PADMSRI GOPAL JI TRIVEDI
डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी (Dr. Gopal Ji Trivedi)
🏅 पद्मश्री 2026 — राष्ट्रीय सम्मान
🇮🇳 डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी को पद्मश्री (भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें विज्ञान और अभियंत्रण (Science & Engineering/Agriculture) के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है।
📌 प्रारंभिक जीवन और संघर्ष
जन्म: मुज़फ्फ़रपुर जिले के मतलूपुर गाँव, बिहार में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में।
प्रारंभिक पढ़ाई गाँव के स्कूल से शुरू हुई।
पिता के निधन के कारण पढ़ाई बीच में रोकनी पड़ी और खेतों में काम करना पड़ा।
माँ के प्रोत्साहन से उन्होंने पढ़ाई फिर जारी रखी।
🎓 शिक्षा और अनुसंधान
मैट्रिक पूसा हाई स्कूल से, फिर विज्ञान विषय में इंटरमीडिएट।
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बी.एससी. (Agriculture) और एम.एससी./M.Sc. कृषि विज्ञान में।
Ph.D. कृषि विज्ञान में प्राप्त की — अध्ययन के बाद वैज्ञानिक अनुसंधान एवं कृषि विकास में सक्रिय भूमिका ली।
👨🔬 पेशेवर जीवन और योगदान
📍 कृषि विज्ञान में नवाचार
डॉ. त्रिवेदी की विशेषज्ञता खासकर खेती के वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान में रही है:
लीची खेती (Litchi Cultivation) में “रिजुवेनेशन कैनोपी मैनेजमेंट” तकनीक को लागू कर बूढ़े बागों को पुनर्जीवित किया और उत्पादन बढ़ाया।
बाढ़-प्रवण इलाकों में जलीय कृषि (aquaculture) और मखाना, सिंघाड़ा जैसी फसलों को वैज्ञानिक तरीके से उगाने की पहल की, जिससे किसानों की आय स्थिर हुई।
रबी मक्का को बढ़ावा देकर किसान समुदाय को पारंपरिक फसलों के अलावा नए अवसर प्रदान किये।
🧑🏫 नेतृत्व और सेवा
प्रोफ़ेसर और फिर वाइस-चांसलर (VC) के रूप में डॉ. त्रिवेदी ने कृषि विश्वविद्यालयों में नेतृत्व की भूमिका निभाई।
उन्होंने कृषि वैज्ञानिक अनुसंधान को ग्रामीण परिस्थिति के अनुकूल लागू करने में भी अहम भूमिका निभाई।
🌾 किसानों के लिए योगदान
डॉ. त्रिवेदी का जीवन खेती से जुड़ा हुआ है और वह सदैव किसानों के करीब रहे:
वे रिटायरमेंट के बाद भी किसानों को नई तकनीक, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
उनका मानना है कि वैज्ञानिक सोच और मिट्टी का जुड़ाव खेती को सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि सम्मान और समृद्धि का जरिया बनाता है।
🏆 उपलब्धियाँ
पद्मश्री सम्मान — 2026 (Science & Engineering / Agriculture) �
कृषि के विविध क्षेत्रों में नवाचार और उच्च उत्पादन के लिए राष्ट्रीय मान्यता। �
किसानों के लिए जीवन-व्द्धक तकनीकों का प्रचार एवं उपयोग।

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