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KOKBOROK

 कोकबोरोक (Kokborok) त्रिपुरा राज्य की प्रमुख जनजातीय भाषा है, जिसे मुख्य रूप से त्रिपुरी या देबबर्मा समुदाय द्वारा बोला जाता है। “कोक” का अर्थ है “भाषा” और “बोरोक” का अर्थ है “लोग”, इसलिए कोकबोरोक का शाब्दिक अर्थ हुआ “लोगों की भाषा”। यह भाषा तिब्बती-बर्मी (Tibeto-Burman) भाषा परिवार से संबंधित है और पूर्वोत्तर भारत की महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है। कोकबोरोक को त्रिपुरा में आधिकारिक मान्यता प्राप्त है और इसे राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। यह भाषा केवल भारत के त्रिपुरा राज्य में ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी बोली जाती है। समय के साथ इसके संरक्षण और विकास के लिए कई प्रयास किए गए हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में कोकबोरोक की पढ़ाई की व्यवस्था की गई है, जिससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़ी रह सके। कोकबोरोक भाषा की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा है। लोकगीत, लोककथाएँ, नृत्य और पारंपरिक त्योहार इस भाषा की पहचान को मजबूत बनाते हैं। आधुनिक समय में कई लेखकों और साहित्यकारों ने कोकबोरोक में कविताएँ, कहानियाँ और नाटक लिखकर इसे सम...

ZANZIBAR

 जांज़ीबार (Zanzibar) पूर्वी अफ्रीका में स्थित तंजानिया का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जो हिंद महासागर में बसा हुआ एक सुंदर द्वीपसमूह है। यह मुख्य रूप से दो बड़े द्वीपों—उंगुजा (जिसे आमतौर पर जांज़ीबार कहा जाता है) और पेम्बा—से मिलकर बना है। जांज़ीबार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सफेद रेतीले समुद्र तटों, नीले स्वच्छ पानी और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इतिहास की दृष्टि से जांज़ीबार का महत्व अत्यंत विशेष रहा है। प्राचीन काल में यह व्यापार का प्रमुख केंद्र था, जहाँ अरब, फारसी, भारतीय और यूरोपीय व्यापारी मसालों, हाथीदांत और अन्य वस्तुओं का व्यापार करते थे। 19वीं शताब्दी में यह ओमान के सुल्तान के अधीन रहा और बाद में ब्रिटिश शासन में आया। 1964 में जांज़ीबार ने तंगानिका के साथ मिलकर तंजानिया गणराज्य का गठन किया। जांज़ीबार को “आइलैंड ऑफ क्लोव्स” यानी “लौंग का द्वीप” भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ लौंग और अन्य मसालों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। मसालों की खेती यहाँ की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पर्यटन भी आय का प्रमुख स्रोत है। स्टोन टाउन, जो यूनेस्को ...

ANNA COMMUNITY RADIO

अन्ना कम्युनिटी रेडियो (Anna Community Radio) भारत का पहला सामुदायिक रेडियो स्टेशन माना जाता है, जिसकी स्थापना वर्ष 2004 में चेन्नई स्थित अन्ना विश्वविद्यालय में की गई थी। इसे आमतौर पर “अन्ना एफएम (Anna FM)” के नाम से भी जाना जाता है। इस रेडियो स्टेशन की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाना था। यह पहल भारत में सामुदायिक रेडियो आंदोलन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हुई। अन्ना कम्युनिटी रेडियो की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह “समुदाय द्वारा, समुदाय के लिए” संचालित होता है। इसमें विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक और स्थानीय नागरिक मिलकर कार्यक्रमों की योजना बनाते और प्रस्तुत करते हैं। इसके कार्यक्रमों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास, विज्ञान, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों पर आधारित सामग्री शामिल होती है। यह रेडियो मुख्य रूप से स्थानीय भाषा में प्रसारण करता है, जिससे आसपास के लोगों को जानकारी सरल और प्रभावी तरीके से मिल सके। इस रेडियो स्टेशन की स्थापना में प्रसारण विशेषज्ञ डॉ. रामामूर्ति श्रीधर की महत्वपूर्ण भूमिका रही, ज...

PADAMSRI RAMAMURTHY SREEDHAR

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  📍 पद्म श्री सम्मान (2026) सरकार ने रामामूर्ति श्रीधर को पद्म श्री सम्मान से नवाज़ा है, 2026 में रेडियो प्रसारण और सामुदायिक रेडियो के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए। यह सम्मान गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किया गया।  📖 संक्षिप्त जीवनी (Biography in Hindi) 👶 आरंभिक जीवन पूरा नाम: रामामूर्ति श्रीधर (Ramamurthy Sreedher) उनका जन्म तमिलनाडु के चेन्नई (Tambaram) में हुआ।  🎓 शिक्षा और प्रारंभिक करियर श्रीधर ने रेडियो और संचार के क्षेत्र में करियर शुरू किया और वर्षों तक All India Radio तथा Doordarshan जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ कार्य किया। वे रेडियो प्रसारण और विज्ञान संचार में एक अग्रणी विशेषज्ञ रहे हैं। � S M Sehgal Foundation 📻 सामुदायिक रेडियो में योगदान इन्हें भारत में Community Radio के जनक (Father of Community Radio in India) कहा जाता है। � 2004 में Anna Community Radio (Anna FM) को भारत का पहला सामुदायिक/कैम्पस रेडियो स्टेशन के रूप में स्थापित करने में इनका मुख्य योगदान था।  उन्होंने सामुदायिक रेडियो को स्थानीय समुदायों को अपनी आवाज़ देने, सूचना...

ISLAND OF CLOVES

 आइलैंड ऑफ क्लोव्स (Island of Cloves) का हिंदी अर्थ है — “लौंग का द्वीप”। यह उपनाम ज़ांज़ीबार (Zanzibar) को दिया गया है, जो पूर्वी अफ्रीका के तंजानिया देश के तट के पास स्थित एक प्रसिद्ध द्वीपसमूह है। ज़ांज़ीबार ऐतिहासिक रूप से लौंग (Clove) के उत्पादन और व्यापार के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रहा है। 19वीं शताब्दी में ओमान के सुल्तानों के शासनकाल में यहाँ बड़े पैमाने पर लौंग की खेती शुरू हुई। अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और समुद्री वातावरण के कारण यहाँ की लौंग उच्च गुणवत्ता की मानी जाती है। एक समय ऐसा था जब ज़ांज़ीबार विश्व के सबसे बड़े लौंग निर्यातकों में से एक था। लौंग केवल मसाले के रूप में ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों के कारण भी महत्वपूर्ण है। इसका उपयोग दांत दर्द, पाचन समस्याओं और सुगंधित तेल बनाने में किया जाता है। ज़ांज़ीबार की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक लौंग की खेती और निर्यात पर निर्भर रही है। ज़ांज़ीबार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सफेद रेत वाले समुद्र तटों, ऐतिहासिक “स्टोन टाउन” और मसाला बागानों के लिए भी प्रसिद्ध है। आज भी वहाँ “स्पाइस टूर” आयोजित किए जाते हैं, जहाँ पर्यटक लौंग सहित व...

SARLA MAHESHWARI

📰 सरला माहेश्वरी कौन थीं? सरला माहेश्वरी भारत की वरिष्ठ और प्रसिद्ध दूरदर्शन (Doordarshan) न्यूज एंकर थीं, जिन्हें 1970–80 एवं 90 के दशक में राष्ट्रीय टेलीविजन पर विश्वसनीय और सम्मानित समाचार वाचिका के रूप में जाना जाता था।  📌 जन्म और प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 21 जुलाई 1954 को राजस्थान के बीकानेर में हुआ था और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातक, परास्नातक तथा Ph.D. की पढ़ाई की। 🎙️ करियर और उपलब्धियाँ 📺 दूरदर्शन में शुरुआत: सारला माहेश्वरी ने अपना करियर 1976 में दूरदर्शन में एनाउंसर के रूप में शुरू किया जब वे Ph.D. कर रही थीं। जाँच के बाद उन्हें समाचार वाचन के लिए चुना गया और उन्होंने टीवी पर समाचार पढ़ना शुरू किया।  📊 प्रेसेंटर के रूप में पहचान: उनकी मधुर आवाज़, सटीक उच्चारण, संतुलित प्रस्तुति और गरिमामय व्यक्तित्व ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय और भरोसेमंद बना दिया।  🌍 बीबीसी में अनुभव: 1984 में उन्होंने कुछ समय के लिए यूके में BBC के साथ भी न्यूज़ रीडर के रूप में काम किया और बाद में 1988 में भारत लौटकर दुबारा दूरदर्शन में शामिल हो गईं 📺 समय...

PADMSRI PUNNIAMURTHY NATESAN

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  पद्मश्री डॉ. पुन्नियामूर्ति नाटेसन  डॉ. पुन्नियामूर्ति नाटेसन (Dr. Punniamurthy Natesan) भारत के प्रतिष्ठित पशु चिकित्सक, शोधकर्ता और पारंपरिक वैतरण विज्ञान (Ethno-Veterinary Medicine) के विशेषज्ञ हैं जिन्हें 2026 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें पशु चिकित्सा, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा और पारंपरिक ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया गया है।  🏅 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा डॉ. पुन्नियामूर्ति नाटेसन का जन्म तमिलनाडु के तंजावुर क्षेत्र में हुआ। उन्होंने मैड्रास वेटेरिनरी कॉलेज, चेन्नई से पशु चिकित्सा में स्नातक, परास्नातक और Ph.D. की पढ़ाई की। बाद में वे तमिलनाडु वेटेरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (TANUVAS) में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे और Ethno-Veterinary Science & Practice के क्षेत्र में योगदान दिया।  🐄 पेशेवर कार्य और शोध डॉ. नाटेसन ने आज के पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शोध का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जड़ी-बूटियों और पारंपरि...