PADMASHRI CHIRANJI LAL YADAV

 

पद्मश्री चिरंजी लाल यादव :

नाम: चिरंजी लाल यादव (Chiranji Lal Yadav)
पुरस्कार: पद्मश्री 2026 (कला / Traditional Brass Craft) �
क्षेत्र: पीतल (ब्रास) दस्तकारी / पारंपरिक हस्तशिल्प 
स्थान: मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत 
🎓 प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
चिरंजी लाल यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हुआ। 
वे गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं और प्रारंभ में पिता का चना बेचने तथा मजदूरी जैसी कठिनाइयों का सामना किया। 
शिक्षा केवल कक्षा 7 तक हो पाई थी, इसके बाद गरीबी के कारण काम पर लगना पड़ा। 
🎨 हस्तशिल्प और कला में योगदान
चिरंजी लाल यादव ने पीतल (ब्रास) की नक्काशी (Brass engraving) कला को करीब 56+ वर्षों से बनाए रखा है। 
उन्होंने अपने गुरु स्वर्गीय अमर सिंह से 1970-73 में प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे कला में महारत हासिल की। 
महाराव वर्क, वर्मा वर्क, पचरंगा वर्क, अंगूरी वर्क, मरोड़ी वर्क आदि कला तकनीकों में दक्षता हासिल की। 
उनका कला-कार्य भारत और विदेशों में भी प्रदर्शित हुआ है — ढाका (बांग्लादेश) और फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) में भी उनके काम को दिखाया गया। 
वे न केवल खुद कारिगर हैं, बल्कि हजारों युवा शिल्पकारों को गुरु-शिष्य परंपरा में प्रशिक्षण दे चुके हैं। 
उनके दोनों पुत्र भी इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं। 
🟨 पूर्व के सम्मान
उनके पास पहले भी कई सम्मान हैं:
शिल्प गुरु अवार्ड
नेशनल मेरिट अवार्ड
राज्य पुरस्कार (1998-99, 1994-95)
राज्य दक्षता पुरस्कार
ये सम्मान उनके कला-कार्य और उत्कृष्ट शिल्प कौशल का प्रमाण हैं
सरकार ने 25 जनवरी 2026 को पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा की जिसमें
चिरंजी लाल यादव को पद्मश्री सम्मान के लिये चुना गया। 
📌 संक्षेप में — कौन हैं चिरंजी लाल यादव?
🔹 उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के एक पारंपरिक ब्रास (पीतल) दस्तकार।
🔹 वर्षों से नक्काशी कला में उत्कृष्टता।
🔹 हजारों शिल्पकारों को प्रशिक्षित किया।
🔹 पद्मश्री 2026 सम्मान से सम्मानित।
🔹 गरीबी और कठिनाइयों से संघर्ष कर कला को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

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