PADMSRI SHRIRANG DEVABA LAD
Shrirang Devaba Lad
📌 पद्म श्री पुरस्कृत – श्रीरंग देवबा लाड (Shrirang Devaba Lad) – जीवनी और नवीन जानकारी
🧑🌾 परिचय
श्रीरंग देवबा लाड महाराष्ट्र के परभणी जिले के एक प्रगतिशील किसान, कृषि नवाचारक और कृषक नेता हैं। उन्हें 2026 में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्म श्री (चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से सम्मानित किया गया है।
🏡 शुरुआती जीवन और पृष्ठभूमि
लाड का जन्म किसान परिवार में हुआ और उन्होंने खेती को ही जीवनयापन तथा सेवा का मार्ग बनाया।
वे परभणी (जिंतूर तालुका), महाराष्ट्र के माळसोन्ना गाँव से ताल्लुक रखते हैं।
खेती और कृषि समस्याओं से जुड़ी चुनौतियों को समझते हुए उन्होंने अपने खेतों में निरंतर प्रयोग और नवाचार किए।
🌱 कृषि में योगदान और शोध
🌾 कपास में प्रगतिशील तकनीक
लाड ने कपास की खेती में “दादा लाड तकनीक” विकसित की — यह एक वैज्ञानिक-संचालित खेती पद्धति है जिसमें शामिल हैं:
✔ शेंडा खुडणी (कपास की शाखाओं की छंटाई)
✔ अत्यधिक घनत्व वाली बुवाई
✔ ठिबक सिंचन (ड्रिप इरिगेशन)
✔ मल्चिंग और प्रबंधन तकनीकें
इन तकनीकों के परिणामस्वरूप कपास की उपज में लगभग 300% तक वृद्धि हुई और किसानों की आय में 40% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
🚜 कृषि ज्ञान का प्रसार
लाड ने अपने द्वारा विकसित उन्नत खेती तकनीकों को केवल अपने खेतों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गाँव-गाँव जाकर किसानों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया।
उनके कार्य से हजारों छोटे और मध्यम किसानों को सकारात्मक लाभ और समृद्धि मिली, खासकर उन इलाकों में जहां खेती संकट में थी।
📌 समाजिक भूमिका
लाड लंबे समय से भारतीय किसान संघ (Bharatiya Kisan Sangh) के सक्रिय सदस्य रहे हैं और इस संगठन के माध्यम से किसानों के लिए जागरूकता और समर्थन का कार्य करते हैं।
वे किसानों के हितों और कृषि के नवीनीकरण के लिए लगातार काम करते रहे हैं।
🏆 पद्म श्री सम्मान – 2026
📅 25–26 जनवरी 2026 को भारत सरकार ने श्रीरंग देवबा लाड को पद्म श्री से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें कृषि अनुसंधान, उत्पादन वृद्धि और सतत् खेती के लिए उनके सर्विस-ओरिएंटेड योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
लाड ने कहा कि यह सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि आज के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, ताकि वे भी उन्नत तकनीकों को अपनाकर खेती में सुधार कर सकके
श्रीरंग देवबा लाड एक अनुभवी किसान और कृषि नवाचारक हैं, जिनका जन्म और जीवन महाराष्ट्र के परभणी जिले के एक किसान परिवार में हुआ। उन्होंने कपास की खेती के लिए वैज्ञानिक-आधारित तकनीक विकसित की जिसने उत्पादन का स्तर और किसानों की आय दोनों को बढ़ाया। उनके इन प्रयासों के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया।

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