TOSHAKHANA

 तोशाखाना 

तोशाखाना एक विशेष सरकारी भंडार गृह होता है, जहाँ देश के राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों और उच्च पदस्थ अधिकारियों को प्राप्त उपहारों को सुरक्षित रखा जाता है। भारत में तोशाखाना केंद्र सरकार और राज्यों के स्तर पर स्थापित है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को मिले उपहारों में पारदर्शिता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि वे व्यक्तिगत संपत्ति न बन जाएँ।

भारत में तोशाखाना प्रणाली औपनिवेशिक काल से चली आ रही है। स्वतंत्रता के बाद भी इसे नियमों और अधिनियमों के अंतर्गत व्यवस्थित किया गया। जब किसी मंत्री, सांसद, अधिकारी या संवैधानिक पदाधिकारी को विदेश यात्रा, राजनयिक मुलाकात या आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान कोई उपहार मिलता है, तो उसे निर्धारित मूल्य सीमा के अनुसार तोशाखाना में जमा कराना अनिवार्य होता है। यदि उपहार का मूल्य तय सीमा से अधिक हो, तो उसे सरकारी संपत्ति माना जाता है।

तोशाखाना में जमा वस्तुओं में आभूषण, घड़ियाँ, कलाकृतियाँ, शॉल, सजावटी वस्तुएँ और अन्य मूल्यवान सामान शामिल हो सकते हैं। इन सभी वस्तुओं का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाता है, जिसमें उपहार का विवरण, अनुमानित मूल्य और प्राप्तकर्ता का नाम दर्ज होता है। कुछ मामलों में संबंधित व्यक्ति को निर्धारित शुल्क देकर उपहार खरीदने की अनुमति भी दी जाती है।

हाल के वर्षों में तोशाखाना पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा में रहा है। जनता और मीडिया की मांग रही है कि तोशाखाना से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि सरकारी कार्यप्रणाली में विश्वास बना रहे। इसी दिशा में सरकार द्वारा नियमों को और स्पष्ट तथा सख्त बनाया गया है।

इस प्रकार तोशाखाना केवल उपहारों का भंडार नहीं, बल्कि नैतिक शासन और प्रशासनिक पारदर्शिता का प्रतीक है। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक पद का दुरुपयोग न हो और राज्य की संपत्ति का उचित संरक्षण किया जा सके।

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