PADMSRI TRIPTI MUKHERJEE

 


🪡 तृप्ति मुखर्जी – जीवनी और उपलब्धियाँ (हिंदी में)
👩‍🎨 नाम: तृप्ति मुखर्जी
📍 स्थान: बीबभूम (सूरी), पश्चिम बंगाल, भारत �
📌 प्रसिद्धि: कांथा कढ़ाई (Nakshi Kantha embroidery) कलाकार एवं महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्यकर्ता 
🌟 मुख्य उपलब्धियाँ
🏅 पद्मश्री सम्मान (2026)
तृप्ति मुखर्जी को भारत सरकार द्वारा 2026 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है (कला/हस्तशिल्प के क्षेत्र में)।
उन्होंने यह सम्मान कांथा कढ़ाई और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया गया कार्य के लिए प्राप्त किया। 
🪢 कांथा कढ़ाई और सशक्तिकरण की यात्रा
🎨 कांथा कढ़ाई क्या है?
यह बंगाल की पारंपरिक कढ़ाई और कंबल जैसा दस्तकारी कला है, जिसमें सूई और रंग-बिरंगे धागों से जटिल डिज़ाइन बनाये जाते हैं। 
🧵 तृप्ति की इस कला में भूमिका
तृप्ति ने बचपन में अपनी माँ से कांथा कढ़ाई सीखी और इसी को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।
उन्होंने अब तक लगभग 20,000 ग्रामीण महिलाओं को कांथा शिल्प सिखाया है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनीं। 
उनकी कड़ाई में अक्सर ग्रामीण जीवन, भारतीय महाकाव्यों और सांस्कृतिक दृश्य भी उभरते हैं
🗓️ अन्य महत्वपूर्ण सम्मान
राष्ट्रीय पुरस्कार (पूर्व में)
शिल्पगुरु सम्मान (Shilpaguru) – भारतीय वस्त्र मंत्रालय से
बंगश्री सम्मान – पश्चिम बंगाल सरकार से
ये सब सम्मान उनके लंबे और समर्पित कार्य की पहचान हैं। 
🗣️ हाल ही में (2026) की प्रतिक्रिया
पद्मश्री मिलने पर उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके माता-पिता, खासकर माँ को समर्पित है। 
यह सम्मान उनके 40 साल से अधिक के प्रयास और ग्रामीण महिलाओं के साथ किए गए काम का परिणाम माना जा रहा है। 

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