PRESS COUNCIL OF INDIA
Press Council of India (भारतीय प्रेस परिषद)
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India) भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा तथा समाचार-पत्रों और पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए स्थापित एक वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 1966 में प्रेस काउंसिल अधिनियम, 1965 के अंतर्गत की गई थी। आपातकाल के दौरान वर्ष 1976 में इसे समाप्त कर दिया गया था, लेकिन बाद में प्रेस काउंसिल अधिनियम, 1978 के तहत पुनः स्थापित किया गया।
प्रेस परिषद का मुख्य उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखना तथा पत्रकारिता में नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है। यह संस्था समाचार-पत्रों, समाचार एजेंसियों और पत्रकारों के कार्यों की समीक्षा करती है तथा पत्रकारिता से संबंधित शिकायतों की जांच करती है। यदि किसी व्यक्ति, संस्था या सरकारी निकाय को किसी समाचार या रिपोर्ट से शिकायत होती है, तो वह प्रेस परिषद के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकता है।
प्रेस परिषद के अध्यक्ष आमतौर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होते हैं। परिषद में विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रकार संगठनों, संसद तथा सांस्कृतिक एवं विधिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाता है। इससे परिषद को विभिन्न दृष्टिकोणों से मामलों की समीक्षा करने में सहायता मिलती है।
प्रेस परिषद के पास दंडात्मक शक्तियाँ सीमित हैं। यह दोषी पाए जाने पर समाचार-पत्र या पत्रकार की निंदा, चेतावनी या फटकार लगा सकती है, लेकिन जुर्माना या कारावास जैसी सजा नहीं दे सकती। इसके निर्णय नैतिक और व्यावसायिक मानकों को बनाए रखने पर केंद्रित होते हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रेस को चौथा स्तंभ माना जाता है। ऐसे में प्रेस परिषद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह प्रेस की स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने का कार्य करती है। भारतीय प्रेस परिषद निष्पक्ष, जिम्मेदार और नैतिक पत्रकारिता को प्रोत्साहित कर लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
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