PADMSRI KHEMRAJ SUNDRIYAL

 

पद्मश्री सम्मानित खेमराज सुंदरियाल (Khemraj Sundriyal)
🇮🇳 खेमराज सुंदरियाल — जीवनी और नवीनतम जानकारी
👤 मूल परिचय
नाम: खेमराज सुंदरियाल (Khemraj Sundriyal)
उम्र: लगभग 83–84 वर्ष (जनवरी 2026)
मूल स्थान: सुमाड़ी गाँव, पौड़ी (गढ़वाल), उत्तराखंड, भारत 
🏆 पद्मश्री 2026 — सम्मान
उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री 2026 नागरिक सम्मान से नवाजा गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान उन्हें हैंडलूम और पारंपरिक हस्तशिल्प के क्षेत्र में 60+ वर्षों के असाधारण योगदान के लिए दिया गया है। 
🎨 शुरुआती जीवन और शिक्षा
खेमराज का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था और उनके परिवार का हैंडलूम या बुनाई से कोई संबंध नहीं था।
उन्होंने ताड़ के बुनाई और हैंडलूम टेक्नोलॉजी का अध्ययन सरकारी आईटीआई, श्रीनगर से किया। 
🧵 करियर और योगदान
🪢 हैंडलूम में शुरुआत
1966 में पानीपत (हरियाणा) में वीवर्स सर्विस सेंटर से जुड़े और पानीपत को भारत के सबसे बड़े हैंडलूम हब में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने पारंपरिक खेस बुनाई में नए डिज़ाइन और उत्पाद विकसित किए — जैसे बिस्तर के चादर, कवर आदि — ताकि स्थानीय उद्योग को नए बाजार मिल सकें। 
✨ नवाचार और कला
जमदनी कला को ऊन शॉल और अन्य उत्पादों में अनुकूलित कर, पारंपरिक हैंडलूम को आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मांगों के अनुकूल बनाया।
टेपेस्ट्री और वॉल हैंगिंग में कलाकारों के चित्रों को लूम पर कैनवास जैसा बुनकर अद्भुत नतीजे दिए।
पक्की डाइंग प्रक्रियाएँ विकसित कर पानीपत इंडस्ट्री की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाया। 
📚 प्रशिक्षण और समर्थन
हजारों बुनकरों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर उन्होंने रोजगार और कौशल को बढ़ावा दिया।
उनकी मेहनत से हजारों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई और पानीपत का हैंडलूम उद्योग वैश्विक पहचान बना। 
🌍 सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
खेमराज सुंदरियाल की कला न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही गई है।पानीपत का हैंडलूम आज वैश्विक बाज़ार में प्रसिद्ध है, और यह उनकी मेहनत का परिणाम है।

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