BAMCEF

बामसेफ (BAMCEF – ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटीज कम्युनिटीज एम्प्लॉइज फेडरेशन) भारत का एक प्रमुख सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना 6 दिसंबर 1978 को कांशीराम ने की थी। बामसेफ का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षित कर्मचारियों को संगठित कर सामाजिक न्याय, समानता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करना था। यह संगठन “पे-बैक टू सोसाइटी” की अवधारणा पर आधारित है, जिसके अनुसार समाज से लाभ पाने वाले शिक्षित वर्ग का दायित्व है कि वे अपने समाज के उत्थान के लिए कार्य करें।
बामसेफ का मुख्य कार्यक्षेत्र सामाजिक चेतना का निर्माण, वैचारिक प्रशिक्षण, संगठनात्मक मजबूती और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना है। यह संगठन राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक वैचारिक और सामाजिक मंच है, जिसने आगे चलकर डीएस-4 और बहुजन समाज पार्टी जैसे आंदोलनों के लिए वैचारिक आधार तैयार किया। बामसेफ का मानना है कि जब तक वंचित वर्गों में शिक्षा, संगठन और संघर्ष की भावना विकसित नहीं होगी, तब तक सामाजिक बदलाव संभव नहीं है।
यह संगठन देशभर में सेमिनार, अध्ययन शिविर, गोष्ठियाँ और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है, जिनके माध्यम से बहुजन समाज को उनके इतिहास, महापुरुषों और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ा जाता है। बामसेफ ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आज भी बामसेफ का प्रभाव विभिन्न राज्यों में देखा जाता है, जहाँ यह संगठन सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाता है और समतामूलक समाज की स्थापना के लिए कार्य करता है। कुल मिलाकर, बामसेफ बहुजन चेतना का एक सशक्त मंच है, जिसने भारत के सामाजिक आंदोलन को नई दिशा देने में अहम योगदान दिया है।

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