INDO EU TRADE DEALS 2026

 भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement - FTA) एक ऐतिहासिक कदम है, जिसे दोनों पक्षों ने "मदर ऑफ ऑल डील्स" (सभी डीलों की माँ) कहा है। यह समझौता 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित किया गया, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मौजूद थे।

मुख्य बातें (Key Highlights)

कब शुरू हुआ और कितना बड़ा है?

बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, जो 2013 में रुकी थी। 2022 में दोबारा शुरू हुई और अब 2026 में पूरी हुई। यह भारत और EU का अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है।

यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों (दुनिया की एक-तिहाई आबादी) को कवर करता है और वैश्विक GDP का 25% (करीब $27 ट्रिलियन) का बाजार बनाता है।

टैरिफ (शुल्क) में कटौती

EU भारत से आने वाले 99.5% सामान पर टैरिफ खत्म या बहुत कम करेगा (7 साल में ज्यादातर शून्य)। इससे भारत के टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, मरीन प्रोडक्ट्स, फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टरों को फायदा होगा।

भारत EU से आने वाले 96.6% सामान (मूल्य के हिसाब से) पर टैरिफ कम या खत्म करेगा। इससे यूरोपीय कारें (जैसे BMW, Mercedes), वाइन, मशीनरी, केमिकल्स, फार्मा प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे।

EU को सालाना करीब 4 बिलियन यूरो (लगभग ₹35,000 करोड़) की ड्यूटी बचत होगी। EU का अनुमान है कि 2032 तक उसका भारत में निर्यात दोगुना हो जाएगा।

अन्य महत्वपूर्ण हिस्से

सेवाओं (Services), निवेश (Investment), डिजिटल ट्रेड, MSME सपोर्ट, प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स की मोबिलिटी (आना-जाना) पर प्रावधान।

सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप भी शामिल है (साइबर, मैरीटाइम सिक्योरिटी आदि)।

संवेदनशील सेक्टर जैसे कृषि और डेयरी में ज्यादा सुरक्षा रखी गई है।

यह भारत का 19वाँ या 22वाँ FTA है (विभिन्न स्रोतों के अनुसार), और "मेक इन इंडिया" को बड़ा बूस्ट मिलेगा।

कब लागू होगा?

अभी कानूनी जांच (Legal Scrutiny), अनुवाद और EU संसद + भारत में रैटिफिकेशन बाकी है। हस्ताक्षर 2026 में हो सकते हैं, और लागू होने की उम्मीद 2027 से है।

क्यों इतना महत्वपूर्ण?

यह समझौता अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति (जैसे भारत पर 25-50% टैरिफ) के जवाब में तेज हुआ। दोनों पक्ष अमेरिका पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। अमेरिका ने इस पर नाराजगी जताई है (ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यूरोप ने भारत से डील की जबकि हमने रूस ऑयल पर टैरिफ लगाए)।

पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों को चिंता है कि उनके टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को नुकसान होगा, क्योंकि भारत को EU में ज्यादा फायदा मिलेगा।

यह डील भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में बड़ा कदम है, जो रोजगार बढ़ाएगा, निर्यात बढ़ाएगा और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करेगा।

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