश निषेध (No Entry) गति सीमा (Speed Limit) यू-टर्न निषिद्ध (No U-Turn) ओवरटेक निषिद्ध (No Overtaking) हॉर्न बजाना मना है (No Horn) 2. चेतावनी संकेत (Warning Signs) ये आगे आने वाले संभावित खतरे या सड़क की स्थिति के बारे में चेतावनी देते हैं। तीव्र मोड़ आगे (Sharp Curve) संकरा पुल (Narrow Bridge) स्कूल आगे (School Ahead) पैदल पार पथ (Pedestrian Crossing) रेलवे फाटक आगे (Railway Crossing) फिसलन भरी सड़क (Slippery Road) 3. सूचना संकेत (Informatory Signs) ये यात्रियों को आवश्यक सुविधाओं और मार्ग संबंधी जानकारी देते हैं। पार्किंग (Parking) अस्पताल (Hospital) पेट्रोल पंप (Petrol Pump) बस स्टॉप (Bus Stop) रेस्तरां (Restaurant)...

HYDROGEN TRAIN IN INDIA

 भारत की हाइड्रोजन ट्रेन भारत ने 17 जुलाई 2026 को अपनी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेन का शुभारंभ कर रेलवे के हरित परिवहन अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।  मुख्य अपडेट: यह ट्रेन जींद–सोनीपत रेलखंड पर संचालित की जा रही है। ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे केवल जलवाष्प (Water Vapour) का उत्सर्जन होता है और कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य रहता है। इसमें लगभग 2,600 यात्रियों के बैठने/यात्रा करने की क्षमता है। ट्रेन की अधिकतम डिजाइन गति 110 किमी/घंटा है, जबकि प्रारंभिक संचालन लगभग 75 किमी/घंटा की गति से किया जा रहा है। एक बार हाइड्रोजन भरने पर यह लगभग 250–350 किलोमीटर तक चल सकती है।  विशेषताएँ पूरी तरह 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत विकसित। जींद में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन एवं रिफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की गई है। आधुनिक कोच, ऊर्जा-कुशल प्रणाली और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से लैस। भविष्य में गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर डीजल इंजनों के विकल्प के रूप में उप...

MURUGAPA GROUP

 मुरुगप्पा समूह (Murugappa Group)  Murugappa Group भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 1900 में ए. एम. मुरुगप्पा चेट्टियार द्वारा की गई थी। समूह का मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है। एक सदी से अधिक समय में मुरुगप्पा समूह ने विनिर्माण, कृषि, वित्तीय सेवाओं और इंजीनियरिंग सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। समूह की प्रमुख कंपनियों में Carborundum Universal Limited (CUMI), Cholamandalam Investment and Finance Company, Cholamandalam MS General Insurance, Tube Investments of India, CG Power and Industrial Solutions तथा Coromandel International शामिल हैं। ये कंपनियाँ अपघर्षक (Abrasives), उर्वरक, कृषि समाधान, वित्तीय सेवाएँ, बीमा, साइकिल, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा औद्योगिक उपकरणों के निर्माण और सेवाओं में अग्रणी हैं। मुरुगप्पा समूह का व्यवसाय केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके उत्पाद और सेवाएँ अनेक देशों में उपलब्ध हैं। समूह अनुसंधान एवं विकास (R&D), गुणवत्ता, नवाचार और आधुनिक तकनीक पर विशेष बल देता है। इसके कारण य...

DADUA

ददुआ (शिव कुमार पटेल) ददुआ, जिनका वास्तविक नाम शिव कुमार पटेल था, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का एक कुख्यात डकैत था। उसका जन्म उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद के एक गाँव में हुआ था। वर्ष 1980 के दशक से लेकर 2007 तक वह बीहड़ों में सक्रिय रहा और उसके गिरोह का प्रभाव चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में फैला हुआ था। ददुआ पर हत्या, अपहरण, फिरौती, डकैती और अवैध हथियार रखने जैसे अनेक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। उसके सिर पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारों ने लाखों रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस के लिए वह लंबे समय तक सबसे वांछित अपराधियों में से एक रहा। उसके गिरोह ने वर्षों तक बीहड़ों में अपना प्रभाव बनाए रखा, जिससे स्थानीय लोगों में भय का वातावरण बना रहता था। ददुआ के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह कुछ गरीब लोगों की आर्थिक सहायता करता था, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में उसे सीमित स्थानीय समर्थन भी मिला। हालांकि, यह तथ्य उसके द्वारा किए गए गंभीर अपराधों को किसी भी प्रकार उचित नहीं ठहराता। कानून की दृष्टि में वह एक वांछित अपराधी था और उसके विरुद्ध लगातार...