PADMSRI INDERJIT SINGH SIDHU
पद्मश्री हरिचरण सैइकिया (Haricharan Saikia) असम के प्रतिष्ठित सत्रीय (Sattriya) नृत्य के प्रणेता और शास्त्रीय कलाकार हैं, जिन्हें 2026 में भारत सरकार द्वारा “पद्मश्री” सम्मान से विभूषित किया गया है। यह सम्मान उन्हें छह दशकों से अधिक समय तक सत्रीय नृत्य कला के संरक्षण, अभ्यास और प्रचार-प्रसार में उनके अनमोल योगदान के लिए दिया गया है, जिससे असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। सत्रीय भारत की मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है और इसके संरक्षण में सैइकिया का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
हरिचरण सैइकिया का जीवन सत्रीय कला से गहरे जुड़े रहा है। उन्होंने अपने बचपन में ही कमानाबारी सत्र (माझुली, लखीमपुर जिला) में गुरु मणिराम दत्ता बोरबायन के निर्देशन में सत्रीय नृत्य का अध्ययन शुरू किया था। अपने गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने नृत्य की तकनीक, अभिव्यक्ति और परंपरा की गहन समझ विकसित की, और बाद में अपने संस्थान के माध्यम से अनगिनत विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने इस कला में महिलाओं की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया, जो पारंपरिक रूप से पुरुषों-प्रधान शास्त्रीय मंच रहा है, और युवा कलाकारों की पीढ़ी को सत्रीय नृत्य की बारीकियों से अवगत कराया।
96 वर्ष की उम्र में भी हरिचरण सैइकिया समाज के लिए सक्रिय हैं और नृत्य सिखाने का कार्य जारी रखे हुए हैं। पद्मश्री सम्मान मिलने पर उन्होंने इसे अपने गुरु, सहयोगियों और सत्रीय कला के समर्पित कलाकारों को समर्पित किया है, और कहा है कि यह सम्मान इस कला की दीर्घकालिक प्रासंगिकता और उसके उज्जवल भविष्य का प्रतीक है। सैइकिया का जीवन भारतीय कला-संस्कृति के प्रति समर्पण, अनुशासन और निरंतरता का प्रेरणास्पद उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।

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