PADMSRI NARAYAN VYAS

 

डॉ. पद्मश्री नारायण व्यास (Dr. Narayan Vyas)
डॉ. नारायण व्यास एक वरिष्ठ भारतीय पुरातत्वविद् (आर्कियोलॉजिस्ट) हैं, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो पुरातत्व (Archaeology) क्षेत्र में उनके जीवनभर के योगदान के लिए दिया गया। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था, और मध्य प्रदेश के उज्जैन से चुने गए प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं।

पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल। यह सम्मान उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) में 37+ वर्षों की सेवा, उत्खनन, शोध, एपिग्राफी (शिलालेख अध्ययन), इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के लिए मिला है।
प्रतिक्रिया: डॉ. व्यास ने कहा, "यह सम्मान मेरी तपस्या का फल है... मैं अभी भी काम कर रहा हूं, जैसे भीमबेटका की गुफा चित्रों पर।" उन्होंने इसे देश की धरोहर और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला बताया। परिवार में जश्न का माहौल रहा, और उन्होंने गुरु डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर को समर्पित किया।
प्रशंसा: मध्य प्रदेश सरकार, ASI, पुरातत्व समुदाय, BJP और अन्य संगठनों ने बधाई दी। उज्जैन और भोपाल में व्यापक चर्चा हुई। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सक्रिय हैं, किताबें लिख रहे हैं और युवा शोधकर्ताओं को प्रेरित कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति: उज्जैन (तिरुपति प्लेटिनम कॉलोनी) में रहते हैं। रिटायरमेंट के बाद भी पुरातत्व कार्य जारी, जैसे रॉक पेंटिंग्स पर शोध।
जीवनी (संक्षिप्त परिचय)
जन्म: 5 जनवरी 1949, उज्जैन, मध्य प्रदेश (वर्तमान आयु: 77 वर्ष)।
परिवार: पत्नी (पूर्व प्रिंसिपल, अब गृहिणी), एक बेटा (भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल), एक बेटी (डॉक्टर)। बड़े परिवार से हैं (6 भाई, 2 बहनें)। भतीजी पूर्वा व्यास (पुरातत्वविद्) ने पद्मश्री के लिए आवेदन भरा था।
शिक्षा और शुरुआत: फाइन आर्ट्स से शुरूआत, फिर पुरातत्व में शिफ्ट। पोस्ट-डॉक्टोरल (D.Litt.) भीमबेटका और रायसेन क्षेत्र की रॉक पेंटिंग्स पर। गुरु: प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर।
करियर:
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) में 37 वर्ष सेवा (1972-2009 तक)।
पद: सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट (रिटायर्ड)।
योगदान: मालवा क्षेत्र (मध्य प्रदेश) में कई उत्खनन, संरक्षण कार्य। भीमबेटका की प्रागैतिहासिक रॉक पेंटिंग्स की खोज और अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका। एपिग्राफी, इतिहास और धरोहर संरक्षण पर काम।
सेवानिवृत्ति के बाद: 10+ किताबें लिखीं, युवाओं को ट्रेनिंग दी, पुरातत्व को सुलभ बनाया।
उपलब्धियां: कई राष्ट्रीय पुरस्कार पहले मिले। पद्मश्री उनके अथक शोध और धरोहर संरक्षण की मान्यता है। वे कहते हैं, "पत्थरों और शिलाओं से सभ्यता की कहानी सुनते हैं।"
दर्शन: पुरातत्व को सिर्फ खुदाई नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान बचाने का माध्यम मानते हैं। रिटायरमेंट के बाद भी "काम नहीं छूटा" – अभी भी गुफा चित्रों पर काम कर रहे हैं।
डॉ. नारायण व्यास का जीवन पुरातत्व के प्रति समर्पण और सादगी का प्रतीक है। पद्मश्री जैसे सम्मान उनके दशकों के मौन कार्य की राष्ट्रीय पहचान हैं। उज्जैन और मध्य प्रदेश के लिए गौरव का क्षण!

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