BIHAR GAURAV GEET
बिहार गौरव गीत
जय हो बिहार, ज्ञान की धरती,
इतिहास जहाँ स्वर्णिम बनता।
गंगा की धारा, सोन का पानी,
मिट्टी में वीरों का बल पलता।
नालंदा-विक्रमशिला की छाया,
जग को शिक्षा का दीप दिया।
चाणक्य की नीति, बुद्ध की करुणा,
इस भूमि ने मानवता को सींच दिया।
यहीं जन्मे बुद्ध, शांति के दूत,
यहीं महावीर ने त्याग सिखाया।
अशोक ने धम्म का पथ अपनाया,
विश्व को अहिंसा का मंत्र बताया।
वीरों की भूमि, शूरों की धरा,
बाबा वीर कुंवर सिंह का मान।
स्वाधीनता की ज्वाला जगी जब,
बिहार बना संघर्ष की पहचान।
खेतों में लहलहाती हरियाली,
धान, गेहूँ, मक्का की शान।
मेहनतकश हाथों की यह धरती,
किसानों का है अभिमान।
लोकगीतों में बसती है माटी,
सोहर, कजरी, चैता की तान।
मिथिला की मधुबनी चित्रकला,
संस्कृति की अनमोल पहचान।
छठ महापर्व का अनुपम दृश्य,
सूर्य को अर्घ्य, श्रद्धा महान।
आस्था, संयम, प्रकृति से नाता,
दिखलाता है बिहार की जान।
भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका,
भाषाओं का सुंदर संगम।
सरलता, अपनापन, अतिथि देवो,
यही है बिहार का असली धर्म।
आज नया बिहार आगे बढ़ता,
विकास की राह पर कदम बढ़ाए।
शिक्षा, विज्ञान, श्रम और संकल्प,
नए सपनों को साकार बनाए।
युवाओं की आँखों में उज्ज्वल कल,
मेहनत से लिखी नई कहानी।
परंपरा संग आधुनिक सोच,
बिहार बने प्रगति की निशानी।
जय हो बिहार, गौरवशाली,
तेरा अतीत, वर्तमान महान।
तेरी मिट्टी को शत-शत नमन,
तू है भारत का अभिमान।
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