BAGURUMBA DANCE

 बागुरुम्बा नृत्य (Bagurumba Dance)

बागुरुम्बा भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम की बोडो जनजाति का एक प्रसिद्ध लोकनृत्य है। यह नृत्य बोडो समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और प्रकृति-प्रेम का प्रतीक माना जाता है। बागुरुम्बा को अक्सर “तितली नृत्य” भी कहा जाता है, क्योंकि इसके नृत्य-हावभाव तितली की सुंदर और कोमल गतिविधियों से प्रेरित होते हैं।

इस नृत्य का प्रदर्शन मुख्य रूप से बोडो समुदाय के पारंपरिक त्योहार ब्विसागु के अवसर पर किया जाता है। ब्विसागु उत्सव कृषि चक्र, नए वर्ष और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। इस अवसर पर युवक और युवतियाँ रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्र पहनकर सामूहिक रूप से बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत करते हैं।

बागुरुम्बा नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सौम्य और लयबद्ध गतियाँ हैं। नर्तक-नर्तकियाँ हाथों और पैरों की सुंदर मुद्राओं के माध्यम से पक्षियों, तितलियों, फूलों तथा प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण करते हैं। इस नृत्य में प्रकृति के साथ मानव के घनिष्ठ संबंध को दर्शाया जाता है।

नृत्य के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों का भी उपयोग किया जाता है। इनमें खाम (ढोल), सिफुंग (बाँसुरी), झोथा और अन्य स्थानीय वाद्ययंत्र प्रमुख हैं। इन वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि नृत्य को और अधिक आकर्षक बनाती है।

आज बागुरुम्बा नृत्य केवल असम तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी प्रस्तुत किया जाता है। यह नृत्य भारत की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और बोडो समुदाय की कला, परंपरा तथा सांस्कृतिक गौरव को विश्व के सामने प्रस्तुत करता है। बागुरुम्बा नृत्य भारतीय लोककला की सुंदरता और विविधता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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