PADMSRI LARS CHRISTIAN KOCH

 

डॉ. पद्मश्री लार्स-क्रिश्चियन कोच (Prof. Dr. Lars-Christian Koch)
प्रोफेसर (डॉ.) लार्स-क्रिश्चियन कोच एक प्रसिद्ध जर्मन एथनोम्यूजिकोलॉजिस्ट (संगीतशास्त्री) हैं, जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उन्हें कला (Arts) क्षेत्र में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति उनके गहन योगदान के लिए दिया गया है। पुरस्कार 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित हुआ था।
पद्मश्री 2026 प्राप्ति: 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल। यह पुरस्कार उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत (खासकर उत्तर भारतीय राग संगीत) की थ्योरी और प्रैक्टिस, बौद्ध संगीत, रवींद्र संगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के निर्माण पर उनके दशकों के शोध के लिए मिला है।
प्रशंसा और बधाई: भारतीय राजदूत अजित वी. गुप्ते (जर्मनी में) ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। भारतीय दूतावास और टैगोर सेंटर ने उनके भारत-जर्मनी सांस्कृतिक आदान-प्रदान में योगदान की सराहना की।
वर्तमान पद: 2018 से वे हंबोल्ट फोरम (Humboldt Forum), बर्लिन में Staatliche Museen zu Berlin के कलेक्शंस के डायरेक्टर हैं। इससे पहले वे Ethnologisches Museum के एक्टिंग हेड थे।
कोई नई घटना: पुरस्कार घोषणा के बाद कोई बड़ा नया अपडेट नहीं, लेकिन यह उनके भारत के साथ लंबे जुड़ाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है।
जीवनी (संक्षिप्त परिचय)
जन्म: 1959, पीने (Peine), लोअर सैक्सोनी, जर्मनी। वर्तमान आयु: 66 वर्ष।
शिक्षा:
एथनोलॉजी (Ethnology) में अध्ययन।
बॉन यूनिवर्सिटी से म्यूजिकोलॉजी में PhD।
एथनोम्यूजिकोलॉजी में विशेषज्ञता।
करियर और योगदान:
उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत (राग संगीत) की थ्योरी और प्रैक्टिस पर गहन शोध।
भारत में कई फील्डवर्क, खासकर पश्चिम बंगाल में रवींद्र संगीत (Rabindra Sangeet) पर अध्ययन।
बौद्ध संगीत, लोकप्रिय संगीत, शहरी संस्कृति, ऐतिहासिक रिकॉर्डिंग्स और म्यूजिक आर्कियोलॉजी पर काम।
पारंपरिक भारतीय वाद्य यंत्र निर्माताओं (जैसे कानाइलाल एंड ब्रदर्स) पर महत्वपूर्ण अध्ययन, जो 1995 में बंद हो गया था।
तीन किताबें प्रकाशित: भारतीय संगीत और वाद्य यंत्रों पर।
कोलोन यूनिवर्सिटी और बर्लिन यूनिवर्सिटी ऑफ द आर्ट्स में एथनोम्यूजिकोलॉजी के प्रोफेसर और गेस्ट प्रोफेसर (वियना और शिकागो यूनिवर्सिटी में भी)।
2003 से Ethnologisches Museum, बर्लिन में मीडिया, एथनोम्यूजिकोलॉजी और बर्लिन फोनोग्राम आर्काइव के हेड रहे।
भारत से जुड़ाव: दशकों से भारत की यात्राएं, भारतीय संगीत को वैश्विक एथनोम्यूजिकोलॉजी में महत्वपूर्ण क्षेत्र बनाने में योगदान। भारतीय संस्कृति और जर्मनी के बीच पुल का काम किया।
दर्शन: भारतीय संगीत को सिर्फ ध्वनि नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और समाज का हिस्सा मानते हैं। उनके काम ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संगीत की समझ बढ़ाई।
डॉ. लार्स-क्रिश्चियन कोच का जीवन भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति समर्पण और क्रॉस-कल्चरल रिसर्च का प्रतीक है। पद्मश्री जैसे सम्मान उनके योगदान की अंतरराष्ट्रीय मान्यता हैं।

Comments

Popular posts from this blog

MAHUA BAGH GHAZIPUR

GUJARATI ALPHABETS AND SYMBOLS

MUNNA CHOWK PATNA