PADMSRI MIR HAJIBHAI KASAMBHAI
मीर हाजीभाई कासंभाई (Mir Hajibhai Kasambhai) —
🌟 परिचय
नाम: मीर हाजीभाई कासंभाई
निक नाम: हाजी रामकडू (Haji Ramakdu)
क्षेत्र: लोक संगीत (ढोलक वादन)
पद्मश्री सम्मान: पद्मश्री 2026 — कला के क्षेत्र में
मूल स्थान: जूनागढ़, गुजरात, भारत
👉 भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर इसे मिला।
🪘 कलाकार के रूप में करियर
✔️ मीर हाजीभाई कासंभाई एक नामी ढोलक वादक हैं, जिन्होंने लगभग 6 दशक से भी अधिक समय तक भारतीय लोक-संगीत में अपना योगदान दिया है। �\
✔️ वे ढोलक वादन में माहिर हैं और भजन, संतवाणी, ग़ज़ल और कव्वाली जैसे संगीत रूपों में भी अपनी कला प्रस्तुत कर चुके हैं।
✔️ उनके मंचीय और संगीत-कार्यक्रमों की संख्या हज़ारों में है — उन्होंने 3,000 से अधिक कार्यक्रमों और 1,000+ स्टेज शोज में प्रदर्शन किया है।
✔️ वे न केवल भारत भर में, बल्कि विदेशों में भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं, जिससे गुजरात और भारतीय लोक-संगीत की पहचान और प्रसिद्धि बढ़ी।
🌟 पद्मश्री 2026:
भारत सरकार ने मीर हाजीभाई कासंभाई को कला क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
✔️ उन्होंने इस सम्मान को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए धन्यवाद दिया।
✔️ वे 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं और इतने लंबे समय तक संगीत-सेवा देने के कारण लोक-संगीत के “उदासीहीन” कलाकार माने जाते हैं।
🙌 सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान
🎼 संगीत के माध्यम से समुदाय सेवा:
मीर हाजीभाई ने अपने ढोलक वादन को भक्ति-संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और गायों तथा गौशालाओं के लिए चैरिटी शो में समर्पित किया है।
उन्होंने कला से सामाजिक संदेश और भाई-चारे का संदेश भी दिया है।
💡 सार में
🎖️ मीर हाजीभाई कासंभाई एक प्रेरणादायक लोक कलाकार हैं जिन्होंने ढोलक कला को एक नई पहचान दी और भारतीय सांस्कृतिक संगीत को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँचाया।
✨ पद्मश्री-2026 सम्मान उनके समर्पण और उत्कृष्ट योगदान की मिसाल है।

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