KOKBOROK

 कोकबोरोक (Kokborok) त्रिपुरा राज्य की प्रमुख जनजातीय भाषा है, जिसे मुख्य रूप से त्रिपुरी या देबबर्मा समुदाय द्वारा बोला जाता है। “कोक” का अर्थ है “भाषा” और “बोरोक” का अर्थ है “लोग”, इसलिए कोकबोरोक का शाब्दिक अर्थ हुआ “लोगों की भाषा”। यह भाषा तिब्बती-बर्मी (Tibeto-Burman) भाषा परिवार से संबंधित है और पूर्वोत्तर भारत की महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है।

कोकबोरोक को त्रिपुरा में आधिकारिक मान्यता प्राप्त है और इसे राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। यह भाषा केवल भारत के त्रिपुरा राज्य में ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी बोली जाती है। समय के साथ इसके संरक्षण और विकास के लिए कई प्रयास किए गए हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में कोकबोरोक की पढ़ाई की व्यवस्था की गई है, जिससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़ी रह सके।

कोकबोरोक भाषा की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा है। लोकगीत, लोककथाएँ, नृत्य और पारंपरिक त्योहार इस भाषा की पहचान को मजबूत बनाते हैं। आधुनिक समय में कई लेखकों और साहित्यकारों ने कोकबोरोक में कविताएँ, कहानियाँ और नाटक लिखकर इसे समृद्ध किया है। भाषा के विकास में व्याकरण, शब्दकोश और पाठ्यपुस्तकों की रचना भी महत्वपूर्ण रही है।

लिपि को लेकर कोकबोरोक में देवनागरी और रोमन लिपि का उपयोग किया जाता है, जबकि पहले बंगाली लिपि का भी प्रयोग होता था। वर्तमान में लिपि को लेकर चर्चा जारी रहती है, परंतु उद्देश्य भाषा को अधिक व्यापक और सुलभ बनाना है।

आज कोकबोरोक त्रिपुरा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है और इसके संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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