SARLA MAHESHWARI
📰 सरला माहेश्वरी कौन थीं?
सरला माहेश्वरी भारत की वरिष्ठ और प्रसिद्ध दूरदर्शन (Doordarshan) न्यूज एंकर थीं, जिन्हें 1970–80 एवं 90 के दशक में राष्ट्रीय टेलीविजन पर विश्वसनीय और सम्मानित समाचार वाचिका के रूप में जाना जाता था।
📌 जन्म और प्रारंभिक जीवन:
उनका जन्म 21 जुलाई 1954 को राजस्थान के बीकानेर में हुआ था और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातक, परास्नातक तथा Ph.D. की पढ़ाई की।
🎙️ करियर और उपलब्धियाँ
📺 दूरदर्शन में शुरुआत:
सारला माहेश्वरी ने अपना करियर 1976 में दूरदर्शन में एनाउंसर के रूप में शुरू किया जब वे Ph.D. कर रही थीं। जाँच के बाद उन्हें समाचार वाचन के लिए चुना गया और उन्होंने टीवी पर समाचार पढ़ना शुरू किया।
📊 प्रेसेंटर के रूप में पहचान:
उनकी मधुर आवाज़, सटीक उच्चारण, संतुलित प्रस्तुति और गरिमामय व्यक्तित्व ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय और भरोसेमंद बना दिया।
🌍 बीबीसी में अनुभव:
1984 में उन्होंने कुछ समय के लिए यूके में BBC के साथ भी न्यूज़ रीडर के रूप में काम किया और बाद में 1988 में भारत लौटकर दुबारा दूरदर्शन में शामिल हो गईं
📺 समय की बदलाव:
उन्होंने अपने करियर के दौरान भारतीय टेलीविजन समाचार के उस दौर को देखा जब प्रसारण ब्लैक-एंड-व्हाइट से कलर टीवी में बदल रहा था और दूरदर्शन एकमात्र राष्ट्रीय समाचार स्रोत था।
🧑🏫 शिक्षा क्षेत्र:
सारला माहेश्वरी के पास दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में लेक्चरर के रूप में कार्य करने का भी अनुभव था। इस कॉलेज से बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान जैसे छात्र भी जुड़े रहे हैं।
🕊️ निधन और श्रद्धांजलि
🗓️ 12 फरवरी 2026 को सरला माहेश्वरी का नया दिल्ली में निधन हो गया। वे 71 वर्ष की थीं। उनके निधन की जानकारी दूरदर्शन और उनके पूर्व सहकर्मियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की।
📌 दूरदर्शन ने उन्हें “मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति” के लिए याद करते हुए दिल से श्रद्धांजलि दी।
📌 उनके साथी और प्रसिद्ध एंकर शम्मी नारंग ने उनकी भाषा विशेषज्ञता, विनम्रता और व्यक्तित्व की सराहना की।
सरला माहेश्वरी ने तीन दशकों से अधिक समाचार प्रसारण में काम किया और भारतीय टेलीविजन की एक विश्वसनीय आवाज़ के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनका जीवन मीडिया जगत में गरिमा, संतुलन और भाषा की शुद्धता का प्रतीक रहा है। उनके कार्य ने उस दौर की टीवी पत्रकारिता को एक विश्वास और सम्मान की भावना दी, जिसे आज भी याद किया जाता है।
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