PADMSRI NURUDDIN AHAMED
पद्मश्री नूरुद्दीन अहमद (Nuruddin Ahmed) को 2026 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है, जो भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, और यह उन्हें कला, विशेषकर मूर्तिकला, थिएटर और स्टेज क्राफ्ट (मंचीय कला-निर्देशन) में उनके बहुआयामी और उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है। वे असम के मशहूर कलाकार, मूर्तिकार, थिएटर कलाकार और कला निर्देशक हैं, जिनके काम ने असम की मोबाइल थिएटर संस्कृति को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है और उनकी कला न केवल कला-प्रेमियों बल्कि स्थानीय समुदायों के बीच भी गहराई से लोकप्रिय रही है।
नूरुद्दीन अहमद का जन्म 17 जनवरी 1958 को असम के नलबाड़ी जिले के साथियाकुची गाँव में हुआ था, जहाँ से उन्होंने अपनी प्रारंभिक कला की राह शुरू की। उन्होंने जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्ट्स से औपचारिक कला-शिक्षा प्राप्त की और बाद में ललित कला अकादमी से आधुनिक मूर्तिकला तकनीकों का प्रशिक्षण लिया, साथ ही कठपुतली कला (puppetry) में भी विशेषज्ञता हासिल की।
अहमद ने दशकों से मूर्तिकला, कठपुतली, रंगमंचीय परिदृश्य-डिज़ाइन और स्टेज सेट-डिज़ाइन में काम किया है और उन्होंने असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विस्तार देने के लिए अपने प्रयास जारी रखे। उनके काम को सांस्कृतिक सौहार्द, साझा विरासत और क्षेत्रीय कला की पहचान के रूप में सराहा जाता है, और यह सम्मान उनकी कला की गहनता और सामाजिक प्रभाव की राष्ट्रीय-स्तर पर मान्यता है।
संक्षेप में, पद्मश्री नूरुद्दीन अहमद असम के एक समर्पित कलाकार हैं जिनकी कला और थिएटर में ऊँची प्रतिभा ने भारतीय रंगमंच और मूर्तिकला को नई पहचान दी है, और 2026 का पद्मश्री सम्मान उनके जीवन-भर की उत्कृष्ट सेवा का राष्ट्रीय प्रतीक है।

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