AGA KHAN PALACE PUNE

 आगा ख़ान पैलेस (पुणे) 

आगा ख़ान पैलेस महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। इसका निर्माण वर्ष 1892 में आगा ख़ान तृतीय, सुल्तान मोहम्मद शाह आगा ख़ान द्वारा कराया गया था। यह भव्य महल मुख्य रूप से 1891–92 के अकाल के समय स्थानीय लोगों को रोज़गार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया था। स्थापत्य की दृष्टि से यह महल इतालवी शैली से प्रभावित है और अपनी विशालता, सुंदर मेहराबों तथा खुले प्रांगण के लिए प्रसिद्ध है।

आगा ख़ान पैलेस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वर्ष 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी, महादेव देसाई और सरोजिनी नायडू को ब्रिटिश सरकार ने यहीं नजरबंद रखा था। इसी अवधि में कस्तूरबा गांधी और महादेव देसाई का निधन इसी परिसर में हुआ, जिससे यह स्थल राष्ट्र के लिए एक पवित्र स्मारक बन गया। उनकी समाधियाँ आज भी परिसर में स्थित हैं।

महल के भीतर महात्मा गांधी से जुड़ी अनेक दुर्लभ वस्तुएँ, जैसे उनके पत्र, तस्वीरें, उपयोग की वस्तुएँ और ऐतिहासिक दस्तावेज़ सुरक्षित रखे गए हैं। यह स्थान अब गांधी राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किया गया है और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

आगा ख़ान पैलेस चारों ओर से हरे-भरे बाग़-बगीचों से घिरा हुआ है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं। शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि प्रेरणा और स्मृति का केंद्र भी है। पुणे आने वाले हर व्यक्ति के लिए आगा ख़ान पैलेस भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम को समझने का एक महत्वपूर्ण स्थान है।

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