PADMSRI MANGALA KAPOOR
पद्मश्री मंगला कपूर (Prof. Mangala Kapoor) एक प्रेरणादायक भारतीय शास्त्रीय संगीतकार, शिक्षिका और समाज-प्रेरक हैं, जिन्हें भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा है। यह चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों के लिए दिया गया है — सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर इसकी घोषणा की।
मंगला कपूर का जीवन संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। जब वे सिर्फ 12 वर्ष की उम्र की थीं, तभी उन पर तेज़ाब हमला (acid attack) हुआ, जिससे उनका चेहरा गंभीर रूप से विकृत हो गया और उन्हें कई साल अस्पताल में बिताने पड़े तथा 37 से अधिक शल्यक्रियाएँ (surgeries) करानी पड़ीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और संगीत को अपनी शक्ति और पहचान बनाया।
कपूर ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी तक की शिक्षा पूरी की और 1989 से 2019 तक वहीं संगीत विभाग में शिक्षक एवं एसोसिएट प्रोफ़ेसर के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने संगीत को केवल कला नहीं बल्कि समाज-सुधार का माध्यम भी बनाया। वे ग्वालियर घराने की प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायिका के रूप में जानी जाती हैं और उन्होंने नि:शुल्क संगीत शिक्षा देकर कई छात्रों को जीवन में आगे आने में मदद की है।
उनकी प्रेरक जीवन-कथा और संघर्ष का वर्णन उनकी आत्मकथा ‘सीरत’ में भी मिलता है, जिसमें उन्होंने अपने कठिन अनुभवों तथा संगीत के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को साझा किया है। कपूर को “काशी की लता” की उपाधि से भी सम्मानित किया गया है और उन्होंने महिलाओं और विकलांगों को प्रेरित करने वाले रोल मॉडल के रूप में कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
2026 में पद्मश्री सम्मान मिलने पर उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके जीवन-भर के संघर्ष, शिक्षा और संगीत के प्रति समर्पण का प्रतीक है, और इसे पाने से उन्हें और भी अधिक लोगों को संगीत और शिक्षा के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन से जोड़ने की प्रेरणा मिली है।

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