PASHMINA SHAWL
पश्मीना शॉल भारत की एक अत्यंत प्रसिद्ध और कीमती शॉल है, जो अपनी मुलायमता, गर्माहट और सुंदरता के लिए जानी जाती है। यह मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में बनाई जाती है। पश्मीना शब्द फारसी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है “ऊन”। यह शॉल खास प्रकार की बकरी, जिसे चांगथांगी या पश्मीना बकरी कहा जाता है, के महीन और मुलायम ऊन से तैयार की जाती है।
पश्मीना ऊन लद्दाख के ऊँचे और ठंडे क्षेत्रों में पाई जाने वाली बकरियों से प्राप्त होता है। अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए इन बकरियों के शरीर पर बहुत महीन और गर्म ऊन उगता है। इसी ऊन को सावधानीपूर्वक इकट्ठा कर हाथों से धागा बनाया जाता है और फिर बुनाई की जाती है। पारंपरिक रूप से पश्मीना शॉल की बुनाई हाथ से की जाती है, जिससे इसकी गुणवत्ता और भी बेहतर होती है।
पश्मीना शॉल हल्की होने के बावजूद बहुत गर्म होती है। इसे सर्दियों में ठंड से बचाव के लिए पहना जाता है। इसकी सुंदर कढ़ाई, खासकर कश्मीरी कढ़ाई, इसे और भी आकर्षक बनाती है। फूल-पत्तियों और पारंपरिक डिजाइनों से सजी पश्मीना शॉल देखने में बेहद सुंदर लगती है।
पश्मीना शॉल केवल वस्त्र नहीं, बल्कि कश्मीर की कला और संस्कृति का प्रतीक है। यह भारत की पारंपरिक हस्तकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। देश-विदेश में इसकी काफी मांग है और इसे एक शानदार उपहार के रूप में भी दिया जाता है।
इस प्रकार, पश्मीना शॉल अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, गर्माहट और सुंदरता के कारण विशेष स्थान रखती है। यह भारतीय हस्तशिल्प की शान और गौरव का प्रतीक है।
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