AFGANISTAN PARLIAMENT

 अफगानिस्तान संसद 

अफगानिस्तान की संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था रही है, जिसे नेशनल असेंबली कहा जाता था। यह संसद दो सदनों से मिलकर बनी थी—वोलसी जिरगा (निम्न सदन) और मेश्रानो जिरगा (उच्च सदन)। वोलसी जिरगा के सदस्य जनता द्वारा चुने जाते थे, जबकि मेश्रानो जिरगा में राष्ट्रपति द्वारा नामित तथा प्रांतीय परिषदों के प्रतिनिधि शामिल होते थे। यह व्यवस्था अफगान संविधान के अंतर्गत स्थापित की गई थी।

अफगान संसद का भवन काबुल में स्थित था और इसका निर्माण भारत सरकार की सहायता से किया गया था। इस भव्य भवन का उद्घाटन वर्ष 2015 में किया गया। यह परियोजना भारत–अफगान मित्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन का प्रतीक मानी जाती थी। संसद भवन की वास्तुकला में अफगान परंपरा और आधुनिक डिजाइन का सुंदर समन्वय देखने को मिलता था।

अफगान संसद का मुख्य कार्य कानून बनाना, सरकार की नीतियों पर चर्चा करना और कार्यपालिका पर निगरानी रखना था। इसके माध्यम से जनता की आवाज़ शासन तक पहुँचती थी। महिलाओं को भी संसद में प्रतिनिधित्व दिया गया था, जो अफगान समाज में लोकतांत्रिक प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत था।

हालाँकि वर्ष 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन के बाद संसद की कार्यप्रणाली स्थगित हो गई। तालिबान शासन के आने के बाद लोकतांत्रिक संस्थाएँ, जिनमें संसद भी शामिल थी, प्रभावी रूप से निष्क्रिय हो गईं। वर्तमान समय में अफगानिस्तान में संसद सक्रिय रूप से कार्यरत नहीं है।

इसके बावजूद अफगान संसद का ऐतिहासिक महत्व बना हुआ है। यह संस्था अफगान जनता के लोकतांत्रिक प्रयासों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भारत–अफगान संबंधों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रही है। संसद भवन आज भी अफगानिस्तान के राजनीतिक इतिहास में लोकतंत्र की आकांक्षाओं और संघर्षों की याद दिलाता है।

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