PADMSRI SHAFI SHAUQ
Shafi Shauq
📌 पद्म श्री विजेता – शफी शौक (Padma Shri Shafi Shauq) – जीवनी एवं नवीन जानकारी
🧑🎓 परिचय
शफी शौक एक प्रसिद्ध कश्मीरी लेखक, कवि, भाषा वैज्ञानिक, अनुवादक और शिक्षाविद हैं।
इन्होंने पद्म श्री – भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान 2026 में साहित्य, शिक्षा और भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्राप्त किया।
📍 प्रारंभिक जीवन
शफी शौक का जन्म 18 मार्च 1950 को कप्रीन गाँव, Shopian (जम्मू एवं कश्मीर) में हुआ।
शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने कश्मीर यूनिवर्सिटी से अँग्रेज़ी में डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री हासिल की।
🎓 शैक्षिक और व्यावसायिक जीवन
उन्होंने कश्मीर यूनिवर्सिटी में कश्मीरी भाषा एवं साहित्य के विभाग में लगभग *33 वर्ष तक सेवा की।
विभाग के हेड और डीन (Faculty of Arts) जैसे उच्च पदों पर कार्य किया।
2010 में सेवानिवृत्त हुए।
📚 साहित्यिक योगदान
शफी शौक ने 100 से अधिक किताबें लिखी, संपादित की और अनुवाद किए — कश्मीरी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषाओं में।
उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
Keeshur Lugaat (कश्मीरी शब्दकोश)
Keeshryuk Grammar (कश्मीरी व्याकरण
कश्मीरी भाषा और साहित्य का इतिहास आधारित रचनाएँ
कई कविताओं, लघुकथाओं और नाटकीय कार्यों का अनुवाद भी किया।
🏆 पुरस्कार और सम्मान
प्रमुख पुरस्कार:
✔ पद्म श्री 2026 – साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए।
✔ साहित्य अकादमी पुरस्कार (Sahitya Akademi Award) – 2006 (रचनात्मक लेखन) और 2007 (अनुवाद के लिए)।
✔ Bhasha Samman, Best Teacher Award, आदि कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार। �
🗣 विचार और भाषा के प्रति प्रतिबद्धता
शौक का मानना है कि कश्मीरी भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान है और इसे संरक्षित और संवर्धित करना आवश्यक है।
साहित्य और अनुवाद के माध्यम से उन्होंने लोक साहित्य, सूफ़ी परंपरा और कश्मीरी सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
📅 लेटेस्ट अपडेट (2026)
📌 25 जनवरी 2026 को भारत सरकार द्वारा घोषणा की गई कि शफी शौक को पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया जाएगा, जो उनके दशकों लंबे साहित्यिक और शैक्षिक योगदान का राष्ट्रीय सम्मान है।
📌 उन्होंने यह उपलब्धि कश्मीर के भाषा और साहित्य के लिए समर्पित जीवन के लिए प्राप्त की।
Kashmir Life
📝 सरल हिंदी में सार
शफी शौक एक महान कश्मीरी साहित्यकार हैं जिन्होंने कश्मीरी भाषा को बचाने, विकसित करने और सूचीबद्ध करने में अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने शब्दकोश, व्याकरण, कविताएँ, अनुवाद और आलोचनात्मक लेखन के ज़रिये भाषा और साहित्य को समृद्ध किया। उनकी सेवा और साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया गया।

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