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Showing posts from 2026

PARSLEY

पार्सले (Parsley) एक हरी पत्तेदार सुगंधित जड़ी-बूटी है, जिसका वैज्ञानिक नाम पेट्रोसेलिनम क्रिस्पम (Petroselinum crispum) है। यह मुख्य रूप से भूमध्यसागरीय क्षेत्र में उत्पन्न हुई, लेकिन आज पूरे विश्व में इसका उपयोग किया जाता है। पार्सले का प्रयोग भोजन में स्वाद बढ़ाने, सजावट करने और औषधीय गुणों के लिए किया जाता है। पार्सले के दो प्रमुख प्रकार होते हैं – कर्ली पार्सले और फ्लैट-लीफ पार्सले। कर्ली पार्सले की पत्तियाँ घुंघराली होती हैं और इसे अक्सर व्यंजनों की सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। फ्लैट-लीफ पार्सले की पत्तियाँ सीधी होती हैं और इसका स्वाद अधिक तीखा व सुगंधित होता है, इसलिए इसे पकवानों में मिलाया जाता है। पार्सले पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन A, C और K प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में सहायक होता है। पार्सले पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, हड्डियों को स्वस्थ रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इसमें आयरन और फोलेट भी पाया जाता है, जो रक्त के लिए लाभकारी होते हैं। रसोई में पार्सले का उपय...

CHAURAGARH MAHADEV TEMPLE

चौरागढ़ महादेव मंदिर मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में स्थित एक प्रसिद्ध और पवित्र तीर्थस्थल है। यह मंदिर सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला की ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है और समुद्र तल से लगभग 1,300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। चौरागढ़ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1,300 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यह यात्रा थोड़ी कठिन जरूर होती है, लेकिन रास्ते में प्राकृतिक सौंदर्य और हरियाली मन को प्रसन्न कर देती है। ऊपर पहुँचकर चारों ओर फैले पहाड़ों और घाटियों का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। यही कारण है कि यह स्थान धार्मिक होने के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चौरागढ़ महादेव मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में छोटे-बड़े त्रिशूल दिखाई देते हैं, जो भक्तों की आस्था का प्रतीक हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। इस दिन का वातावरण अत्यंत भक्तिमय और उत्सा...

BAMCEF

बामसेफ (BAMCEF – ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटीज कम्युनिटीज एम्प्लॉइज फेडरेशन) भारत का एक प्रमुख सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना 6 दिसंबर 1978 को कांशीराम ने की थी। बामसेफ का उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षित कर्मचारियों को संगठित कर सामाजिक न्याय, समानता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करना था। यह संगठन “पे-बैक टू सोसाइटी” की अवधारणा पर आधारित है, जिसके अनुसार समाज से लाभ पाने वाले शिक्षित वर्ग का दायित्व है कि वे अपने समाज के उत्थान के लिए कार्य करें। बामसेफ का मुख्य कार्यक्षेत्र सामाजिक चेतना का निर्माण, वैचारिक प्रशिक्षण, संगठनात्मक मजबूती और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना है। यह संगठन राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक वैचारिक और सामाजिक मंच है, जिसने आगे चलकर डीएस-4 और बहुजन समाज पार्टी जैसे आंदोलनों के लिए वैचारिक आधार तैयार किया। बामसेफ का मानना है कि जब तक वंचित वर्गों में शिक्षा, संगठन और संघर्ष की भावना विकसित नहीं होगी, तब तक सामाजिक बदलाव संभव नहीं है। यह संगठन देशभर में सेमिनार, अध्ययन शिविर, गोष्ठियाँ और ...

VAIBHAV SURYAVANSHI

⭐ वैभव सूर्यवंशी — एक युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी एक भारतीय क्रिकेटर हैं, जो अब लगभग 14 वर्ष के हैं और क्रिकेट में रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन के लिए दुनिया भर में चर्चित हैं।  📌 प्रारंभिक जीवन और परिचय वैभव का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ माना जाता है, और वे बिहार से हैं।  उन्होंने बहुत कम उम्र में ही क्रिकेट में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी।  🏏 करियर की शुरुआत और रिकॉर्ड 🔸 घरेलू करियर उन्होंने 12 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी (फर्स्ट-क्लास) में बिहार के लिए पदार्पण किया, यह भारत में क्रिकेट का सबसे कम उम्र का रिकॉर्ड है।  इसके बाद लिस्ट-ए क्रिकेट में भी 13 साल की उम्र में प्रदर्शन किया।  🔸 IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) नवंबर 2024 में राजस्थान रॉयल्स ने वैभव को ₹1.1 करोड़ में खरीदा, वह IPL में सबसे युवा खिलाड़ी बन गए।  19 अप्रैल 2025 को उन्होंने IPL में डेब्यू किया और अपने पहले ही मैच में छक्का लगाया।  28 अप्रैल 2025 को उन्होंने 35 गेंदों में शतक लगाया, जो IPL में सबसे तेज भारतीय शतक है और वह सबसे युवा शतकवीर भी बने।  🏆 अंतरराष्ट्रीय और यू-19 प्रदर...

KARERI LAKE

करैरी झील हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित एक सुंदर और प्रसिद्ध पर्वतीय झील है। यह झील धौलाधार पर्वत श्रृंखला की गोद में लगभग 2,934 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थान पर्यटकों और ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। करैरी झील का पानी अत्यंत स्वच्छ और पारदर्शी है। इसमें आसपास के पहाड़ों और आकाश का प्रतिबिंब साफ दिखाई देता है, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देता है। यह झील मुख्य रूप से बर्फ के पिघलने से बनती है, इसलिए इसका पानी ठंडा और निर्मल रहता है। सर्दियों में यह झील पूरी तरह बर्फ से ढक जाती है, जिससे इसका दृश्य और भी मनमोहक हो जाता है। करैरी झील तक पहुँचने के लिए करैरी गाँव से लगभग 13 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है। यह ट्रेक हरे-भरे जंगलों, छोटे-छोटे झरनों और पत्थरीले रास्तों से होकर गुजरता है। रास्ते में प्रकृति के सुंदर दृश्य देखने को मिलते हैं, जो यात्रा को रोमांचक बना देते हैं। झील के पास एक छोटा सा शिव मंदिर भी स्थित है, जिसे स्थानीय लोग पवित्र मानते हैं। कई श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। करैरी झील प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और साहस...

DR LAXMAN YADAV

📌 डॉ. लक्ष्मण यादव — परिचय डॉ. लक्ष्मण यादव एक भारतीय शिक्षाविद्, लेखक और सार्वजनिक बहसों में सक्रिय विचारक हैं। वे मुख्य रूप से शिक्षा, सामाजिक न्याय, आरक्षण और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर अपने विचारों के लिए जाने जाते हैं।  🎓 शिक्षा और पेशा लक्ष्मण यादव लंबे समय तक दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के जाकिर हुसैन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर (एड-हॉक) के रूप में पढ़ाते रहे।  वे हिंदी भाषा और उच्च शिक्षा के मुद्दों पर शिक्षण और शोध से जुड़े रहे हैं।  📘 ‘प्रोफेसर की डायरी’ (Professor Ki Diary) उन्होंने अपनी किताब “Professor Ki Diary” लिखी है, जिसमें उन्होंने भारतीय उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालय प्रणाली, भेदभाव और प्रशासनिक चुनौतियों का अनुभव साझा किया है।  यह किताब चर्चित रही है और इसे बेस्ट-सेलर माना गया है। ⚖️ नौकरी और विवाद लगभग 14 वर्षों तक पढ़ाने के बाद उन्हें अचानक दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने पद से हटा दिया — इसे लेकर उन्होंने भेदभाव और सिस्टम की कमियों पर सवाल उठाए हैं।  इस निर्णय के बाद वे सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर शिक्षा नीति, ...

CHAMBYALI DHAM

चंब्याली धाम हिमाचल प्रदेश के चंबा क्षेत्र की एक प्रसिद्ध पारंपरिक दावत है। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति और अतिथि सत्कार की पहचान है। चंब्याली धाम विशेष रूप से विवाह, त्योहारों, धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य शुभ अवसरों पर आयोजित की जाती है। इसमें परोसे जाने वाले व्यंजन शुद्ध शाकाहारी होते हैं और इन्हें पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है। चंब्याली धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने का कार्य विशेष रसोइये, जिन्हें “बोटिया” कहा जाता है, करते हैं। वे पीढ़ियों से इस कला को सीखते और आगे बढ़ाते आए हैं। भोजन आमतौर पर पत्तल (पत्तों से बनी थाली) में परोसा जाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश मिलता है। इस धाम में चावल मुख्य भोजन होता है। इसके साथ राजमा मद्रा, कढ़ी, माश दाल, चना मद्रा, मीठा चावल और घी से बने अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इन व्यंजनों में देशी मसालों और दही का विशेष प्रयोग होता है, जिससे स्वाद अनोखा और पौष्टिक बनता है। भोजन परोसने का भी एक निश्चित क्रम होता है, जिसे परंपरा के अनुसार निभाया जाता है। चंब्याली धाम केवल स्वाद के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, ...

PADMSRI MAGANTI MURALI MOHAN

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    Maganti Murali Mohan (मैगंती मुराली मोहन) 🌟 परिचय – Maganti Murali Mohan पूरा नाम: Maganti Raja Ram Mohan Roy (मैगंती राजा राम मोहन रॉय) लोकप्रिय नाम: Maganti Murali Mohan (मैगंती मुराली मोहन) जन्म: 24 जून 1940 जन्मस्थान: चटापरू (Chataparru), हैदराबाद-तेलंगाना, भारत प्रमुख पहचान: तेलुगु फिल्म अभिनेता, अभिनेता-निर्माता, राजनीतिज्ञ, व्यवसायी एवं филanthropist सम्मान: पद्मश्री 2026 (कला में) 🇮🇳 — भारत सरकार का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान  मुराली मोहन ने 60-साल से भी अधिक समय में लगभग 350 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय किया है, जिनमें उन्होंने मुख्य, चरित्र और विविध भूमिकाएँ निभाईं।  🟡 निर्माता के रूप में: 1980 में अपने भाई के साथ उन्होंने Jayabheri Arts नाम से एक फ़िल्म निर्माण कंपनी शुरू की। इस कंपनी ने लगभग 25 फ़िल्में निर्मित कीं, जिनमें उनकी अपनी फ़िल्म “Vaarala Abbay” भी शामिल है।  🔹 राजनीतिक सफ़र: 2014 में मुराली मोहन ने राजाहमुंद्रि लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर भारत की संसद के 16वें सत्र के सांसद के रूप में सेवा की। इससे पहले 2009 में उन्होंने उसी सीट स...

PADMSRI PREM LAL GAUTAM

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   डॉ. पद्मश्री प्रेम लाल गौतम (Prem Lal Gautam)  📌 परिचय नाम: डॉ. प्रेम लाल गौतम जन्म: 12 दिसंबर 1947 जन्मस्थान: बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश, भारत पद्मश्री सम्मान: वर्ष 2026 में पद्मश्री (विज्ञान और इंजीनियरिंग/कृषि विज्ञान) से सम्मानित वर्तमान पद: चांसलर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पुसा, बिहार  🎓 शिक्षा और पेशा ✔️ डॉ. गौतम ने एग्रीकल्चर में ग्रेजुएशन हिमाचल कृषि महाविद्यालय, सोलन से किया। ✔️ उन्होंने एम.एससी. और पीएच.डी. (जनितिकी/Genetics) में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली से हासिल की। ✔️ वे एक प्रमुख कृषि वैज्ञानिक, प्लांट ब्रीडर और शोधकर्ता हैं, जिन्होंने भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में दशकों तक कार्य किया।  🌾 करियर और योगदान डॉ. प्रेम लाल गौतम ने भारतीय कृषि अनुसंधान में बड़ी भूमिका निभाई है, जिनमें शामिल हैं: 🧬 कृषि अनुसंधान और पादप जनितिकी ✔️ नई और उन्नत फसल किस्मों (उच्च उपज, रोग-प्रतिरोधी और विविध जलवायु उपयुक्त) के विकास में योगदान। ✔️ देश के पहले जर्मप्लाज्म रजिस्ट्रेशन सिस्टम की स्थापना में ने...

PADMSRI HARMANPREET KAUR BHULLAR

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  हरमनप्रीत कौर भुल्लर (Harmanpreet Kaur Bhullar)  🏏 हरमनप्रीत कौर — संक्षिप्त परिचय पूरा नाम: हरमनप्रीत कौर भुल्लर जन्म: 8 मार्च 1989 जन्मस्थान: मोगा, पंजाब, भारत भूमिका: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान, मध्यक्रम/ओपनिंग बल्लेबाज़ और दाएँ हाथ की ऑफ़ स्पिनर गेंदबाज़  हरमनप्रीत को विश्व स्तरीय महिला क्रिकेटर माना जाता है और उन्होंने कई ऐतिहासिक सफलताएँ भारतीय टीम के लिए हासिल की हैं।  🌟 करियर की मुख्य उपलब्धियाँ 🏆 वर्ल्ड कप जीत 2025 ICC महिला वनडे वर्ल्ड कप: हरमनप्रीत कौर ने भारत को पहली बार वर्ल्ड कप चैम्पियन बनाया। उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका के खिलाफ फाइनल में 52 रन से जीत दिलाई, और उनके नेतृत्व को पूरे देश में सराहा गया।  इस जीत के साथ वे सबसे उम्रदराज़ कप्तान बनकर विश्व कप जीतने वाली कप्तानों में शामिल हुईं।  🏅 कप्तानी रिकॉर्ड भारतीय महिला टीम के साथ कई ऐतिहासिक जीत (जैसे इंग्लैंड के खिलाफ WT20I सीरीज़ जीत, टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया पर जीत) दर्ज कराईं।  🏆 WPL (वुमेन्स प्रीमियर लीग) मुंबई इंडियंस की कप्तान के रूप में दो बार WPL ट्रॉफी जीती — वह पहली...

ERITREA

इरिट्रिया (Eritrea) अफ्रीका महाद्वीप के पूर्वी भाग में स्थित एक देश है। यह लाल सागर के तट पर बसा हुआ है। इसके उत्तर और पश्चिम में सूडान, दक्षिण में इथियोपिया और दक्षिण-पूर्व में जिबूती स्थित हैं। इरिट्रिया की राजधानी अस्मारा है, जो अपनी सुंदर वास्तुकला और स्वच्छ सड़कों के लिए प्रसिद्ध है। इरिट्रिया पहले इटली का उपनिवेश था। बाद में यह इथियोपिया के साथ जुड़ गया, लेकिन लंबे संघर्ष के बाद 1993 में यह एक स्वतंत्र देश बना। स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए इरिट्रिया ने लगभग 30 वर्षों तक संघर्ष किया। इस कारण देश के इतिहास में संघर्ष और बलिदान का महत्वपूर्ण स्थान है। इरिट्रिया की आधिकारिक भाषाएँ तिग्रिन्या, अरबी और अंग्रेज़ी हैं। यहाँ विभिन्न जातीय समूह रहते हैं, जिनकी अपनी-अपनी भाषाएँ और परंपराएँ हैं। देश की संस्कृति में अफ्रीकी और अरब प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यहाँ के लोग पारंपरिक नृत्य, संगीत और त्योहारों को बड़े उत्साह से मनाते हैं। इरिट्रिया की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, पशुपालन और खनिज संसाधनों पर आधारित है। यहाँ सोना, तांबा और जस्ता जैसे खनिज पाए जाते हैं। लाल सागर के किनारे होने...

SIDDU

सिड्डू हिमाचल प्रदेश का एक प्रसिद्ध और पारंपरिक व्यंजन है। यह खासकर शिमला, कुल्लू, मनाली और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है। सिड्डू मुख्य रूप से गेहूं के आटे से बनाया जाता है और इसे भाप में पकाया जाता है। ठंडे मौसम में यह व्यंजन शरीर को गर्माहट और ऊर्जा प्रदान करता है, इसलिए सर्दियों में इसे विशेष रूप से पसंद किया जाता है। सिड्डू बनाने के लिए पहले गेहूं के आटे में खमीर डालकर उसे कुछ घंटों के लिए ढककर रखा जाता है, ताकि आटा फूल जाए। इसके बाद इसमें अखरोट, खसखस, तिल, या दाल की पेस्ट जैसी भरावन भरी जाती है। फिर इसे गोल आकार देकर भाप में पकाया जाता है। पकने के बाद इसे घी के साथ परोसा जाता है। कई जगहों पर इसे हरी चटनी या दाल के साथ भी खाया जाता है। सिड्डू न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि पौष्टिक भी होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती है, जो शरीर को ताकत देते हैं। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग कठिन परिश्रम करते हैं, इसलिए सिड्डू उनके लिए ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। यह व्यंजन हिमाचल की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर इसे घर...

TARA DEVI TEMPLE

तारा देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पास स्थित एक प्रसिद्ध और पवित्र धार्मिक स्थल है। यह मंदिर शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग पर, लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। समुद्र तल से लगभग 1850 मीटर की ऊँचाई पर बसे इस मंदिर से चारों ओर के सुंदर पहाड़ों और घने देवदार के जंगलों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। तारा देवी मंदिर का निर्माण लगभग 250 वर्ष पहले सेन वंश के राजाओं द्वारा कराया गया था। कहा जाता है कि राजा ने देवी तारा के सपने में दर्शन पाए, जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर में स्थापित देवी तारा की प्रतिमा बहुत प्राचीन और आकर्षक है। देवी तारा को शक्ति और करुणा की देवी माना जाता है, और श्रद्धालु यहां आकर अपने सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं। यह मंदिर लकड़ी और पत्थर की पारंपरिक पहाड़ी शैली में बना हुआ है। इसकी वास्तुकला बहुत सुंदर और सरल है, जो हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। तारा देवी मंदिर न केवल धा...

LIDDER RIVER

लिद्दर नदी जम्मू और कश्मीर की एक सुंदर और महत्वपूर्ण नदी है। यह नदी अनंतनाग जिले में स्थित कोलहाई ग्लेशियर से निकलती है। लिद्दर नदी लगभग 73 किलोमीटर लंबी है और अंत में झेलम नदी में मिल जाती है। यह नदी पहलगाम की प्राकृतिक सुंदरता को और भी आकर्षक बनाती है। लिद्दर नदी का जल अत्यंत स्वच्छ और ठंडा होता है, क्योंकि इसका स्रोत हिमनद (ग्लेशियर) है। गर्मियों के मौसम में जब बर्फ पिघलती है, तब नदी में जल की मात्रा बढ़ जाती है। इसके किनारे हरे-भरे पेड़, घास के मैदान और ऊँचे-ऊँचे पर्वत दिखाई देते हैं, जो पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं। यह नदी पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। पहलगाम आने वाले पर्यटक लिद्दर नदी के किनारे घूमने, पिकनिक मनाने और फोटोग्राफी करने का आनंद लेते हैं। यहाँ रिवर राफ्टिंग और मछली पकड़ने जैसी गतिविधियाँ भी की जाती हैं। लिद्दर नदी ट्राउट मछली के लिए प्रसिद्ध है। लिद्दर नदी स्थानीय लोगों के जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका जल सिंचाई और दैनिक उपयोग के लिए काम आता है। साथ ही यह क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में सहायक है। अतः ल...

PASHMINA SHAWL

पश्मीना शॉल भारत की एक अत्यंत प्रसिद्ध और कीमती शॉल है, जो अपनी मुलायमता, गर्माहट और सुंदरता के लिए जानी जाती है। यह मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में बनाई जाती है। पश्मीना शब्द फारसी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है “ऊन”। यह शॉल खास प्रकार की बकरी, जिसे चांगथांगी या पश्मीना बकरी कहा जाता है, के महीन और मुलायम ऊन से तैयार की जाती है। पश्मीना ऊन लद्दाख के ऊँचे और ठंडे क्षेत्रों में पाई जाने वाली बकरियों से प्राप्त होता है। अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए इन बकरियों के शरीर पर बहुत महीन और गर्म ऊन उगता है। इसी ऊन को सावधानीपूर्वक इकट्ठा कर हाथों से धागा बनाया जाता है और फिर बुनाई की जाती है। पारंपरिक रूप से पश्मीना शॉल की बुनाई हाथ से की जाती है, जिससे इसकी गुणवत्ता और भी बेहतर होती है। पश्मीना शॉल हल्की होने के बावजूद बहुत गर्म होती है। इसे सर्दियों में ठंड से बचाव के लिए पहना जाता है। इसकी सुंदर कढ़ाई, खासकर कश्मीरी कढ़ाई, इसे और भी आकर्षक बनाती है। फूल-पत्तियों और पारंपरिक डिजाइनों से सजी पश्मीना शॉल देखने में बेहद सुंदर लगती है। पश्मीना शॉल केवल वस्त्र नहीं, बल्कि कश्मीर की कला और स...

KASOL

कसोल हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित एक सुंदर और प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह पार्वती घाटी में बसा हुआ है और समुद्र तल से लगभग 1,580 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। कसोल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और मनमोहक दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहाँ हर वर्ष देश-विदेश से अनेक पर्यटक घूमने आते हैं। कसोल के चारों ओर ऊँचे-ऊँचे पहाड़, हरे-भरे जंगल और बहती हुई पार्वती नदी इसकी सुंदरता को और भी बढ़ा देते हैं। नदी के किनारे बैठकर बहते पानी की मधुर ध्वनि सुनना मन को अत्यंत शांति प्रदान करता है। यहाँ का वातावरण स्वच्छ और ठंडा रहता है, विशेषकर गर्मियों में यह स्थान सैर-सपाटे के लिए बहुत उपयुक्त होता है। कसोल ट्रैकिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ से खीरगंगा, तोष और मलाणा जैसे प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थल पास में स्थित हैं। साहसिक गतिविधियों के शौकीन लोग यहाँ ट्रैकिंग और कैंपिंग का आनंद लेते हैं। इसके अलावा कसोल अपने कैफे और स्थानीय भोजन के लिए भी जाना जाता है। यहाँ विभिन्न प्रकार के व्यंजन उपलब्ध होते हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। कसोल को “मिनी इज़राइल” भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ इज़राइल से आ...

NARKANDA

नारकंडा हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में स्थित एक सुंदर और शांत पर्वतीय पर्यटन स्थल है। यह शिमला से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग–5 पर स्थित है। समुद्र तल से लगभग 2700 मीटर की ऊँचाई पर बसे नारकंडा का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ का वातावरण वर्ष भर ठंडा और सुहावना रहता है। नारकंडा विशेष रूप से बर्फबारी और स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है। सर्दियों के मौसम में जब यहाँ बर्फ की सफेद चादर बिछ जाती है, तब यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। स्कीइंग प्रेमियों के लिए यह एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ हिमाचल पर्यटन विभाग द्वारा स्कीइंग प्रशिक्षण भी दिया जाता है। नारकंडा से कुछ ही दूरी पर स्थित हाटू पीक (Hatu Peak) यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। यह शिमला जिले की सबसे ऊँची चोटी मानी जाती है। हाटू मंदिर, जो देवी काली को समर्पित है, श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। हाटू पीक से चारों ओर फैली हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है। नारकंडा सेब की खेती के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ के सेब पूरे देश में प्रसिद्ध हैं और स्थानीय लोगों की आजी...

TELHAR JHARNA

तेलहर झरना बिहार राज्य के कैमूर जिले में स्थित एक सुंदर और प्रसिद्ध जलप्रपात है। यह झरना कैमूर पहाड़ियों की गोद में बसा हुआ है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है। तेलहर झरना लगभग 80 फीट की ऊँचाई से गिरता है, जिससे इसका दृश्य अत्यंत मनोहारी और रोमांचक लगता है। वर्षा ऋतु में जब पानी की मात्रा बढ़ जाती है, तब यह झरना और भी भव्य रूप धारण कर लेता है। यह स्थान चारों ओर से हरे-भरे जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहाँ का शांत वातावरण और स्वच्छ हवा मन को शांति प्रदान करती है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है। छुट्टियों के समय यहाँ बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते हैं। तेलहर झरना केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आसपास के क्षेत्र में प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक स्थल भी स्थित हैं, जो इस स्थान की महत्ता को और बढ़ाते हैं। सरकार द्वारा यहाँ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं, जिससे यह स्थान और भी लोकप्रिय हो रहा है। ...

SURAJKUND MELA

सूरजकुंड मेला भारत का एक प्रसिद्ध हस्तशिल्प और सांस्कृतिक मेला है, जो हर वर्ष हरियाणा के फरीदाबाद जिले में आयोजित किया जाता है। यह मेला सूरजकुंड नामक ऐतिहासिक स्थल के पास लगता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1987 में हुई थी। इस मेले का उद्देश्य भारत की पारंपरिक कला, शिल्प और संस्कृति को बढ़ावा देना है। सूरजकुंड मेला आमतौर पर फरवरी महीने में लगभग पंद्रह दिनों तक चलता है। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों के कलाकार और शिल्पकार भाग लेते हैं। हर वर्ष किसी एक राज्य को “थीम स्टेट” बनाया जाता है, जिसकी संस्कृति, वेशभूषा, खान-पान और लोक कला को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाता है। इसके साथ ही कई विदेशी कलाकार भी इस मेले में भाग लेते हैं, जिससे यह एक अंतरराष्ट्रीय मेला बन गया है। मेले में हाथ से बने कपड़े, आभूषण, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की वस्तुएँ, पेंटिंग, कालीन, सजावटी सामान आदि की प्रदर्शनी और बिक्री होती है। यहाँ पर लोक नृत्य, लोक संगीत और नाटक जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाते हैं, जो दर्शकों का मन मोह लेते हैं। विभिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजन भी यहाँ उपलब्ध होते हैं। सूरजकुंड मेला न केवल ...

PADMSRI POKHILA LEKTHIPI

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   पद्मश्री पुरस्कार विजेता पोखिला लेक्तेपि (Pokhila Lekthepi)  🌟 पोखिला लेक्तेपि — संक्षिप्त परिचय (Biography in Hindi) नाम: पोखिला लेक्तेपि (Pokhila Lekthepi) उम्र: लगभग 72 वर्ष (2026 में) � पेशा: भारतीय लोक एवं करबी संगीत गायिका जन्म स्थान: डोकमौका, करबी अंगलॉन्ग जिला, असम � कार्य काल: 1964 से वर्तमान तक  🏆 प्रमुख उपलब्धियाँ और सम्मान 🇮🇳 Padma Shri 2026 सरकार ने 2026 में पोखिला लेक्तेपि को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह सम्मान कला (Art) के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए दिया गया है।  📜 अन्य सम्मान ✔️ Assam Gaurav Award (2024) – असम सरकार का उच्च नागरिक सम्मान � ✔️ Shilpi Award & Shilpi Pension (2023) – असम सरकार द्वारा कला क्षेत्र में योगदान के लिए � ✔️ Queen of Melody का खिताब (2011)  🎶 संगीत और करियर पोखिला लेक्तेपि ने 300 से अधिक गीत गाए हैं, जिनमें करबी लोकगीत और आधुनिक करबी संगीत शामिल हैं।  उन्होंने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली, पर अपने परिवार से सीखकर संगीत में अपन...

KACHNAAR

कचनार एक सुंदर और आकर्षक वृक्ष है, जो भारत के विभिन्न भागों में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम बौहिनिया वरिगेटा (Bauhinia Variegata) है। कचनार का वृक्ष मध्यम आकार का होता है और इसकी ऊँचाई लगभग 10 से 12 मीटर तक हो सकती है। इसकी पत्तियाँ हरे रंग की और ऊँट के खुर के आकार जैसी होती हैं, जो इसे अन्य पेड़ों से अलग पहचान देती हैं। कचनार के फूल बहुत सुंदर और रंग-बिरंगे होते हैं। ये गुलाबी, सफेद और बैंगनी रंग के होते हैं और बसंत ऋतु में खिलते हैं। जब कचनार के पेड़ पर फूल आते हैं, तो पूरा पेड़ रंगीन दिखाई देता है और वातावरण सुगंधित हो जाता है। इसके फूल देखने में ऑर्किड जैसे लगते हैं, इसलिए इसे "ऑर्किड ट्री" भी कहा जाता है। कचनार के फूल न केवल सुंदर होते हैं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं। कचनार का उपयोग आयुर्वेद में अनेक रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। इसकी छाल, फूल और पत्तियाँ औषधि के रूप में काम आती हैं। यह पाचन संबंधी समस्याओं, सूजन और त्वचा रोगों में लाभकारी माना जाता है। इसके फूलों की सब्जी भी बनाई जाती है, जो स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है। कचनार का वृक्ष धार्मिक और ...

INDO EU TRADE DEALS 2026

 भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement - FTA) एक ऐतिहासिक कदम है, जिसे दोनों पक्षों ने "मदर ऑफ ऑल डील्स" (सभी डीलों की माँ) कहा है। यह समझौता 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित किया गया, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मौजूद थे। मुख्य बातें (Key Highlights) कब शुरू हुआ और कितना बड़ा है? बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, जो 2013 में रुकी थी। 2022 में दोबारा शुरू हुई और अब 2026 में पूरी हुई। यह भारत और EU का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों (दुनिया की एक-तिहाई आबादी) को कवर करता है और वैश्विक GDP का 25% (करीब $27 ट्रिलियन) का बाजार बनाता है। टैरिफ (शुल्क) में कटौती EU भारत से आने वाले 99.5% सामान पर टैरिफ खत्म या बहुत कम करेगा (7 साल में ज्यादातर शून्य)। इससे भारत के टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, मरीन प्रोडक्ट्स, फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टरों को फायदा होगा। भारत EU से आने वाले 96.6%...

PADMSRI R V S MANI

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  डॉ. पद्मश्री आर.वी.एस. मणि (R.V.S. Mani) श्री रामास्वामी वेंकट सुब्रमण्यम मणि (R.V.S. Mani) एक पूर्व केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) अधिकारी हैं, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो सिविल सेवा (Civil Service) क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था वर्तमान स्थिति: रिटायर्ड हैं, लेखन और सार्वजनिक चर्चाओं में सक्रिय। 5 किताबें लिखीं, जो राजनीतिक हस्तक्षेप और आतंकवाद जांच पर आधारित हैं। जीवनी (संक्षिप्त परिचय) जन्म: दिल्ली में जन्मे (पूर्ण तिथि सार्वजनिक नहीं, लेकिन परिवार सरकारी सेवा से जुड़ा)। पिता के.आर. रामास्वामी भी MHA में थे और रिटायर हुए। शिक्षा: दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएट। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर से M.Sc. (Human Resource Development)। पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर की योग्यताएं। करियर: सेंट्रल सेक्रेटेरिएट सर्विस (CSS) में शामिल। मुख्य पद: Under Secretary, Internal Security Division, Ministry of Home Affairs (2006-2010)। योगदान: राष्ट्रीय सुरक्ष...

IPS KUNDAN KRISHNAN

 आईपीएस कुंदन कृष्णन की नवीनतम अपडेट्स और जीवनी (जनवरी 2026 तक) श्री कुंदन कृष्णन बिहार कैडर के एक वरिष्ठ और चर्चित आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें उनकी साहसी, कठोर और अपराध-विरोधी पुलिसिंग के लिए जाना जाता है। अपराधी उनके नाम से खौफ खाते हैं। जनवरी 2026 तक, वे बिहार पुलिस के डायरेक्टर जनरल (ऑपरेशंस), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के पद पर तैनात हैं, साथ ही स्पेशल ब्रांच का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। गैलेंट्री मेडल (वीरता पदक) 2026: गणतंत्र दिवस 2026 पर राष्ट्रपति द्वारा मेडल फॉर गैलेंट्री से सम्मानित। यह सम्मान 2002 में छपरा (सारण) जेल विद्रोह को कुचलने में उनकी भूमिका के लिए मिला, जहां उन्होंने AK-47 लेकर ऑपरेशन लीड किया था। STF में सक्रियता: 2025 में STF ने उनके नेतृत्व में 1682 अपराधियों (143 रिवॉर्डेड सहित) को गिरफ्तार किया, 6 अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराया (जिनमें 5 रिवॉर्डेड और 2 नक्सली शामिल)। अपराधी अब भाग रहे हैं या सरेंडर कर रहे हैं। अन्य: NVD2026 (नेशनल वोटर्स डे) में विशेष अवॉर्ड मिला। पहले किसानों से जुड़े विवादास्पद बयान पर माफी मांगी थी (जुलाई 2025)। जीवनी (संक्...

IAS PRIYANKA NIRANJAN

 आईएएस प्रियंका निरंजन  श्रीमती प्रियंका निरंजन एक प्रमुख भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं, जो उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की हैं। वे अपनी सख्त प्रशासनिक शैली, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और कानून व्यवस्था पर फोकस के लिए जानी जाती हैं। जनवरी 2026 तक, वे गोंडा जिले की जिलाधिकारी (District Magistrate and Collector) के पद पर तैनात हैं, जिसका चार्ज उन्होंने 28 जुलाई 2025 को ग्रहण किया था। यह उनका उत्तर प्रदेश में चौथा लगातार डीएम पद है (पहले जालौन, बस्ती और मिर्जापुर में कार्यरत रहीं)। नवीनतम अपडेट्स (2026) वर्तमान पद: गोंडा DM & Collector (जुलाई 2025 से जारी)। यहां वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों (घाघरा नदी से सटे इलाकों) का दौरा कर राहत कार्यों पर फोकस कर रही हैं, साथ ही ग्रामीण विकास और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में सक्रिय हैं। प्रशासनिक शैली: फील्ड इंस्पेक्शन और जन-भागीदारी पर जोर। पहले जिलों में नदियों के पुनरुद्धार जैसे कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली थी। कोई बड़ा बदलाव: 2026 में कोई नई ट्रांसफर या प्रमोशन की खबर नहीं। वे लगातार डिस्ट्रिक्ट लेवल पर ही त...

PADMSRI NARAYAN VYAS

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  डॉ. पद्मश्री नारायण व्यास (Dr. Narayan Vyas) डॉ. नारायण व्यास एक वरिष्ठ भारतीय पुरातत्वविद् (आर्कियोलॉजिस्ट) हैं, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो पुरातत्व (Archaeology) क्षेत्र में उनके जीवनभर के योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था, और मध्य प्रदेश के उज्जैन से चुने गए प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं। पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल। यह सम्मान उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) में 37+ वर्षों की सेवा, उत्खनन, शोध, एपिग्राफी (शिलालेख अध्ययन), इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के लिए मिला है। प्रतिक्रिया: डॉ. व्यास ने कहा, "यह सम्मान मेरी तपस्या का फल है... मैं अभी भी काम कर रहा हूं, जैसे भीमबेटका की गुफा चित्रों पर।" उन्होंने इसे देश की धरोहर और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला बताया। परिवार में जश्न का माहौल रहा, और उन्होंने गुरु डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को समर्पित किया। प्रशंसा: ...

PADMSRI MAMIDALA JAGDISH KUMAR

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  डॉ. पद्मश्री मामिडाला जगदीश कुमार (Prof. Mamidala Jagadesh Kumar) प्रोफेसर मामिडाला जगदीश कुमार एक प्रमुख भारतीय शिक्षाविद्, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और शिक्षा प्रशासक हैं। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो साहित्य एवं शिक्षा (Literature and Education) क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था। पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल। यह सम्मान उन्हें उच्च शिक्षा में सुधारों (जैसे CUET, NEP 2020 कार्यान्वयन, डिस्टेंस लर्निंग, UGC NET सुधार आदि), IIT दिल्ली में शिक्षण-शोध, JNU और UGC के नेतृत्व के लिए मिला है। वर्तमान स्थिति: अप्रैल 2025 में UGC चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त। अब वे मुख्य रूप से शोध और लेखन में सक्रिय हैं। कोई नया बड़ा पद नहीं संभाला है। जीवनी (संक्षिप्त परिचय) जन्म: 8 अप्रैल 1960, ममीडाला गांव, टिप्परथी मंडल, नलगोंडा जिला, तेलंगाना (वर्तमान आयु: 65-66 वर्ष)। परिवार: पिता एम. रंगा राव (...

PADMSRI LARS CHRISTIAN KOCH

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  डॉ. पद्मश्री लार्स-क्रिश्चियन कोच (Prof. Dr. Lars-Christian Koch) प्रोफेसर (डॉ.) लार्स-क्रिश्चियन कोच एक प्रसिद्ध जर्मन एथनोम्यूजिकोलॉजिस्ट (संगीतशास्त्री) हैं, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उन्हें कला (Arts) क्षेत्र में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति उनके गहन योगदान के लिए दिया गया है। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था। पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल। यह पुरस्कार उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत (खासकर उत्तर भारतीय राग संगीत) की थ्योरी और प्रैक्टिस, बौद्ध संगीत, रवींद्र संगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के निर्माण पर उनके दशकों के शोध के लिए मिला है। प्रशंसा और बधाई: भारतीय राजदूत अजित वी. गुप्ते (जर्मनी में) ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। भारतीय दूतावास और टैगोर सेंटर ने उनके भारत-जर्मनी सांस्कृतिक आदान-प्रदान में योगदान की सराहना की। वर्तमान पद: 2018 से वे हंबोल्ट फोरम (Humboldt Forum), बर्लिन में Staatliche...

PADMSRI PALKONDA VIJAY ANANDA REDDY

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  डॉ. पद्मश्री पलकोंडा विजय आनंद रेड्डी डॉ. पलकोंडा विजय आनंद रेड्डी (Dr. Palkonda Vijay Anand Reddy) एक प्रसिद्ध भारतीय ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) हैं, जिन्हें हाल ही में पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कैंसर के इलाज में उनके योगदान के लिए दिया गया है। यह खबर 25-26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस पर घोषित हुई थी, और यह तेलंगाना से चुने गए कई पद्मश्री प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं। पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा घोषित पद्म पुरस्कारों में डॉ. रेड्डी को मेडिसिन (ऑन्कोलॉजी) क्षेत्र में पद्मश्री दिया गया। उन्होंने इस सम्मान को विनम्रता से स्वीकार किया और कहा, "मैं इस सम्मान को बहुत विनम्रता से स्वीकार करता हूं। यह मेरे मरीजों, परिवार, शिक्षकों और अपोलो हॉस्पिटल्स को समर्पित है, जहां मैं पिछले तीन दशकों से गरीब बच्चों का मुफ्त इलाज कर रहा हूं।" पुरस्कार समर्पण: उन्होंने पुरस्कार को अपने मरीजों (खासकर बच्चों और गरीब परिवारों) को समर्पित किया। CURE फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने कैंसर पीड़ितों की ...

HARSHANKAR PARSAI

 हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य के सबसे प्रमुख व्यंग्यकारों में से एक थे, जिन्होंने व्यंग्य को मात्र हास्य-मनोरंजन से ऊपर उठाकर समाज की गहरी विसंगतियों, पाखंड, राजनीति और रूढ़िवाद पर तीखी लेकिन सटीक टिप्पणी करने वाली विधा बनाया। उनकी लेखनी सरल, बोलचाल वाली और आम आदमी की भाषा में थी, जो सीधे दिल तक उतरती थी। जीवन परिचय: हरिशंकर परसाई का जन्म 22 अगस्त 1924 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी (या जमानी) नामक छोटे से गाँव में हुआ था (इटारसी के निकट)। उनका परिवार साधारण ब्राह्मण परिवार था। पिता का नाम झुमकलाल परसाई और माता का नाम चंपा बाई था। बचपन में ही उन्होंने बड़े दुख झेले—1936-37 में प्लेग महामारी में माँ की मृत्यु हो गई, जब वे मात्र 13 साल के थे। कुछ समय बाद पिता भी लाइलाज बीमारी से चल बसे। चार छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने मैट्रिक के समय से ही नौकरी शुरू कर दी और पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। शुरुआत में उन्होंने विभिन्न नौकरियाँ कीं—18 साल की उम्र में जंगल विभाग में क्लर्क, फिर खंडवा के न्...

PADMSRI KALAMANDALAM VIMALA MENON

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  पद्मश्री कालामंडलम विमला मेनन (Kalamandalam Vimala Menon) 2026 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित की गई एक सुप्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना, अध्यापिका और मोहिनियट्टम (Mohiniyattam) की अग्रणी विदुषी हैं। उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान भारतीय शास्त्रीय नृत्य में उनकी लगभग ६३ वर्षों से भी अधिक समर्पित सेवा, शोध और शिक्षण के लिए दिया गया है।  विमला मेनन का जन्म 7 जनवरी 1943 को त्रिस्सूर (थ्रिस्सूर), केरल में हुआ था और उन्होंने केरल कलामंडलम (Kerala Kalamandalam) से मोहिनियट्टम और भरतनाट्यम की शिक्षा प्राप्त की। वे केरल नाट्य अकादमी, तिरुवनंतपुरम की संस्थापक और निदेशक भी हैं, जहाँ उन्होंने हजारों छात्रों को मोहिनियट्टम में प्रशिक्षित किया है और इस नृत्य-शैली को मजबूत पारंपरिक जड़ों से जोड़ते हुए उसे आधुनिक संदर्भ में भी जीवंत किया है।  विमला मेनन ने मोहिनियट्टम के पोशाक, मुद्रा और संगीत संयोजन में कई सुधार किये हैं, जिससे इस कला-रूप की प्रस्तुति और व्यापक जनता के बीच लोकप्रियता बढ़ी है। उनके विद्यार्थी पूरे देश में स्थापित कलाकार बने हैं और उन्होंने नृत्य के मंचों पर कई बार भ...

PADMSRI NURUDDIN AHAMED

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  पद्मश्री नूरुद्दीन अहमद (Nuruddin Ahmed) को 2026 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, और यह उन्हें कला, विशेषकर मूर्तिकला, थिएटर और स्टेज क्राफ्ट (मंचीय कला-निर्देशन) में उनके बहुआयामी और उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है। वे असम के मशहूर कलाकार, मूर्तिकार, थिएटर कलाकार और कला निर्देशक हैं, जिनके काम ने असम की मोबाइल थिएटर संस्कृति को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है और उनकी कला न केवल कला-प्रेमियों बल्कि स्थानीय समुदायों के बीच भी गहराई से लोकप्रिय रही है।  नूरुद्दीन अहमद का जन्म 17 जनवरी 1958 को असम के नलबाड़ी जिले के साथियाकुची गाँव में हुआ था, जहाँ से उन्होंने अपनी प्रारंभिक कला की राह शुरू की। उन्होंने जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्ट्स से औपचारिक कला-शिक्षा प्राप्त की और बाद में ललित कला अकादमी से आधुनिक मूर्तिकला तकनीकों का प्रशिक्षण लिया, साथ ही कठपुतली कला (puppetry) में भी विशेषज्ञता हासिल की।  अहमद ने दशकों से मूर्तिकला, कठपुतली, रंगमंचीय परिदृश्य-डिज़ाइन और स्टेज सेट-डिज़ाइन में काम किया है और उन्होंने असम की समृद्ध सांस्क...

PADMSRI MANGALA KAPOOR

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  पद्मश्री मंगला कपूर (Prof. Mangala Kapoor) एक प्रेरणादायक भारतीय शास्त्रीय संगीतकार, शिक्षिका और समाज-प्रेरक हैं, जिन्हें भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा है। यह चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों के लिए दिया गया है — सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर इसकी घोषणा की।  मंगला कपूर का जीवन संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। जब वे सिर्फ 12 वर्ष की उम्र की थीं, तभी उन पर तेज़ाब हमला (acid attack) हुआ, जिससे उनका चेहरा गंभीर रूप से विकृत हो गया और उन्हें कई साल अस्पताल में बिताने पड़े तथा 37 से अधिक शल्यक्रियाएँ (surgeries) करानी पड़ीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और संगीत को अपनी शक्ति और पहचान बनाया।  कपूर ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी तक की शिक्षा पूरी की और 1989 से 2019 तक वहीं संगीत विभाग में शिक्षक एवं एसोसिएट प्रोफ़ेसर के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने संगीत को केवल कला नहीं बल्कि समाज-सुधा...

PADMSRI KUMAR BOSE

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  पद्मश्री पंडित कुमार बोस (Pt Kumar Bose) 2026 के पद्मश्री सम्मान से सम्मानित एक प्रतिष्ठित भारतीय तबला वादक (Tabla Maestro) और भारतीय शास्त्रीय संगीत के संगीतकार हैं, जिन्हें भारतीय संस्कृति और संगीत-धरोहर के लिये उनके लम्बे, समर्पित और उत्कृष्ट योगदान के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है — सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर यह घोषणा की।  पंडित कुमार बोस का जन्म 4 अप्रैल 1953 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत में एक संगीत-परिवार में हुआ था, जहाँ उनके पिता बिस्वनाथ बोस स्वयं एक तबला वादक थे और उन्होंने ही सबसे पहले लय और ताल की शिक्षा दी। उनकी माँ विदुषी भारती बोस एक प्रख्यात सितार वादिनी थीं, जिन्होंने उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत के बुनियादी पहलुओं की समझ दी। उनके परिवार में संगीत ही जीवन-धारा थी, और इसी प्रेरणा-भरे माहौल ने उन्हें बचपन से ही तबला वादन में आगे बढ़ाया।  कुमार बोस ने मात्र चार वर्ष की आयु में अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन दिया और 14 साल की उम्र तक ही वे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी प्रस्तुति देने लगे। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के सबसे प्रतिष्ठि...

PADMSRI MADHAVAN RANGANATHAN

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  पद्मश्री मधवन रंगनाथन् (Madhavan Ranganathan) 2026 में पद्मश्री सम्मान पाने वाले एक प्रतिष्ठित भारतीय कलाकार, अभिनेता, पटकथा लेखक और फिल्म निर्माता हैं, जिन्हें भारतीय सिनेमा और संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला है। माधवन (पूरा नाम रंगनाथन् माधवन) का जन्म 1 जून 1970 को जमशेदपुर (अब झारखण्ड, भारत) में हुआ था और उन्होंने 1990 के दशक में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की, जिसके बाद वे तमिल, तेलुगु और हिन्दी फिल्म उद्योगों में अपनी विविध भूमिकाओं के लिये प्रसिद्ध हुए।  मधवन ने तेलुगु और तमिल फिल्मों में Alai Payuthey और Minnale जैसे फिल्मों से पहचान बनाई, और बाद में Rehnaa Hai Tere Dil Mein (2001) से हिन्दी फिल्मों में भी अपनी जगह बनाई। उनके करियर की कुछ सबसे यादगार भूमिकाओं में 3 Idiots, Vikram Vedha, Tanu Weds Manu सीरीज और Rocketry: The Nambi Effect जैसी फिल्मों में उनके प्रदर्शन शामिल हैं, जिनसे उन्होंने आलोचकों और दर्शकों दोनों की प्रशंसा जीती है।  माधवन ने अभिनय के अलावा पटकथा लेखन और निर्देशन में भी काम किया है और उन...

PADMSRI MAHENDRA KUMAR MISHRA

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  पद्मश्री महेंद्र कुमार मिश्रा (Mahendra Kumar Mishra) एक प्रतिष्ठित भाषा वैज्ञानिक, लोककथा शोधकर्ता और शिक्षाविद् हैं, जिन्हें भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है — यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उनके भाषा, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए दिया गया है।  मिश्रा का जन्म ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के सीनापाली क्षेत्र में हुआ था और उन्होंने अपनी लगभग चार दशक लंबी सेवा में ओडिशा की आदिवासी व क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और शिक्षा में योगदान किया। वे एक उत्कृष्ट लिंग्विस्ट (भाषाविद्) और फोल्कलोरिस्ट (लोककथा-शोधकर्ता) हैं, जिन्होंने कई जनजातीय समुदायों की मूल कथाएँ, मिथक, कहावतें और गीत दस्तावेज़ीकृत कर उन्हें पुस्तकों और शोध कार्यों के रूप में आम जनता तक पहुँचाया है, जिससे इन बोली-भाषाओं और संस्कृति को लिखित इतिहास में स्थान मिला।  उन्होंने मूल भाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा (Mother Tongue Based Multilingual Education) को अपनाने और स्कूल पाठ्यक्रम में आदिवासी भाषाओं को शामिल करने में अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे...

KALPETTA

कल्पेट्टा केरल राज्य के वायनाड जिले का एक सुंदर और शांत नगर है। यह वायनाड का जिला मुख्यालय भी है। पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के बीच बसा कल्पेट्टा प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और ठंडे मौसम के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का वातावरण साल भर सुहावना रहता है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। कल्पेट्टा के चारों ओर घने जंगल, चाय और कॉफी के बागान तथा ऊँची-नीची पहाड़ियाँ हैं। यहाँ की हरियाली और शुद्ध हवा मन को शांति प्रदान करती है। पास में स्थित पूकोड झील एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह झील पहाड़ियों से घिरी हुई है और यहाँ नौका विहार की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा, चेम्ब्रा पीक भी एक लोकप्रिय स्थान है, जहाँ से पूरे क्षेत्र का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। कल्पेट्टा का ऐतिहासिक महत्व भी है। एडक्कल गुफाएँ यहाँ के पास स्थित हैं, जिनमें प्राचीन चित्र और शिलालेख पाए गए हैं। ये गुफाएँ इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ कई प्राचीन मंदिर और चर्च भी हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। कल्पेट्टा की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है। यहाँ काली मिर्च...

PADMSRI MAHENDRA NATH ROY

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  पद्मश्री महेंद्र नाथ रॉय (Mahendra Nath Roy) एक प्रतिष्ठित केमिस्ट्री प्रोफेसर, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा 2026 के पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान के तहत उन्हें “Unsung and Unique Hero” यानी ऐसे अदृश्य और अनजान नायकों में शामिल किया गया, जिन्होंने बिना किसी शो-शोर के समाज और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।  महेंद्र नाथ रॉय खेतिहर परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है। पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद उन्होंने कहा कि यह “उनके खामोश कार्यों” को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने जैसा है, और यह सम्मान उन्होंने अपने माता-पिता, शिक्षकों और समाज को समर्पित किया।  वे एक प्रख्यात रसायन विज्ञान (Chemistry) प्रोफेसर रहे हैं और नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री के पूर्व डीन (Dean of Faculties of Sciences, Arts, Commerce & Law) के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा वे अलिपुरद्वार यूनिवर्सिटी (Alipurduar Univers...

PADMSRI KUMARSAMY THANGARAJ

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  डॉ. कुमारास्वामी थंगराज (Kumaraswamy Thangaraj) एक प्रसिद्ध भारतीय जीन वैज्ञानिक (Geneticist) और अणु-जीवविज्ञान (Molecular Biology) शोधकर्ता हैं, जिन्हें हाल ही में भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है, जो देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, उनके मानव जनसंख्या अनुवांशिकी और चिकित्सा जीनोमिक्स के क्षेत्र में लंबी और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए।  डॉ. थंगराज का जन्म 2 जून 1963 को चेय्यूर, कांचीपुरम ज़िला, तमिलनाडु में हुआ था और उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से अपने बी.एससी., एम.एससी और पीएच.डी. तक की पढ़ाई पूरी की। � वे हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं और उन्होंने मानव जनसंख्या अनुवांशिकी (Population Genetics) और मानव रोगों की जीन आधारित वजहों पर गहन शोध किया है।  उनके शोध में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष शामिल हैं कि भारतीय आबादी मुख्यतः दो मूलभूत पूर्वज समूहों — एनसीआई (Ancestral North Indians) और एएसआई (Ancestral South Indians) — से उत्पन्न हुई है और आंधमान के द्वीपों के आदिवासी समूह, जै...

HARI MADHAB MUKHOPADHYAY

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   पद्मश्री हरी माधब मुखोपाध्याय (Hari Madhab Mukhopadhyay) हरी माधब मुखोपाध्याय को पद्मश्री 2026 के लिए मरणोपरांत (Posthumous) सम्मान से नवाज़ा गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।  यह सम्मान राष्ट्रपति द्वारा भारत के गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किया गया था।  उनके परिवार (पत्नी रीना मुखोपाध्याय और बेटे कृष्णेंदु मुखोपाध्याय) को यह सम्मान प्राप्त करने पर गर्व और खुशी व्यक्त की गई।  🎭 जीवन परिचय (Biography in Hindi) 🧑‍🎨 प्रारंभिक जीवन पूरा नाम: हरी माधब मुखोपाध्याय जन्म: 3 अप्रैल 1941, बालुरघाट, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (अब पश्चिम बंगाल, भारत) में हुआ था।  वे पश्चिम बंगाल के बालुरघाट के हैं, जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा और प्रारंभिक थिएटर रुचि विकसित की। 🎭 थिएटर करियर और योगदान 🎬 थिएटर में योगदान हरी माधब मुखोपाध्याय एक प्रसिद्ध थिएटर कलाकार, नाटककार, निर्देशक और थिएटर आयोजक थे।  उन्होंने ट्रितिर्थ (Tritirtha) नामक थिएटर समूह की स्थापना की, जिसने कई यादगार नाटकों को मंच पर लाया।  उनके निर्देशन और अभिनय में करीब 58 से अधिक न...

PADMSRI K VIJAY KUMAR

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  डॉ. के. विजय कुमार (K Vijay Kumar) एक प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जिन्हें गणतंत्र दिवस 2026 पर पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। वे तमिलनाडु कैडर के 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और अपने दीर्घत्व अनुभव, असाधारण सेवा और चुनौतियों भरे अभियानों के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। सबसे प्रमुख रूप से, विजय कुमार को 2004 में चलाए गए ‘ऑपरेशन कोकून’ के लिए जाना जाता है — एक उच्च-सूत्रबद्ध विपुल अभियान जिसका नेतृत्व उन्होंने विशेष टास्क फ़ोर्स (STF) के रूप में किया था और इसी अभियान में प्रसिद्ध वनडाकू वीरप्पन को समाप्त किया गया था, जो दक्षिण भारत में दो दशक से अधिक समय तक सेना और पुलिस के लिए सबसे बड़े चैलेंजों में से एक था।  अपनी सेवा के दौरान विजय कुमार ने पुलिस और सुरक्षा बलों के भीतर कई प्रमुख पदों पर कार्य किया, जिनमें चेन्नई पुलिस आयुक्त, सीआरपीएफ (CRPF) के महानिदेशक (DG) और सदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद के निदेशक शामिल हैं। उनकी विशेषज्ञता मुख्यतः जंगल युद्ध, उग्रवाद-रोधी अभियानों और रणनीतिक सुरक्षा संचालन में रही, जिसने...

PADMSRI PRATEEK SHARMA

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  डॉ. प्रतीक शर्मा (Dr. Prateek Sharma) एक internationally मान्यता प्राप्त गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट (gastroenterologist) और चिकित्सा क्षेत्र के अग्रणी शोधकर्ता हैं जिन्हें भारत सरकार ने वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान से पुरस्कृत किया है। यह सम्मान उन्हें चिकित्सा (Medicine) के क्षेत्र में आधुनिक निदान, ऊन्नत एंडोस्कोपिक उपचार और वैश्विक स्तर पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों के प्रबंधन में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया है।  डॉ. शर्मा का जन्म चंडीगढ़, भारत में हुआ और उन्होंने एम.एस. यूनिवर्सिटी ऑफ़ बारोडा से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज ऑफ़ विस्कॉन्सिन, मिल्वौकी में आंतरिक चिकित्सा (Internal Medicine) का रेजिडेंसी प्रशिक्षण पूरा किया और यूनिवर्सिटी ऑफ़ एरिज़ोना, टुसॉन में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में विशेष विशेषज्ञता हासिल की। आज वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कानसास स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी फ़ेलोशिप प्रोग्राम के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।  डॉ. शर्मा की चिकित्सा यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू अंत: जीआई (GI) रोगों और कैंसर न...

PADMSRI K RAMASAMY

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  डॉ. के. रामासामी (Dr. K. Ramasamy) एक प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और समाजसेवी हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उन्हें कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में उनके असाधारण और दीर्घकालिक योगदान के लिए दिया गया, खासकर कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों के सशक्तिकरण के लिए।  डॉ. रामासामी तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU), कोयंबटूर के पूर्व कुलपति रहे हैं और उन्होंने कृषि शिक्षा को आधुनिक, व्यावहारिक और किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनके प्रयासों की वजह से कृषि शिक्षा में नवीन तकनीकों, बेहतर प्रशिक्षण और अनुसंधान-आधारित पद्धतियों को शामिल किया गया, जिससे छात्रों के साथ-साथ किसानों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिला।  उनका मानना है कि कृषि का विकास केवल वैज्ञानिक ज्ञान से ही नहीं बल्कि किसानों के साथ साझेदारी से संभव है, इसलिए उन्होंने किसानों के लिए नई योजनाएँ और कार्यक्रम विकसित किए। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों, विशेषकर विधवा महिलाओं को दुधारू पशु, मुर्गियाँ, भेड़...

PADMSRI KAILASH CHANDRA PANT

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  पद्मश्री कैलाश चंद्र पंत (Kailash Chandra Pant) एक प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार, पत्रकार, लेखक और शिक्षा-सेवी हैं जिन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है। वे मध्य प्रदेश के सागर ज़िले से संबंध रखते हैं और 1936 में इंदौर-महो के एक परिवार में पैदा हुए थे, जिनका मूल उत्तराखंड (बागेश्वर के खन्तोली गांव) से है। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार को अपना जीवन उद्देश्य बनाया, स्वतंत्र पत्रकारिता में प्रवेश किया और 22 साल तक साप्ताहिक ‘जनधर्म’ का सफल प्रकाशन किया, जिसने आधुनिक हिंदी पत्रकारिता को एक सामाजिक-सांस्कृतिक आवाज दी। इसके अलावा, उन्होंने ‘शिक्षा प्रदीप’, ‘दुरगामी आउटलुक’ और ‘अक्षरा’ जैसी पत्रिकाओं को प्रकाशित किया और स्वाध्याय विद्यापीठ की स्थापना कर शिक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। पंत जी ने आलोचनात्मक निबंधों और स्वतंत्र रचनाओं के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया और उन्हें पहले नेहरू साक्षरता पुरस्कार जैसी प्रतिष्ठित मान्यताएँ भी मिली हैं। पद्मश्री सम्मान पा...