MUTUAL LEGAL ASSISTANCE TREATY
पारस्परिक विधिक सहायता संधि (Mutual Legal Assistance Treaty – MLAT)
पारस्परिक विधिक सहायता संधि, जिसे अंग्रेज़ी में म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) कहा जाता है, दो या अधिक देशों के बीच किया गया एक औपचारिक समझौता होता है। इसका उद्देश्य आपराधिक मामलों में एक-दूसरे को कानूनी सहायता प्रदान करना है। जब किसी अपराध से जुड़े साक्ष्य, गवाह, दस्तावेज़ या आरोपी किसी दूसरे देश में हों, तब MLAT के माध्यम से संबंधित देश सहयोग करते हैं।
MLAT का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। आज के वैश्विक युग में आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर अपराध, मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी और आर्थिक अपराध जैसे मामलों की सीमाएँ देशों तक सीमित नहीं रहतीं। ऐसे में MLAT कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सीमा-पार सहयोग का कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
इस संधि के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की सहायता दी जाती है, जैसे अपराध से संबंधित जानकारी और साक्ष्य एकत्र करना, दस्तावेज़ों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराना, गवाहों के बयान दर्ज करना, संपत्ति की पहचान और जब्ती में सहयोग करना तथा अभियुक्तों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही में मदद करना। हालांकि, प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) आमतौर पर अलग संधि के अंतर्गत आता है, फिर भी MLAT कई मामलों में उसकी प्रक्रिया को सहायक बनाता है।
भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, यूएई सहित कई देशों के साथ MLAT पर हस्ताक्षर किए हैं। इन संधियों के माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय अपराधों की जांच में प्रभावी भूमिका निभाता है। हालांकि MLAT प्रक्रिया को अक्सर समय लेने वाली माना जाता है, क्योंकि इसमें कूटनीतिक और कानूनी औपचारिकताएँ शामिल होती हैं।
इस प्रकार पारस्परिक विधिक सहायता संधि अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह देशों के बीच विश्वास, सहयोग और न्याय सुनिश्चित करने में सहायक होती है तथा वैश्विक अपराधों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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