MALI CASTE
माली जाति – परिचय
माली जाति भारत का एक पारंपरिक कृषक और व्यवसायिक समुदाय है। यह समाज मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में पाया जाता है। माली जाति का ऐतिहासिक रूप से संबंध बागवानी, फूलों की खेती और सब्जी उत्पादन से रहा है। माली समाज को कृषि और बागवानी में विशेष निपुणता के लिए जाना जाता है।
परंपरागत रूप से माली समाज के लोग फूल, फल, सब्जियाँ और औषधीय पौधों की खेती करते हैं। वे धार्मिक और सामाजिक अवसरों के लिए फूलों की आपूर्ति में भी सक्रिय रहते हैं। पुराने समय में माली समाज का व्यवसाय गांव और शहर के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था, क्योंकि उनके द्वारा उगाए गए फूल और पौधे धार्मिक अनुष्ठानों, विवाह और त्योहारों में आवश्यक होते थे।
सामाजिक संरचना की दृष्टि से माली समाज में परिवार और कुल व्यवस्था का महत्व है। विवाह सामान्यतः सामाजिक परंपराओं और गोत्र के अनुसार संपन्न होता है। समाज में पंचायत या जातीय समिति सामाजिक अनुशासन बनाए रखने और विवादों के समाधान में सहायक होती है। माली समाज के लोकगीत, लोकनृत्य और त्योहार उनके जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। दीपावली, होली, छठ और तीज उनके प्रमुख उत्सव हैं।
भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा माली जाति को कई राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत शामिल किया गया है। इससे शिक्षा, रोजगार और कल्याण योजनाओं में विशेष लाभ प्राप्त होते हैं।
कुल मिलाकर माली जाति एक मेहनती, कुशल और प्रगतिशील समाज है। कृषि, बागवानी और व्यवसाय में योगदान के माध्यम से यह समाज भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। माली समाज अपने परिश्रम और कौशल के कारण भारतीय समाज का सम्मानित और आवश्यक हिस्सा माना जाता है।
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