PADMSRI TAGA RAM BHEEL

 

पद्मश्री तगा राम भील 
तगा राम भील राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार और अल्गोजा वादक हैं, जिन्हें भारत सरकार ने वर्ष 2026 में पद्मश्री पुरस्कार ‘अनसंग हीरोज’ श्रेणी में सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जा रहा है। 
🌟 प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
तगा राम भील जैसलमेर (राजस्थान) के मूलसागर नामक स्थान से हैं और वे भील समुदाय से आते हैं, जो राजस्थान की एक प्रमुख आदिवासी जाति है। बचपन से ही उन्हें संगीत और लोक वाद्ययंत्रों में गहरी दिलचस्पी थी। उन्होंने पारंपरिक अल्गोजा यंत्र सीखना अपने पिता से शुरू किया, जब वे मात्र 8–10 वर्ष के थे। 
🎶 कला और करियर
अल्गोजा एक पारंपरिक भारतीय बाँस का हवाई बांसुरी जैसा वाद्य यंत्र है, जिसमें दो फ्लूट एक साथ बजते हैं। तगा राम भील ने इसे अपनी कला का मुख्य माध्यम बनाया और पिछले 30 से अधिक वर्षों से इस पारंपरिक लोक वादन को जीवित रखा है। 
उन्होंने राजस्थान के प्रसिद्ध डेजर्ट फेस्टिवल, ऑल इंडिया रेडियो, नेहरू युवा केन्द्र जैसे मंचों पर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रदर्शन किया है। इनके कला प्रदर्शन में थार के रेगिस्तान की सांस्कृतिक धरोहर दिखाई देती है। 
🌍 अंतरराष्ट्रीय पहचान
तगा राम भील ने फ्रांस, अमेरिका, जापान, रूस, सिंगापुर, अफ्रीका सहित कई देशों में राजस्थान की लोक कला और अल्गोजा वादन की प्रस्तुति दी है। उनके कार्यक्रमों और कार्यशालाओं ने भारत के पारंपरिक संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है। 
🏆 पुरस्कार और सम्मान
2026 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार उन अद्वितीय कलाकारों को दिया जाता है जिन्होंने अपने जीवन समर्पण से कला की परंपरा को संजोया और आगे बढ़ाया है। 
👏 योगदान और प्रभाव
तगा राम भील की जीवन यात्रा संघर्ष और समर्पण की मिसाल है — सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने राजस्थान और भारत के पारंपरिक संगीत को बचाया है। उनकी उपलब्धियाँ युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं और लोक कला के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई हैं। 

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