ARTICLE 142 OF INDIAN CONSTITUTION
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 (Article 142)
अनुच्छेद 142 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो सुप्रीम कोर्ट (उच्चतम न्यायालय) को विशेष अधिकार प्रदान करता है। इस अनुच्छेद के तहत सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति दी गई है कि वह “पूर्ण न्याय” (Complete Justice) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश या निर्देश जारी कर सकता है।
🔹 अनुच्छेद 142(1) क्या कहता है?
अनुच्छेद 142(1) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट किसी भी मामले में, जो उसके समक्ष लंबित हो, ऐसा कोई भी आदेश या डिक्री पारित कर सकता है जो पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक हो। ऐसे आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं।
अर्थात, यदि किसी मामले में मौजूदा कानून पर्याप्त समाधान नहीं दे पा रहा हो, तो सुप्रीम कोर्ट अपने विशेष अधिकार का उपयोग करके न्याय सुनिश्चित कर सकता है।
🔹 अनुच्छेद 142(2)
इसके तहत सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति है कि वह किसी व्यक्ति को उपस्थित होने, दस्तावेज प्रस्तुत करने या न्यायालय की अवमानना से संबंधित आदेश जारी कर सकता है।
✦ अनुच्छेद 142 की विशेषताएँ
यह शक्ति केवल सुप्रीम कोर्ट को प्राप्त है।
इसका उद्देश्य तकनीकी बाधाओं से ऊपर उठकर न्याय करना है।
यह शक्ति असाधारण (Extraordinary) मानी जाती है।
इसका प्रयोग संविधान और मूल अधिकारों की सीमाओं के भीतर किया जाता है।
✦ महत्वपूर्ण उदाहरण
सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक मामलों में अनुच्छेद 142 का उपयोग किया है, जैसे—
अयोध्या विवाद निर्णय (2019)
भोपाल गैस त्रासदी मामला
तलाक और वैवाहिक विवादों में त्वरित न्याय देने के लिए
✦ सीमाएँ
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट को व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं, लेकिन वह:
संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन नहीं कर सकता।
संसद द्वारा बनाए गए कानून को पूरी तरह निरस्त नहीं कर सकता (जब तक वह असंवैधानिक घोषित न हो)।
✦ निष्कर्ष
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को यह सुनिश्चित करने की शक्ति देता है कि न्याय केवल कानूनी तकनीकीताओं तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक और पूर्ण न्याय मिल सके। यह भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
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