PADMSRI YUMNAM JATRA SINGH

 

पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित (Posthumous Padma Shri) युमनाम जात्रा सिंह (Yumnam Jatra Singh) की जीवनी (Biography)
🌟 पद्म श्री सम्मान — युमनाम जात्रा सिंह
📅 Padma Shri 2026 (पद्म श्री 2026) सम्मान मरणोपरांत (Posthumous) युमनाम जात्रा सिंह को कलात्मक (Art) और सांस्कृतिक सेवाओं के क्षेत्र में उनके जीवन भर के योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
👤 प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
🔹 पूरा नाम: युमनाम जात्रा सिंह (Yumnam Jatra Singh)
🔹 जन्म: 10 सितंबर 1923, तेंगडोंग्यान आवांग लेइकाई, इम्फाल वेस्ट (मणिपुर) में।
🔹 पिता: यु. तोम्बा सिंह
🔹 माता: यु. (ओ) थबली देवी।
🎭 कला और संस्कृति में उत्कृष्ट योगदान
युमनाम जात्रा सिंह मनिपुर की दिव्य कला “नाटा संकीर्तन (Nata Sankirtana)” के महान गुरुओं में से एक थे — यह एक वैष्णव परंपरागत तथा आध्यात्मिक प्रदर्शन कला है जिसमें भक्ति गीत, ढोलक (पुंग), झांझ/कर्टल और शंख (मोइबुंग) शामिल होते हैं।
उन्होंने बचपन से ही नाटा संकीर्तन में गहरा रुचि दिखाया और कई बड़े गुरुओं से प्रशिक्षण लिया।
प्रारंभ में कृषि कार्य से जुड़े रहे, लेकिन कला के प्रति लगन ने उन्हें पूरी तरह उसी दिशा में आगे बढ़ाया।
उन्होंने Eshei (गीत) और Cholom (नृत्य/ढोलक शैली) में डिप्लोमा हासिल किया — क्रमशः 1976 और 1980 में।
Jawaharlal Nehru Manipur Dance Academy (JNMDA) में उन्होंने अतिथि गुरु के रूप में सेवा दी और कई छात्रों को प्रशिक्षण दिया।
All India Radio, इम्फाल के लिए उन्होंने Approved Artist के रूप में भी कला प्रस्तुत की।
🏆 प्रमुख सम्मान और उपलब्धियाँ
युमनाम जात्रा सिंह ने अपने करीब 7 दशकों के कला से समर्पित जीवन में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किए:
🧠 कला की गहराई: नाटा संकीर्तन
इस पारंपरिक कला में शामिल हैं:
🎼 भक्ति गीत (Devotional singing)
🥁 पुंग (ड्रम)
🔔 कर्टल (झांझ)
🐚 मोइबुंग (शंख)
यह कला कृष्ण और राधा की दिव्य कथाओं को बेलन के साथ प्रस्तुति के रूप में प्रस्तुत करती है और इसे UNESCO ने 2013 में संस्कृति की अमूर्त धरोहर के रूप में सूचीबद्ध किया है।

🪦 
🔹 निधन: 11 अक्टूबर 2025
🔹 आयु: 102 वर्ष
🔹 स्थिति: उनका निधन 2025 में हुआ, और अब इस वर्ष पद्म श्री सम्मान उनके परिवार को मरणोपरांत प्रदान किया जा रहा है। उनकी पत्नी, संतान और विद्यार्थियों ने इस सम्मान पर गर्व और भावुकता व्यक्त की है।
 सार — युमनाम जात्रा सिंह
मनिपुर के महान नाटा संकीर्तन गुरू
 दशकों तक कला और संस्कृति को समर्पित जीवन
 अनेक राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता
 पद्म श्री 2026 (Posthumous) सम्मान से सम्मानित 

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