SUSLA
सुसला एक पारंपरिक लोक आभूषण है, जिसे भारत के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से महिलाएँ पहनती हैं। यह मुख्य रूप से हाथों में पहना जाने वाला कंगन या चूड़ी जैसा आभूषण होता है। सुसला धातु, चाँदी या कभी-कभी पीतल से बनाया जाता है। इसकी बनावट साधारण होने के बावजूद यह देखने में आकर्षक और पारंपरिक सुंदरता से भरपूर होता है।
ग्रामीण समाज में सुसला केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। कई स्थानों पर विवाह या विशेष अवसरों पर महिलाओं को सुसला उपहार में दिया जाता है। यह सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसे दुल्हन के श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाता है।
सुसला की डिजाइन साधारण गोलाकार होती है, लेकिन कई बार उस पर नक्काशी या उभरे हुए पैटर्न भी बनाए जाते हैं। पुराने समय में कारीगर हाथ से इसे तैयार करते थे, जिससे हर सुसला अपनी अलग पहचान रखता था। आज भी कुछ जगहों पर पारंपरिक कारीगर इस कला को जीवित रखे हुए हैं।
यह आभूषण टिकाऊ होता है और लंबे समय तक चल सकता है। ग्रामीण महिलाएँ इसे रोजमर्रा के काम करते समय भी पहनती हैं। आधुनिक समय में भले ही फैशन बदल गया हो, लेकिन पारंपरिक अवसरों और लोक नृत्यों में सुसला का महत्व आज भी बना हुआ है।
इस प्रकार, सुसला भारतीय लोक संस्कृति और पारंपरिक आभूषण कला का एक सुंदर उदाहरण है, जो सादगी के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाता है।
Comments
Post a Comment