PADMSRI SANGYSANG S PONGENER

 

Sangyusang S Pongener 
🎖️ पद्मश्री सम्मान 2026 — संक्षेप
नाम: संग्युसांग एस. पोंगेनर
सम्मान: पद्मश्री 2026 (भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान)
क्षेत्र: कला (Folk art / लोक कला)
कारण: Ao नागा लोक कला और सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण, प्रचार और शिक्षा में जीवन भर योगदान के लिए मान्यता। 
🧑‍🎨 जीवन परिचय
📌 प्रारंभिक जीवन
संग्युसांग का जन्म 1945 में नागालैंड के मोकोकचुंग जिले के उंगमा गांव में हुआ था। 
वे आओ (Ao) नागा समुदाय से हैं, जो अपने समृद्ध लोक संगीत, नृत्य और कथाओं के लिए प्रसिद्ध है। 
👨‍👩‍👧‍👦 पारिवारिक जीवन
वे अपने माता-पिता चुटिसांग और केडिमेनला के सबसे बड़े बेटे हैं और परिवार में कुल आठ भाई-बहन हैं।
संग्युसांग के पास पाँच संतान और आठ पोते-पोतियाँ हैं। 
🎭 कला, संस्कृति और योगदान
🎶 लोक कला में रुझान
उन्होंने लगभग 60 वर्ष से अधिक समय तक Ao नागा लोक गीतों, नृत्यों, कथाओं और परंपराओं का अध्ययन, संरक्षण और प्रचार किया है। 
युवाओं को पारंपरिक कलाओं की शिक्षा और प्रशिक्षण देने के लिए उन्होंने कई मंचों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन किया है। 
📚 संरक्षित धरोहर
संग्युसांग ने लगभग 60 लोकगीतों/गीतों की रचना की है, जिनमें परंपरागत धुनें, कथात्मक गीत और सांस्कृतिक प्रदर्शन शामिल हैं।
कुछ गीतों को Ao में 10 अलग-अलग गाने/तानों में गाना उनकी विशिष्ट क्षमता है।
👨‍🏫 गुरु और प्रेरक
उन्होंने कई युवा कलाकारों को प्रशिक्षित किया है, जिनमें से कुछ राष्ट्रीय समारोहों (जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस) पर प्रदर्शन कर चुके हैं। 
उनका मानना है कि समय सीमित है और बुजुर्ग कलाकार जल्दी ही बाहर हो जाएंगे, इसलिए कला को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना बेहद जरूरी है। 
🏆 प्रमुख उपलब्धियाँ और सम्मान
यह हैं संग्युसांग के जीवन-कर्म की कुछ विशेष उपलब्धियाँ:
🎖️ पद्मश्री पुरस्कार 2026 — Ao नागा लोक कला में जीवन-पर्यंत योगदान के लिए। 
🏅 संगीत नाटक अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार (Sangeet Natak Akademi Award) — 2002
🎓 “गुरु” की उपाधि — NEZCC और IGNOU द्वारा प्रदान।
🏆 गवर्नर का पुरस्कार (गवर्नर’स अवॉर्ड), नागालैंड सरकार — 2017
🎗️ कई अन्य सांस्कृतिक और सेवा-सम्मान। 
✔️ जनवरी 2026 में पद्मश्री सम्मान की घोषणा के साथ संग्युसांग का नाम भारतभर के “अनसंग हीरोज” (Unsung Heroes) में शामिल किया गया — उन लोगों के बीच जो बिना सुर्खियों के भी देश-भर में लोक-कलाओं, परंपराओं और सामाजिक विरासत की सुरक्षा के लिए जीवन समर्पित करते हैं। 
✔️ यह सम्मान नागालैंड और पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है, क्योंकि यह परंपरागत लोक कलाओं को राष्ट्रीय पहचान देकर उनके संरक्षण और प्रसार में एक बड़ा प्रोत्साहन देता है। 
🧠 सारांश
संग्युसांग एस. पोंगेनर:
Ao लोक कला और सांस्कृतिक धरोहर के महान शिक्षक, संरक्षक और कलाकार हैं। 
उन्होंने दशकों तक पारंपरिक गीतों, नृत्यों और कथाओं को संरक्षित किया और उन्हें युवाओं तक पहुँचाया। 
वर्ष 2026 में पद्मश्री जैसी राष्ट्रीय मान्यता उनके समर्पण का उच्चतम सम्मान है। 

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