PADMSRI RABILAL TUDU
पद्मश्री रबीलाल टुडू
रबीलाल टुडू (Rabilal Tudu) एक प्रतिष्ठित भारतीय संताली भाषा के लेखक, नाटककार और बैंकिंग पेशेवर हैं, जिन्हें 2026 में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान (भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है।
🎂 प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
रबीलाल टुडू का जन्म 21 दिसंबर 1949 को पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के नवारा गाँव में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम रामेसोर टुडू और भासनी टुडू था। उन्होंने अपनी शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति, साहित्य और सामाजिक कार्यों में रुचि ली।
📚 साहित्यिक योगदान
रबीलाल टुडू संताली भाषा के प्रमुख साहित्यकार हैं। उन्होंने संताली नाटकों और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी रचनाएँ स्थानीय संस्कृति, जीवन शैली और सामाजिक मुद्दों को दर्शाती हैं। उनके नाटकों को मंच और रेडियो दोनों माध्यमों पर सराहा गया है।
🏆 पुरस्कार और सम्मान
रबीलाल टुडू को पहले 2015 में साहित्य में उनके नाटक “पारसी खतिड़” के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो भारतीय साहित्य का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है। �
साल 2026 में उन्हें पद्मश्री सम्मान दिया गया, जिससे न सिर्फ संताली भाषा को पहचान मिली, बल्कि यह आदिवासी साहित्य को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने का अवसर बना।
✍️ सामाजिक और शैक्षिक योगदान
रबीलाल टुडू का कार्य केवल लेखन तक सीमित नहीं रहा है। वे संताली भाषा और संस्कृति की शिक्षा और संरक्षण के लिए भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने युवा लेखकों और विद्यार्थियों को प्रेरित किया है कि वे अपनी मातृभाषा में अध्ययन और लेखन को जारी रखें, ताकि भाषा को आधुनिक संदर्भों में भी जीवित रखा जा सके।
🌐 प्रभाव और विरासत
रबीलाल टुडू का जीवन और कार्य आदिवासी साहित्यिक परंपरा के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनके प्रयासों ने संताली भाषा के प्रति सम्मान और संरक्षण को बढ़ावा दिया है। पद्मश्री सम्मान उन्हें एक राष्ट्रीय पहचान देने के साथ-साथ भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक धरोहर को भी उजागर करता है।
रबीलाल टुडू आज भी भारतीय साहित्य की समृद्ध परंपरा के एक जीवंत स्तंभ के रूप में माने जाते हैं, जिनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है।

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