PADMSRI RATILAL BORISAGAR
Ratilal Borisagar
🏅 पद्म श्री 2026 सम्मान
रतीलाल मोहनलाल बोरीसागर को पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया गया है — यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
उन्हें यह सम्मान साहित्य (हास्य, निबंध, साहित्यिक संपादन) के क्षेत्र में उनके दीर्घ और महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है।
पद्म श्री की घोषणा 26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस पुरस्कारों की सूची में की गई।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने इस चयन को गुजरात के लिए गौरव का विषय बताया है।
📖 रतीलाल बोरीसागर — जीवन परिचय (बायोग्राफी)
👶 जन्म और प्रारंभिक जीवन
रतीलाल बोरीसागर का जन्म 31 अगस्त 1938 को सावरकुंडला, अमरेली जिला, गुजरात, भारत में हुआ।
🎓 शिक्षा और करियर
उन्होंने 1989 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
कुछ समय तक उन्होंने शिक्षक के रूप में भी काम किया और बाद में गुजरात राज्य पाठ्य-पुस्तक बोर्ड के साथ कार्य किया।
उन्होंने 1998 में सेवानिवृत्ति ली।
✍️ साहित्यिक जीवन और योगदान
📚 लेखन शैली
रतीलाल बोरीसागर प्रख्यात गुजराती हास्यकार, निबंधकार और संपादक हैं।
उनका लेखन हास्य, व्यंग्य और समाज-समीक्षा से भरपूर है, जो पाठकों को न सिर्फ हँसाता है बल्कि सोचने पर भी मजबूर करता है।
📘 प्रमुख रचनाएँ
उन्होंने कुल 17 पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें 6 पुस्तकें बच्चों के लिए भी शामिल हैं।
उनके कुछ उल्लेखनीय कार्यों में हास्य और निबंध संग्रह शामिल हैं।
🧑🏫 साहित्यिक योगदान
बोरीसागर ने अपनी लेखनी से गुजराती साहित्य में हास्य विधा को मजबूत किया है और नई पीढ़ी के लेखकों के लिए प्रेरणा स्रोत बने।
वे संपादक और शोधकर्ता भी रहे, जिन्होंने साहित्य के अध्ययन-विश्लेषण में योगदान दिया।
🎖️ पुरस्कृत और सम्मान
पद्म श्री 2026 — भारत सरकार द्वारा साहित्य के लिए सम्मानित सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
✨ प्रेरणादायक तथ्य:
रतीलाल बोरीसागर की लेखनी ने हास्य और व्यंग्य को सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि समाज की विविध समस्याओं और मानवीय अनुभवों को सरल और रोचक भाषा में प्रस्तुत किया — इसी लिए उन्हें पद्म श्री जैसे उच्च सम्मान से नवाज़ा गया।

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