POTTI SRIRAMULU


पोत्ती श्रीरामुलु 

भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के प्रबल समर्थक थे। उनका जन्म 16 मार्च 1901 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी (वर्तमान आंध्र प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के बाद कुछ समय रेलवे में नौकरी की, लेकिन बाद में महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए।

पोत्ती श्रीरामुलु ने सत्य, अहिंसा और सामाजिक समानता के सिद्धांतों का पालन किया। उन्होंने अस्पृश्यता उन्मूलन, हरिजन कल्याण तथा समाज में समानता स्थापित करने के लिए अनेक प्रयास किए। वे गांधीजी के समर्पित अनुयायी थे और कई आंदोलनों में भाग लेने के कारण जेल भी गए।

उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान तेलुगु भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग को लेकर किया गया आमरण अनशन था। उन्होंने 19 अक्टूबर 1952 को अनशन शुरू किया और 58 दिनों तक भोजन ग्रहण नहीं किया। 15 दिसंबर 1952 को उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद पूरे देश, विशेषकर तेलुगु भाषी क्षेत्रों में व्यापक जनआंदोलन हुआ।

जनभावनाओं को देखते हुए भारत सरकार ने 1 अक्टूबर 1953 को अलग आंध्र राज्य का गठन किया। बाद में 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के साथ आंध्र प्रदेश का निर्माण हुआ। इस प्रकार पोत्ती श्रीरामुलु का बलिदान भारत में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का महत्वपूर्ण आधार बना।

आज पोत्ती श्रीरामुलु को त्याग, सत्यनिष्ठा और जनसेवा के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। उनके सम्मान में अनेक संस्थानों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों का नामकरण किया गया है। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि दृढ़ संकल्प, अहिंसा और जनहित के प्रति समर्पण से बड़े सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन संभव हैं।

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