PADMASHRI ASHOK KUMAR SINGH
पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह (Padma Shri Ashok Kumar Singh)
🇮🇳 पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह — संक्षिप्त परिचय
डॉ. अशोक कुमार सिंह एक महान कृषि वैज्ञानिक और प्लांट जीनिटिक्स (Plant Genetics) विशेषज्ञ हैं, जिन्हें भारतमित्र (Indian) कृषि अनुसंधान और विशेष रूप से बासमती चावल के विकास में असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है।
📌 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
डॉ. सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के बरहट गाँव में हुआ
वे एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जहाँ कृषि और खेती से उनका सीधा जुड़ाव बचपन से ही रहा।
अपनी शिक्षा उन्होंने कृषि विज्ञान में प्राप्त की —
स्नातक और परास्नातक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से,
फिर आईएआरआई (Indian Agricultural Research Institute), नई दिल्ली से प्लांट जीनिटिक्स में PhD की उपाधि हासिल की।
👨🔬 कैरियर और प्रमुख योगदान
🧬 बासमती चावल की क्रांति
डॉ. सिंह ने बासमती चावल के लिए 25 से अधिक विकसित किस्में (varieties) तैयार कीं, जिनमें:
Pusa Basmati 1509, 1692, 1718, 1728, 1847, 1885, 1886 जैसी किस्में शामिल हैं।
इन किस्मों में उच्च पैदावार, बेहतर अनाज गुणवत्ता, और रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसी विशेषताएँ हैं।
उन्होंने डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) के समर्थन में हरबिसाइड-प्रतिरोधी बासमती के विकास में भी प्रमुख भूमिका निभाई।
📈 कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
डॉ. सिंह की विकसित बासमती किस्में अब भारत के लगभग 2.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती हैं और लगभग 10 मिलियन टन चावल उत्पादन में योगदान करती हैं।
इससे लगभग ₹50,000 करोड़ (लगभग $6 अरब) की विदेशी मुद्रा आय होती है, जो भारत की कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उनके कार्यों से लाखों किसानों की आय और जीवन बेहतर हुआ है।
उनके पास पहले से कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी हैं, जिनमें शामिल हैं:
✔️ रफ़ी अहमद किदवई पुरस्कार
✔️ डॉ. सी. सुब्रमण्यम पुरस्कार
✔️ बोर्लॉग पुरस्कार
✔️ विभिन्न वैज्ञानिक और कृषि पुरस्कार आदि।
📍 पद्मश्री 2026 घोषणा में डॉ. सिंह का नाम कृषि क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए शामिल किया गया है।
📍 उनका योगदान बासमती की निर्यात क्षमता बढ़ाने और किसानों की आमदनी में सुधार करने पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित था। �

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