PADMSRI PUNNIAMURTHY NATESAN

 

पद्मश्री डॉ. पुन्नियामूर्ति नाटेसन 
डॉ. पुन्नियामूर्ति नाटेसन (Dr. Punniamurthy Natesan) भारत के प्रतिष्ठित पशु चिकित्सक, शोधकर्ता और पारंपरिक वैतरण विज्ञान (Ethno-Veterinary Medicine) के विशेषज्ञ हैं जिन्हें 2026 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें पशु चिकित्सा, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा और पारंपरिक ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया गया है। 
🏅 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
डॉ. पुन्नियामूर्ति नाटेसन का जन्म तमिलनाडु के तंजावुर क्षेत्र में हुआ। उन्होंने मैड्रास वेटेरिनरी कॉलेज, चेन्नई से पशु चिकित्सा में स्नातक, परास्नातक और Ph.D. की पढ़ाई की। बाद में वे तमिलनाडु वेटेरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (TANUVAS) में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे और Ethno-Veterinary Science & Practice के क्षेत्र में योगदान दिया। 
🐄 पेशेवर कार्य और शोध
डॉ. नाटेसन ने आज के पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शोध का मुख्य उद्देश्य स्थानीय जड़ी-बूटियों और पारंपरिक उपचारों के माध्यम से पशु स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान खोजकर किसानों को किफायती और सुरक्षित स्वास्थ्य समाधान प्रदान करना रहा है। 
उनके काम से:
दूध, मांस और अंडों में दवा अवशेष कम करने में मदद मिली है, जिससे उपभोक्ता स्वास्थ्य में सुधार होता है।
पैथोलॉजिकल दवाओं पर निर्भरता कम हुई और पशुओं के लिए सस्ते, प्राकृतिक उपचार तैयार किए गए।
किसानों को संक्रमण और रोगों से लड़ने के लिए प्राकृतिक उपचार प्रोटोकॉल विकसित करने में सहायता मिली। 
📜 उपलब्धियाँ और सम्मान
पद्मश्री 2026 – भारत सरकार द्वारा पशु चिकित्सा और पारम्परिक वैतरण चिकित्सा में उत्कृष्ठ योगदान के लिए सम्मानित।
2019 – Veterinary Council of India द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड।
2013 – Tamil Nadu Scientist Award। 
📣 पद्मश्री सम्मान पर प्रतिक्रिया
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद डॉ. नाटेसन ने कहा कि यह सम्मान उनके 25 वर्षों के सतत प्रयासों का मान्यता है। उन्होंने विशेष रूप से पारंपरिक पशु चिकित्सा ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि आजकल पारंपरिक इलाज की मांग बढ़ रही है क्योंकि रासायनिक दवाओं के उपयोग से नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। 
🌍 प्रभाव और योगदान
उनकी कार्यशैली ने न सिर्फ भारत में बल्कि अन्य देशों में भी पारंपरिक पशु स्वास्थ्य प्रथाओं को अपनाया जाने योग्य बनाया है। कई सरकारी और निजी डेयरी प्रोजेक्टों ने उनके विकसित उपचारों को लागू किया है जिससे पशु स्वास्थ्य और किसान आजीविका दोनों में सुधार हुआ है। 
📌 सार: डॉ. पुन्नियामूर्ति नाटेसन का जीवन और कार्य भारत में पारंपरिक वैज्ञानिक ज्ञान, पशु स्वास्थ्य और ग्रामीण कल्याण के संगम का एक आदर्श उदाहरण है। उनके प्रयासों से ग्रामीण समुदायों और पशुपालकों को स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिली है। 

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