PADMSRI MAHENDRA KUMAR MISHRA

 

पद्मश्री महेंद्र कुमार मिश्रा (Mahendra Kumar Mishra) एक प्रतिष्ठित भाषा वैज्ञानिक, लोककथा शोधकर्ता और शिक्षाविद् हैं, जिन्हें भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है — यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उनके भाषा, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए दिया गया है। 
मिश्रा का जन्म ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के सीनापाली क्षेत्र में हुआ था और उन्होंने अपनी लगभग चार दशक लंबी सेवा में ओडिशा की आदिवासी व क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और शिक्षा में योगदान किया। वे एक उत्कृष्ट लिंग्विस्ट (भाषाविद्) और फोल्कलोरिस्ट (लोककथा-शोधकर्ता) हैं, जिन्होंने कई जनजातीय समुदायों की मूल कथाएँ, मिथक, कहावतें और गीत दस्तावेज़ीकृत कर उन्हें पुस्तकों और शोध कार्यों के रूप में आम जनता तक पहुँचाया है, जिससे इन बोली-भाषाओं और संस्कृति को लिखित इतिहास में स्थान मिला। 
उन्होंने मूल भाषा-आधारित बहुभाषी शिक्षा (Mother Tongue Based Multilingual Education) को अपनाने और स्कूल पाठ्यक्रम में आदिवासी भाषाओं को शामिल करने में अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे हजारों बच्चों को अपनी भाषा में शिक्षा का अवसर मिला और उनकी पहचान मजबूत हुई। इसके अलावा उन्होंने UNESCO का International Mother Language Award 2023 जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त किया है, जो उनके जीवन-भर के भाषा संरक्षण कार्य का वैश्विक स्तर पर सम्मान है। 
मिश्रा ने 25 से अधिक पुस्तकें और शोध कार्य प्रकाशित किए हैं, जिनमें ओड़िया और जनजातीय लोककथाएँ, मौखिक महाकाव्य और सांस्कृतिक अध्ययन शामिल हैं। उनके प्रयासों ने भाषाई विविधता को संरक्षित करने, शिक्षा नीति में सुधार लाने और आदिवासी विरासत को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 2026 में पद्मश्री पुरस्कार मिलने के बाद उनका यह सम्मान भारत के साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में उनके अथक कार्यों की राष्ट्रीय पहचान बन चुका है। 

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