PADMSRI OTHUVAR THIRUTHANI SWAMINATHAN
Othuvar Thiruthani Swaminathan
🌟 ओथुवर थिरुथानी स्वामीनाथन — परिचय
नाम: ओथुवर थिरुथानी स्वामीनाथन
क्षेत्र: साँस्कृतिक एवं धार्मिक संगीत
विशेषता: शैव भजन (Thevaram, Thiruvasagam आदि) के पारंपरिक ओथुवर / भजनकार
समाचार: उन्हें Padma Shri 2026 के लिए चुना गया है — भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान
“ओथुवर” वह पारंपरिक मंदिर‐संगीतकार होता है जो शिव भक्ति से जुड़े शास्त्रीय तमिल भजन और Thevaram आदि की गायन शैली में मंत्रोच्चारण और गीत गाता है।
🏅 Padma Shri सम्मान — 2026
डॉक्टरों और कलाकारों के बीच में, केंद्रीय सरकार ने 25 जनवरी 2026 को ओथुवर थिरुथानी स्वामीनाथन को Padma Shri Award (कला/संस्कृति) देने की घोषणा की। यह सम्मान उनके छह दशक से अधिक समय तक भारतीय और तमिल भक्ति संगीत के प्रचार-प्रसार और संरक्षण में योगदान के लिए दिया गया है।
🎶 उनका जीवन और कार्य
👶 प्रारंभिक जीवन
थिरुथानी स्वामीनाथन ने बहुत कम उम्र में ही भक्ति संगीत और शास्त्रीय भजनों का प्रशिक्षण शुरू किया। उन्होंने खास तौर पर धर्मपुरम (Dharmapuram) आदीनम और Thevaram पाठशाला से शास्त्रीय तरीके से शिक्षा प्राप्त की और जीवन भर Thevaram और अन्य भक्ति गीतों का गायन किया।
📜 व्यावसायिक जीवन
लगभग 60 वर्ष तक उन्होंने शैविक भजन / Thevaram गायन में सेवा की।
उनका गायन न सिर्फ तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में बल्कि देशभर और विदेशों में भी सराहा गया है।
उन्होंने 50+ रिकॉर्डिंग्स / आल्बम्स जारी किए और कई पीढ़ियों के ओथुवर (भजनकार) को प्रशिक्षित किया।
स्वामीनाथन को Kalaimamani, Thirumurai Kalanidhi जैसे तमिल संगीत एवं संस्कृति के प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
📍 लेखकीय और सांस्कृतिक महत्व
माना जाता है कि उनकी आवाज़ और भक्ति संगीत की शैली ने तमिल भक्ति साहित्य—विशेषकर Thevaram की पारंपरिक धुन, समय और भावनात्मक गहराई को संभाला और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया।
धर्मपुरम आदीनम के प्रतिष्ठित गुरुजनों ने उनकी उपलब्धियों और सेवाओं पर गर्व व्यक्त किया है और इसे तमिल भक्ति साहित्य के प्रति राष्ट्रीय सम्मान के रूप में देखा है।
🪔 उनका संदेश और प्रेरणा
स्वामीनाथन का मानना है कि परंपरागत भक्ति संगीत केवल कला नहीं बल्कि जीवन का अनुभव है, जो आध्यात्मिक उर्जा, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक साझा स्मृति का संगम है।
उनकी यह जर्नी न सिर्फ कला के प्रति समर्पण है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक संगीत की जीवंत परंपरा के संरक्षण का उदाहरण रही है।
📌 संक्षेप
✔️ छह दशक से अधिक Thevaram, भजन और शैविक संगीत में योगदान
✔️ 50+ रिकॉर्डिंग्स, प्रशिक्षण कार्य
✔️ Kalaimamani एवं अन्य मान्यताएँ
✔️ Padma Shri 2026 से सम्मानित

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