DIFFERENT POSITIONS OF NATIONAL FLAG OF INDIA
राष्ट्रीय ध्वज की विभिन्न स्थितियों का अर्थ
भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है—ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंग होता है तथा सफेद पट्टी के बीच 24 तीलियों वाला अशोक चक्र होता है। ध्वज को फहराने और प्रदर्शित करने की स्थिति का भी विशेष महत्व है।
सीधा फहरता हुआ ध्वज 🇮🇳
सामान्य अवसरों पर ध्वज को ऊँचे स्थान पर सम्मानपूर्वक फहराया जाता है। यह राष्ट्र की स्वतंत्रता, गौरव और संप्रभुता का प्रतीक है।
आधा झुका हुआ ध्वज (Half-Mast)
किसी महान राष्ट्रीय व्यक्ति या महत्वपूर्ण पदाधिकारी के निधन पर निर्धारित सरकारी आदेश के अनुसार ध्वज आधा झुकाया जा सकता है। यह शोक और सम्मान का प्रतीक है।
ऊर्ध्वाधर रूप में लगाया गया ध्वज
यदि तिरंगे को दीवार या भवन पर ऊर्ध्वाधर रूप में प्रदर्शित किया जाए, तो केसरिया रंग दर्शक की बाईं ओर होना चाहिए। इससे तिरंगे की सही स्थिति बनी रहती है।
क्षैतिज रूप में लगाया गया ध्वज
सामान्य रूप से तिरंगे की केसरिया पट्टी ऊपर, सफेद बीच में और हरी पट्टी नीचे रहती है। अशोक चक्र सीधा दिखाई देना चाहिए।
उल्टा ध्वज
तिरंगे को इस प्रकार लगाना कि हरा रंग ऊपर और केसरिया नीचे हो, राष्ट्रीय ध्वज का गलत प्रदर्शन माना जाता है। इसे जानबूझकर करना अपमानजनक माना जा सकता है।
भूमि को स्पर्श करता हुआ ध्वज
राष्ट्रीय ध्वज को जमीन, पानी या किसी ऐसी वस्तु को स्पर्श नहीं करना चाहिए जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो।
ध् राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग और प्रदर्शन के नियम Flag Code of India, 2002 तथा संबंधित कानूनों में निर्धारित हैं।
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