PADMSRI KUMARSAMY THANGARAJ

 

डॉ. कुमारास्वामी थंगराज (Kumaraswamy Thangaraj) एक प्रसिद्ध भारतीय जीन वैज्ञानिक (Geneticist) और अणु-जीवविज्ञान (Molecular Biology) शोधकर्ता हैं, जिन्हें हाल ही में भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है, जो देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, उनके मानव जनसंख्या अनुवांशिकी और चिकित्सा जीनोमिक्स के क्षेत्र में लंबी और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए। 
डॉ. थंगराज का जन्म 2 जून 1963 को चेय्यूर, कांचीपुरम ज़िला, तमिलनाडु में हुआ था और उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से अपने बी.एससी., एम.एससी और पीएच.डी. तक की पढ़ाई पूरी की। � वे हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं और उन्होंने मानव जनसंख्या अनुवांशिकी (Population Genetics) और मानव रोगों की जीन आधारित वजहों पर गहन शोध किया है। 
उनके शोध में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष शामिल हैं कि भारतीय आबादी मुख्यतः दो मूलभूत पूर्वज समूहों — एनसीआई (Ancestral North Indians) और एएसआई (Ancestral South Indians) — से उत्पन्न हुई है और आंधमान के द्वीपों के आदिवासी समूह, जैसे ग्रेट अंडमानीज़ और ओंगे, आधुनिक मानवों के पहले प्रवासियों के सीधे वंशज हैं। � उन्होंने जाति-व्यवस्था एवं नज़दीकी विवाह के कारण होने वाली अनुवांशिक बीमारियों पर भी शोध किया है और COVID-19 के जीनोम सिक्वेंसिंग प्रोजेक्ट में भी अहम भूमिका निभाई है।
डॉ. थंगराज 30 से अधिक वर्षों से शोध के क्षेत्र में सक्रिय हैं, और वे भारतीय मानव अनुवांशिकी सोसायटी (Indian Society of Human Genetics) के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं तथा लगभग 300 शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं, जो मानव इतिहास, अनुवांशिकी और स्वास्थ्य अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। 
2026 के पद्मश्री पुरस्कार के अलावा उन्हें जे.सी. बोस फेलोशिप, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) तथा भारतीय विज्ञान अकादमी (IASc) का फेलो चुना जाना और कई अन्य राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हैं, जो उनके वैज्ञानिक योगदान की व्यापक पहचान का संकेत हैं। 

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