PADMSRI NARESH CHANDRA DEV VERMA
नरेश चंद्र देव वर्मा (Naresh Chandra Dev Varma / Debbarma)
🏆 पद्म श्री सम्मान – 2026
नरेश चंद्र देव वर्मा को भारत सरकार द्वारा 2026 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह पुरस्कार उन्हें साहित्य और शिक्षा (Literature & Education) के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया।
उन्होंने इस सम्मान के बारे में कहा कि यह पुरस्कार उनके व्यक्तिगत कार्य का नहीं बल्कि “कोकबोरोक भाषा और उसके साहित्य” की मान्यता है।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक साहा ने भी उन्हें पद्म श्री मिलने पर दिल से बधाई दी है और कहा कि यह सम्मान त्रिपुरा सरकार की ओर से दिया गया त्रिपुरा भूषण पुरस्कार (2024) के बाद उनके उत्कृष्ट कार्य का राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार है।
📜 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
जन्म: 31 अक्टूबर 1944 को त्रिपुरा (तब ब्रिटिश भारत का हिस्सा) में हुआ।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता का नाम मदन मोहन देव वर्मा और माता का नाम संभु लक्ष्मी देव वर्मा था।
उन्होंने अपने शुरुआती जीवन में शिक्षा प्राप्त की और क्लास 10 के बाद अगरतला आए। आगे की पढ़ाई उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से पूरी की क्योंकि उस समय त्रिपुरा में विश्वविद्यालय नहीं था।
✍️ साहित्यिक यात्रा और काम
नरेश चंद्र देव वर्मा एक प्रख्यात कोकबोरोक साहित्यकार, लेखक, शोधकर्ता और विद्वान हैं।
उन्होंने कोकबोरोक भाषा में लगभग 34 किताबें लिखी हैं, जिनमें भाषा, व्याकरण, संस्कृति और साहित्य के अध्ययन शामिल हैं।
उनकी साहित्यिक यात्रा लगभग 50 वर्षों से अधिक लंबी रही है, जिसके दौरान उन्होंने कोकबोरोक भाषा को एक जीवित साहित्यिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🏛️ सरकारी सेवा और योगदान
वर्मा ने त्रिपुरा विधायी सभा सचिवालय (Tripura Legislative Assembly) में सरकारी सेवा की और बाद में जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी के पद पर सेवानिवृत्त हुए।
साथ ही उन्होंने कोकबोरोक भाषा को शैक्षिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत करने में योगदान दिया और भाषा की लोकप्रियता तथा मान्यता को आगे बढ़ाया।
🏅 अन्य सम्मान और उपलब्धियाँ
✔ त्रिपुरा भूषण पुरस्कार (Tripura Bhushan) – त्रिपुरा सरकार का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान (2024)। �
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✔ पद्म श्री (Padma Shri) – भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार (2026)।
उनके कार्यों को साहित्यिक क्षेत्रों में कई सरकारी पुरस्कारों और सम्मानित स्थानों के माध्यम से भी सराहा जा चुका है।
🗣️ उनका संदेश और दृष्टिकोण
पद्म श्री मिलने के बाद नरेश चंद्र देव वर्मा ने कहा है कि:
यह सम्मान उनके व्यक्तिगत गौरव से कहीं अधिक कोकबोरोक भाषा और उसके साहित्य की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता है।
उन्होंने भाषा को लिखने और पढ़ने के लिए बांग्ला या देवनागरी लिपि को अपनाने का समर्थन किया है ताकि कोकबोरोक का शिक्षण-अध्ययन और अधिक प्रभावी हो सके।

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