SIR GANESH DUTT
सर गणेश दत्त सिंह (Sir Ganesh Dutt Singh)
सर गणेश दत्त सिंह भारत के बिहार व उड़ीसा (अब ओडिशा) क्षेत्र के एक प्रमुख वकील, शिक्षाविद और प्रशासक थे। वे 13 जनवरी 1868 को नालंदा जिले के गोनावा गाँव में जन्मे थे और 26 सितंबर 1943 को उनका निधन हुआ। उन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान उनकी सेवा और प्रशासनिक कौशल के लिए “सर” की उपाधि दी गई।
सर गणेश दत्त ने अपने पूरे जीवन को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए समर्पित किया। उन्होंने बिहार और उड़ीसा में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बहुत काम किया। वे स्थानीय स्वशासन मंत्री के रूप में 14 वर्षों तक कार्यरत रहे और इस दौरान उन्होंने कई बड़े सुधार और संस्थानों के विकास में योगदान दिया।
उनका जीवन दान और समाज सेवा के लिए उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने अधिकांश वेतन और व्यक्तिगत संपत्ति को शिक्षा, स्वास्थ्य और दान कार्यों में लगा दिया। पटना विश्वविद्यालय के लिए उन्होंने अपना घर “कृष्णा कुंज” दान कर दिया, जिससे वहाँ मनोवैज्ञानिक अनुसंधान और सेवा केंद्र की स्थापना हुई।
सर गणेश दत्त ने कई महत्वपूर्ण संस्थानों का समर्थन किया, जिनमें पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, आयुर्वेदिक कॉलेज, नेत्रहीन एवं गूँगे-बहरे विद्यालय, और अन्य शिक्षा स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। उन्होंने लगभग तीन-चौथाई वेतन 14 साल तक दान में दिया ताकि समाज के कमजोर वर्ग जैसे अनाथ, विधवा और गरीबों को लाभ मिल सके।
वे न केवल एक प्रभावशाली प्रशासक थे, बल्कि एक उदार दानी, समाज सुधारक और शिक्षा प्रेमी व्यक्ति भी थे। उनके योगदान के कारण आज भी बिहार में कई संस्थाएँ और कार्यक्रम उनके नाम पर याद किए जाते हैं। उनके जन्मदिन पर सामाजिक और चिकित्सा शिविरों के आयोजन होते हैं, जो उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।
सर गणेश दत्त सिंह का जीवन समाज सेवा, शिक्षा के विस्तार और लोगों के कल्याण के लिए समर्पित एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
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