DR LAXMAN YADAV
📌 डॉ. लक्ष्मण यादव — परिचय
डॉ. लक्ष्मण यादव एक भारतीय शिक्षाविद्, लेखक और सार्वजनिक बहसों में सक्रिय विचारक हैं। वे मुख्य रूप से शिक्षा, सामाजिक न्याय, आरक्षण और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर अपने विचारों के लिए जाने जाते हैं।
🎓 शिक्षा और पेशा
लक्ष्मण यादव लंबे समय तक दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के जाकिर हुसैन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर (एड-हॉक) के रूप में पढ़ाते रहे।
वे हिंदी भाषा और उच्च शिक्षा के मुद्दों पर शिक्षण और शोध से जुड़े रहे हैं।
📘 ‘प्रोफेसर की डायरी’ (Professor Ki Diary)
उन्होंने अपनी किताब “Professor Ki Diary” लिखी है, जिसमें उन्होंने भारतीय उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालय प्रणाली, भेदभाव और प्रशासनिक चुनौतियों का अनुभव साझा किया है।
यह किताब चर्चित रही है और इसे बेस्ट-सेलर माना गया है।
⚖️ नौकरी और विवाद
लगभग 14 वर्षों तक पढ़ाने के बाद उन्हें अचानक दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने पद से हटा दिया — इसे लेकर उन्होंने भेदभाव और सिस्टम की कमियों पर सवाल उठाए हैं।
इस निर्णय के बाद वे सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर शिक्षा नीति, आरक्षण, सामाजिक समानता जैसे विषयों पर व्यापक रूप से बोल रहे हैं।
🗣️ विचार और सामाजिक भागीदारी
डॉ. यादव का दृष्टिकोण मुख्यतः निम्न विषयों पर केंद्रित है:
✔️ विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक शिक्षा व्यवस्था की पैरवी। �
✔️ आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर पंजाब से लेकर राष्ट्रीय बहसों तक राय देना। �
✔️ UGC के नए नियमों और शिक्षा-संस्था से जुड़े विवादों पर चर्चा।
🔹 यूजीसी नियमों पर बयान:
Dr. यadav ने 2026 में UGC की नई शिक्षा-समानता संबंधी नियमावली पर अपनी व्याख्या दी, जिसमें उन्होंने सर्वेक्षण, भेदभाव विरोधी सुरक्षा और सामाजिक न्याय के नजरिए से इस नए प्रावधान के महत्व को बताया।
🔹 एससी-एसटी आरक्षण पर विचार:
उन्होंने सार्वजनिक मंच पर कहा कि संविधान में सुप्रीम कोर्ट या सरकार के निर्णयों की तुलना में जाति संरचना और आंकड़ों के आधार पर आरक्षण नीति तय करने के पहले देश के इतिहास और संवैधानिक अधिकार समझना चाहिए।
डॉ. यादव अपने विचारों को सोशल मीडिया (Twitter/X) और YouTube चैनल के माध्यम से भी साझा करते हैं, जहाँ वे शिक्षा, राजनीति, सामाजिक असमानता और न्याय पर लगातार बहस करते रहते हैं।
डॉ. लक्ष्मण यादव एक शिक्षाविद, लेखक और सामाजिक विषयों पर सक्रिय विचारक हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय, शिक्षा नीति और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर अपने अनुभवों और राय को किताबें, इंटरव्यू और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा किया है। वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और समावेशी समाज के निर्माण के पक्षधर रहे हैं।
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