PADMSRI THIRUVARUR BAKTHAVATHSALAM
पद्मश्री पुरस्कार विजेता Thiruvarur Bakthavathsalam
🌟 परिचय — थिरुवरूर बक्तवत्सलम
Thiruvarur Bakthavathsalam एक internationally प्रसिद्ध भारतीय मृदंगम वादक (mridangam percussion maestro) हैं, जिन्हें संगीत-कला के क्षेत्र में दीर्घकालिक योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है।
🎻 जन्म और शुरुआती जीवन
बक्तवत्सलम का जन्म 25 नवंबर 1956 को तमिलनाडु के थिरुवरूर में हुआ था।
वे एक पारंपरिक संगीत परिवार से आते हैं और 9 वर्ष की आयु से ही अपने परिवार के साथ संगीत में जुड़े थे।
उन्होंने अपनी शुरुआती संगीत साधना माँ से और मृदंगम सीखना मातृ परिवार के चाचा (गुरु) से शुरू किया।
🎶 मृदंगम करियर और उपलब्धियाँ
✅ संगीत यात्रा
बक्तवात्सलम ने 60 से अधिक वर्षों तक मृदंगम बजाया और भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।
वे तीन पीढ़ियों के कलाकारों के साथ प्रदर्शन कर चुके हैं — पुराने महान कलाकारों से लेकर आज के उभरते संगीतकारों तक।
1992 में उन्होंने बार्सिलोना ओलंपिक समारोह में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।
🎼 “Laya Madhuraa” और शैक्षणिक काम
उन्होंने Laya Madhuraa School of Music की स्थापना की, जो मृदंगम और ताल की शिक्षा को वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाता है।
इस संस्था के माध्यम से उन्होंने बहुत से युवा कलाकारों को सीखाया और विश्व भर में भारतीय ताल की परंपरा को बढ़ाया।
🏆 पुरस्कार और सम्मान
✨ मुख्य सम्मान
पद्मश्री 2026 — भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान, संगीत-कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए।
🎖️ पहले से मिले प्रमुख सम्मान
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (Sangeet Natak Akademi Award) – 2006
कलाईमामी (Kalaimamani) – तमिलनाडु सरकार से
संगीत कलानिधि (Sangeetha Kalanidhi) Award – 2021
कई अन्य जीवन-उपलब्धि (Lifetime Achievement) पुरस्कार भी प्राप्त।
📣 2026 के ताज़ा अपडेट
✔ पद्मश्री मिलने पर बक्तवात्सलम ने कहा कि यह सम्मान उनके जीवन के 60 वर्ष से अधिक के संगीत समर्पण का परिणाम है।
✔ उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें यह सम्मान बार-बार आवेदन के बाद मिला, और यह उनके कड़े परिश्रम व दृढ़ इच्छा का प्रतीक है।
✔ केंद्रीय नेताओं ने भी उनके योगदान की सराहना की है और कहा कि यह भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
🎤 प्रेरणा और संगीत-दर्शन
बक्तवात्सलम कहते हैं कि संगीत सिर्फ कला नहीं, बल्कि जीवन की लय (Layam) और आत्मा की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने हमेशा धार्मिक, सांस्कृतिक और शास्त्रीय संगीत परंपरा को बचाने और आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया है।

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