IKAT SAREE

 


इकट साड़ी भारत की एक प्रसिद्ध पारंपरिक साड़ी है, जो अपनी विशेष बुनाई तकनीक के लिए जानी जाती है। “इकट” शब्द मलय-इंडोनेशियाई भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है “बांधना”। इस तकनीक में धागों को पहले से ही रंगने से पहले विशेष तरीके से बांधा जाता है, जिससे सुंदर और जटिल डिज़ाइन तैयार होते हैं। यह प्रक्रिया बहुत मेहनत और कुशलता मांगती है।

भारत में इकट साड़ियों की प्रमुख पहचान ओडिशा, गुजरात और तेलंगाना से जुड़ी है। ओडिशा की सांबलपुरी इकट साड़ी अपने पारंपरिक और धार्मिक मोटिफ जैसे शंख, चक्र और फूलों के डिज़ाइन के लिए प्रसिद्ध है। गुजरात की पटोला इकट साड़ी डबल इकट तकनीक से बनाई जाती है, जिसमें ताना और बाना दोनों को पहले रंगा जाता है। यह साड़ी बहुत महंगी और मूल्यवान मानी जाती है। तेलंगाना की पोचमपल्ली इकट साड़ी अपने ज्यामितीय और आधुनिक डिज़ाइनों के कारण लोकप्रिय है।

इकट साड़ियाँ सूती और रेशमी दोनों प्रकार के कपड़े में उपलब्ध होती हैं। सूती इकट साड़ियाँ हल्की और दैनिक उपयोग के लिए उपयुक्त होती हैं, जबकि रेशमी इकट साड़ियाँ त्योहारों और विशेष अवसरों पर पहनी जाती हैं।

इकट साड़ी की खासियत यह है कि इसके डिज़ाइन दोनों तरफ लगभग समान दिखाई देते हैं, जो इसकी उत्कृष्ट बुनाई का प्रमाण है। आज के समय में इकट डिज़ाइन आधुनिक फैशन में भी लोकप्रिय हो चुके हैं और इनसे कुर्ते, दुपट्टे और अन्य परिधान भी बनाए जाते हैं।

इस प्रकार, इकट साड़ी भारतीय हस्तकला, परंपरा और कला का सुंदर उदाहरण है, जो अपनी अनोखी बुनाई और आकर्षक डिज़ाइन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

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