PADMSRI PADAMA GURMET
📌 डॉ. पद्मा गुरमेट — संक्षिप्त परिचय (Biography)
🏆 नाम और सम्मान
डॉ. Padma Gurmet को **भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 में पद्म श्री (Padma Shri) सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। उन्हें चिकित्सा (Medicine) के क्षेत्र में यह सम्मान मिला है।
📍 परिचय और मूल पहचान
डॉ. Padma Gurmet लद्दाख (Ladakh) के रहने वाले हैं और सॉवा रिज्पा (Sowa Rigpa) प्रणाली के प्रमुख अनुयायी और विद्वान हैं।
Sowa Rigpa एक प्राचीन हिमालयी चिकित्सा प्रणाली है जिसे “अमची” चिकित्सा भी कहा जाता है और यह तिब्बती-भारतीय शास्त्रीय चिकित्सा पर आधारित है।
🎓 शिक्षा और करियर
उनका जन्म पारंपरिक Sowa Rigpa परिवार में हुआ था, जहाँ उनके पिता भी एक अमची (अमची चिकित्सक) थे।
उन्होंने बचपन से ही अपने पिता से Sowa Rigpa सीखना प्रारंभ किया और आगे जाकर औपचारिक शिक्षा के साथ इसे आगे बढ़ाया।
बाद में वे National Institute of Sowa-Rigpa (NISR), Leh के Director (निदेशक) बने — जो Ministry of Ayush के अंतर्गत एक प्रमुख शिक्षा-अनुसंधान संस्थान है।
उन्होंने Sowa Rigpa को औपचारिक मान्यता दिलाने तथा संस्थागत रूप से विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
📚 योगदान और कार्य
Dr. Gurmet ने Sowa Rigpa चिकित्सा पर शोध, दस्तावेजीकरण, और शिक्षा-प्रशिक्षण गतिविधियों का नेतृत्व किया है।
उनके नेतृत्व में National Institute of Sowa-Rigpa ने पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित और आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करने के प्रयास किए हैं।
Sowa Rigpa के अंतर्गत वे बहुत से चिकित्सीय फॉर्मूलों, औषधियों और पारंपरिक ज्ञान को शोध-आधारित रूप में संरक्षित और दस्तावेजीकरण कर रहे हैं।
🧠 विशेष योगदान
लद्दाख जैसे कठिन (हिमालयी) क्षेत्र में, जहाँ आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ सीमित हैं, वहाँ Sowa Rigpa ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
Dr. Gurmet ने इस पारंपरिक प्रणाली को सरकारी स्वास्थ्य नीतियों में शामिल करने और स्वीकृति दिलाने के साथ-साथ युवाओं को भी इस ज्ञान को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
⚡ 2026 में Padma Shri सम्मान — भारत सरकार ने Dr. Padma Gurmet को Padma Shri 2026 के लिए चुना, ताकि उनके Sowa Rigpa चिकित्सा के संरक्षण, विकास और शिक्षा में दी गई सेवा को सम्मानित किया जा सके।
✨ डॉ. Padma Gurmet क्यों खास हैं?
वे हिमालयी परंपरागत चिकित्सा के सबसे बड़े संरक्षकों में से एक हैं।
उन्होंने Sowa Rigpa को केवल पारंपरिक ज्ञान के रूप में नहीं बल्कि वैज्ञानिक और शिक्षा-अनुसंधान स्तर पर मान्यता दिलाई है।
उनके नेतृत्व से अनेक चिकित्सा कार्यक्रम और शोध जारी हैं जो स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में इस ज्ञान को बढ़ावा देते हैं।

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