PADMSRI K RAMASAMY
डॉ. के. रामासामी (Dr. K. Ramasamy) एक प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और समाजसेवी हैं जिन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उन्हें कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में उनके असाधारण और दीर्घकालिक योगदान के लिए दिया गया, खासकर कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों के सशक्तिकरण के लिए।
डॉ. रामासामी तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU), कोयंबटूर के पूर्व कुलपति रहे हैं और उन्होंने कृषि शिक्षा को आधुनिक, व्यावहारिक और किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनके प्रयासों की वजह से कृषि शिक्षा में नवीन तकनीकों, बेहतर प्रशिक्षण और अनुसंधान-आधारित पद्धतियों को शामिल किया गया, जिससे छात्रों के साथ-साथ किसानों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिला।
उनका मानना है कि कृषि का विकास केवल वैज्ञानिक ज्ञान से ही नहीं बल्कि किसानों के साथ साझेदारी से संभव है, इसलिए उन्होंने किसानों के लिए नई योजनाएँ और कार्यक्रम विकसित किए। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों, विशेषकर विधवा महिलाओं को दुधारू पशु, मुर्गियाँ, भेड़-बकरियाँ आदि उपलब्ध कराने की पहल की, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है और रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
डॉ. रामासामी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी विभिन्न समितियों — जैसे इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) — में भाग लिया, जहां उन्होंने कृषि नीति, शिक्षा और अनुसंधान को दिशा देने में योगदान दिया। उनके विचार किसानों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को एक साथ जोड़ने वाले रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में समग्र विकास को बढ़ावा मिला है।
पद्मश्री मिलने पर उन्होंने यह सम्मान पूरे कृषि समुदाय को समर्पित किया और कहा कि यह कृषि उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए सामूहिक प्रयासों की मान्यता है।
डॉ. के. रामासामी की यह उपलब्धि न सिर्फ अनुसंधान-आधारित शिक्षा की सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह देश के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली अवधारणाओं और कार्यों की भी सराहना है।

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